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UN: जी7 के मंच पर पीएम मोदी ने गिनाईं संयुक्त राष्ट्र की कमियां, कहा- ऐसी संस्थाएं 21वीं सदी के अनुरूप नहीं

Mon, 22 May 2023 06:40 AM IST
वीरेंद्र शर्मा वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, हिरोशिमा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, हिरोशिमा Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Mon, 22 May 2023 06:40 AM IST
सार

पीएम मोदी ने चीन का नाम लिए बिना कहा, सभी देश यूएन चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें। यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिशों के खिलाफ मिलकर आवाज उठाएं।

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UN failed stop the conflicts PM Modi said G7 meeting such institutions are not according to the 21st century
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पिछली सदी में बनाई गईं वैश्विक संस्थाएं 21वीं सदी की व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं। जब तक इसमें मौजूदा विश्व की वास्तविकता प्रतिबिंबित नहीं होती, तब तक यह मंच महज चर्चा की एक जगह (टॉक शॉप) बना रहेगा। उन्होंने सवाल उठाया, शांति बहाली के विचार के साथ शुरू हुआ संयुक्त राष्ट्र (यूएन) आज संघर्षों को रोकने में सफल क्यों नहीं हो रहा? संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद की परिभाषा तक क्यों नहीं स्वीकार की गई है?
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हिरोशिमा में रविवार को जी-7 के सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने आश्चर्य जताया कि जब शांति और स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए बना संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में है, तो इन पर चर्चा के लिए अलग-अलग मंचों की जरूरत क्यों पड़ती है। इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए। यह जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र में सुधारों को लागू किया जाए। इस मंच को कमजोर देशों की आवाज भी बनना होगा। 
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दूसरों की क्षेत्रीय अखंडता व संप्रभुता का करें सम्मान
पीएम मोदी ने चीन का नाम लिए बिना कहा, सभी देश यूएन चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें। यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिशों के खिलाफ मिलकर आवाज उठाएं। भारत का हमेशा यह मत रहा है कि किसी भी तनाव, किसी भी विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से, बातचीत के जरिये किया जाना चाहिए।
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गुटेरस ने भी माना, सुरक्षा परिषद में बदलाव का वक्त
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मोदी की मांग से सहमति जताई। उन्होंने हिरोशिमा में पत्रकारों से कहा, यह मौजूदा विश्व के अनुरूप सुरक्षा परिषद तथा व्यापार संगठन में बदलाव का वक्त है। दोनों ही संगठन 1945 के शक्ति संबंधों को प्रतिबिंबित करते हैं। वैश्विक वित्तीय संगठन पुराना, निष्क्रिय व अनुपयोगी हो चुका है। यह कोविड व यूक्रेन हमले के बीच वैश्विक सुरक्षा की अपनी मूल जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहा है।

ब्रिटेन के पीएम सुनक बोले- वैश्विक सुरक्षा के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा
ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक ने कहा, वैश्विक सुरक्षा व संपन्नता के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा बन चुका है, पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को उससे पूरी तरह अलग नहीं होना चाहिए। वे देश में अधिनायकवाद को बढ़ा रहे हैं और विदेश में मुखर हैं। हम दूसरे देशों की संप्रभुता में चीन के आर्थिक दबाव के इस्तेमाल को रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं।


जेलेंस्की का भी जिक्र
पीएम मोदी ने कहा, हमने यूक्रेन के राष्ट्रपति बोलोदिमिर जेलेंस्की को सुना। मेरी उनसे मुलाकात भी हुई थी। मेरा मानना है, यह मानवता का मुद्दा है। बातचीत व कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। इसके समाधान के लिए, भारत से जो कुछ भी बन पड़ेगा, हम प्रयास करेंगे।
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