यूक्रेन-रूस जंग का असर: अब तक बेअसर हैं ओपेक देशों से तेल उत्पादन बढ़वाने की अमेरिकी कोशिशें
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विस्तार
यूक्रेन मामले में रूस के खिलाफ सख्त रुख अपना कर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अमेरिकी खेमे के ज्यादातर देशों को एकजुट करने में सफल रहे हैं। इससे देश के अंदर भी उनकी लोकप्रियता बढ़ने के संकेत हैं। इसके बावजूद इस संकट के कारण अमेरिकियों को तेल और गैस की रिकॉर्ड कीमत चुकानी पड़ रही है। अपने देश के लोगों को राहत दिलाने के लिए बाइडन ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), और वेनेजुएला की सहायता लेने की कोशिश की। लेकिन इस मामले में सऊदी अरब और यूएई का रुख उनके लिए एक बड़ा झटका रहा है। उधर खबर है कि वेनेजुएला भी तेल देने के बदले कड़ी सौदेबाजी कर रहा है।
वेनेजुएला की मान्यता देने की मांग
सऊदी अरब, यूएई और वेनेजुएला ने कूटनीतिक मोर्चों पर भी अमेरिका का साथ नहीं दिया है। बल्कि उनके रुख को रूस के ज्यादा अनुकूल समझा गया है। इसे देखते हुए अब यहां पर्यवेक्षकों ने कहा है कि सऊदी अरब और यूएई के साथ अमेरिका के इतने खराब संबंध कभी नहीं रहे। वेनेजुएला से पहले से ही संबंध खराब हैं। अमेरिका ने वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को मान्यता नहीं दे रखी है। अब मादुरो सरकार ने कहा है कि अमेरिका पहले उसे वैध सरकार की मान्यता दे, तभी वह तेल देने पर विचार करेगा।
अखबार द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी अरब के साथ अमेरिका के रिश्ते में मुख्य पेच सऊदी प्रिंस सलमान के प्रति बाइडन प्रशासन का रुख है। जो बाइडन इस आरोप से सहमत रहे हैं कि अखबार वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की हत्या प्रिंस सलमान के आदेश पर की गई थी। इसीलिए अब तक बाइडन प्रशासन प्रिंस सलमान से बात करने से इनकार कर रहा था। साथ ही बताया जाता है कि सऊदी अरब और यूएई दोनों यमन में ईरान समर्थित हाउथी गुट को आतंकवादी संगठन की सूची से हटाने के कारण बाइडन प्रशासन से नाराज रहे हैं।
सऊदी अरब में ब्रिटेन के राजदूत रह चुके जॉन जेंकिंस ने द गार्जियन से कहा कि सऊदी अरब और यूएई के रूस के बीच संबंध हाल में मजबूत होते गए हैं। उन्होंने कहा- ‘व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि सऊदी अरब के लिए रूस उतना महत्त्वपूर्ण है। चीन उससे कहीं ज्यादा अहम है।’ जेंकिंस की राय है कि इस मामले में चीन का जो रुख रहेगा, उससे सऊदी अरब का रुख प्रभावित होगा।
सऊदी अरब ने भी फेरा मुंह
सऊदी अरब दशकों से अमेरिका का बहुत निकट सहयोगी रहा है। बताया जाता है कि अब उसके रुख बदल लेने से वाशिंगटन में गहरी चिंता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बाइडन प्रशासन ने हाल में सऊदी अरब से मेलमिलाप की कोशिश की है। पिछले महीने उसने पश्चिमी एशिया के लिए अपने कॉ-ऑर्डिनेटर ब्रेट मैकगुर्क को वहां भेजा था। यूक्रेन पर रूसी हमले से ठीक पहले बाइडन प्रशासन ने यमन में हाउथी गुट को धन पहुंचाने वाल नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। लेकिन अब साफ हुआ है कि उससे प्रिंस सलमान की सोच पर फर्क नहीं पड़ा है।
फिलहाल बाइडन प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि किसी तरह तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक को उत्पादन बढ़ाने पर राजी किया जाए, ताकि रूसी तेल की आवक घटने से बढ़ी महंगाई पर काबू पाया ज सके। लेकिन तेल बाजार के जानकारों ने कहा है कि तुरंत ऐसा हो पाने की उम्मीद नहीं दिख रही है।