अमेरिका से निराश यूक्रेन: जा रहा है चीन के पाले में, कई मुद्दों पर अमेरिकी रुख से है नाराज

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 30 Jul 2021 05:02 PM IST

सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि यूक्रेन के रुख में यह बदलाव अमेरिका के प्रति उसके असंतोष का इजहार है। इस बदलाव के संकेत पिछले महीने से ही दिख रहे हैं...
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार

क्या अमेरिका ने यूक्रेन को चीन के पाले में धकेल दिया है? ये सवाल हाल की कुछ घटनाओं के बाद कूटनीतिक विशेषज्ञों ने उठाया है। गौरतलब है कि यूक्रेन ने अपने देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए चीन से समझौता कर लिया है। साथ ही वह अब चीन में मानवाधिकारों के कथित हनन की आलोचना करने से बच रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि यूक्रेन के रुख में यह बदलाव अमेरिका के प्रति उसके असंतोष का इजहार है। इस बदलाव के संकेत पिछले महीने से ही दिख रहे हैं।
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पिछले महीने यूक्रेन ने बताया कि वहां हवाई अड्डे, सड़क, और रेल मार्ग के निर्माण के लिए उसका चीन के साथ समझौता हो गया है। इसके साथ ही उसने कोविड-19 के वैक्सीन मुहैया कराने के लिए चीन का आभार जताया। लगभग उसी समय संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद की बैठक में यूक्रेन ने उस प्रस्ताव से अपना दस्तखत वापस ले लिया, जिसमें चीन के शिनजियांग प्रांत में अल्पसंख्यक उइघुर मुसलमानों के मानवाधिकार के कथित हनन की जांच के लिए दल भेजने की मांग की गई थी।


यूक्रेन के रुख में ये बदलाव क्यों आया, इस बारे में जब अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी ने संपर्क किया, तो यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। लेकिन यूक्रेन की संसद में विदेश नीति संबंधी समिति के सदस्य आंद्रीय शारास्किन ने इसी चैनल को बताया कि मानवाधिकार परिषद में आए प्रस्ताव से दस्तखत हटाने की मांग चीन ने रखी थी। उन्होंने कहा- ‘जब यूक्रेन ने दस्तखत किए, तो चीन ने इसे वापस लेने के लिए कहा। उसने वैक्सीन सप्लाई की खेप भी रोक दी।’ शारास्किन ने कहा कि ये बात विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संसदीय समिति के सामने कही थी।

यूक्रेन को शुरुआत से ही वैक्सीन की कमी का सामना करना पड़ा है। आज भी वहां टीकाकरण की दर दूसरे पूर्वी यूरोपीय देशों से कम है। लेकिन यूक्रेन स्थित चीन के विदेश मंत्रालय ने इस बात का खंडन किया है कि वैक्सीन देने के लिए चीन ने कोई शर्त लगाई। उधर यूक्रेन की संसद में इस बारे में हुई चर्चा में यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कुछ साफ कहने से इनकार किया। उन्होंने इस सवाल का साफ जवाब नहीं दिया कि संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद में प्रस्ताव पर दस्तखत करने के बाद यूक्रेन ने उसे क्यों वापस लिया।

लेकिन हाल में यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार ओलेंक्सिव अरेस्टोविच एक बयान में ये साफ संकेत दे दिया है कि यूक्रेन का रुख क्यों बदला है। उन्होंने कहा- ‘मेरा संदेश साफ हैः अगर पश्चिमी देश रूस से दोस्ती बढ़ाने के लिए यूक्रेन के हितों की बलि चढ़ाते हैं, तो यूक्रेन पूरब की तरफ देख सकता है।’ गौरतलब है कि यूक्रेन का रूस से विवाद चल रहा है। इस बीच जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने रूस के साथ संबंध बढ़ाए हैं। अमेरिका ने भी इसे हरी झंडी दी है, जो हाल में रूस से जर्मनी तक बन रही गैस पाइपलाइन नॉर्ड स्ट्रीम-2 पर उसके रुख से जाहिर हुआ।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की इस गैस पाइपलाइन पर अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन के रुख पर खुली निराशा जता चुके हैं। उन्होंने हाल में कहा कि अमेरिका इस गैस पाइपलाइन का निर्माण रोकने में नाकाम रहा है। अब साफ संकेत हैं कि पश्चिम के रुख से आहत यूक्रेन चीन के संबंध बढ़ा रहा है, जिसके नाम से पश्चिमी देशों को परेशानी होती है।

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