Ukraine Crisis: अमेरिका हरकत में, रूस ने यूक्रेन में भेजे सेना के सैकड़ों ट्रक, अब आगे क्या करने वाले हैं पुतिन?
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पहली बार माना कि रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है। नाटो सदस्य देश एस्तोनिया, लातविया और लिथुआनिया में सैन्य तैनाती बढ़ाने की घोषणा के साथ अमेरिका ने एक बार फिर इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। पोलैंड की राजधानी वरसाव से नई दिल्ली लौटे भारतीय राजनयिक ने बताया कि क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है। इस दौरान रूस ने यूक्रेन में सैकड़ों सैन्य वाहनों के काफिले भेजने का निर्णय लिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के सैनिकों को 'शांति सेना' कहा है और स्पष्ट किया कि वह डोनेत्स्क पीपुल्स रिपब्लिक (डीपीआर) और लुहांस्क पीपुल्स रिपब्लिक (एलपीआर) में किसी तरह का नरसंहार नहीं होने देंगे।
राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के दो प्रांतों को आजाद देश घोषित करने, वहां सेना भेजने के निर्णय लेने में अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो संगठन की चेतावनियों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए कीव को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यदि यूक्रेन नाटो का सदस्य बनने की महत्वाकांक्षा छोड़ दे तथा पूर्ण निशस्त्रीकरण को अपनाए तो सबकुछ ठीक हो सकता है। हालांकि यूक्रेन के विदेश मंत्री ने रूस की इस सलाह पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
अमेरिका के सामने नाटो विस्तार बनाए रखने की चुनौती
रूस के यूक्रेन पर उठाए गए कदम के बाद अमेरिका के सामने नाटो के सदस्य देशों के विस्तार को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। यूक्रेन अभी नाटो का सदस्य नहीं है, यूरोपीय संघ का हिस्सा जरूर बना है। यूक्रेन रूस से सटा हुआ और रूस के लिए गेट-वे ऑफ यूरोप है। रूस के पड़ोसी देश एस्तोनिया, लातविया और लिथुआनिया भी नाटो के सदस्य देश हैं। इन देशों के सामने भी भविष्य को लेकर एक चिंता की स्थिति पैदा हुई है। हालांकि अमेरिका ने तीनों देशों में सैन्य तैनाती बढ़ाने और नाटो की मौजूदगी को मजबूत बनाने का निर्णय लिया है। इसकी घोषणा खुद राष्ट्रपति जो बाइडन ने की है। हंगरी ने भी यूक्रेन सीमा पर अपने सैनिकों की तैनाती का फैसला लिया है। यूरोपीय देश भविष्य के खतरे को भांपते हुए अपनी सुरक्षा तैयारियों को तेज कर रहे हैं। इस कड़ी में दो घटनाएं काफी महत्वपूर्ण हैं। पहला, यूक्रेन ने रूस के आक्रामक रुख का सामना करने की घोषणा की है। रूस ने बिना किसी ठोस नतीजे के यू टर्न न लेने की प्रतिबद्धता दिखाई है और सभी घटनाक्रमों के बीच में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने घोषणा की है रूस अपने तरीके में बदलाव करे तो कूटनीतिक तरीके से समस्या का समाधान संभव है। अमेरिका ने कहा कि उसके कूटनीतिक दरवाजे हमेशा खुले हैं।
जर्मनी रख रहा है हालात पर नजर
रूस के यूक्रेन में आक्रामक कदम उठाने, दो प्रांतों को अलग देश की मान्यता देने के कदमों की अंतरराष्ट्रीय जगत में तमाम देशों ने निंदा की है। रूस को यूक्रेन में घुसपैठ पर अंजाम भुगतने की धमकी देने वाले ब्रिटेन ने रोसिया, जनरल, आईएस, प्रॉमस्वॉयज और ब्लैक सी जैसे पांच बैंक के कामकाज पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंध के दायरे में रूस के तीन अरबपति गेनेडो टिमचेंको, बोरिस रोटेनबर्ग और आइगर रोटेनबर्ग पर भी प्रतिबंध लगाया है, लेकिन ब्रिटेन की यह कार्रवाई अपर्याप्त और दिखावे भर की मानी जा रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अभी वेट एंड वाच की रणनीति को अपनाया है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कॉल्ज ने नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस परियोजना को फिलहाल अगले निर्णय तक के लिए रोक दिया है। माना जा रहा है कि यूरोप के देशों को अभी भी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से कुछ उम्मीदें हैं।
पुतिन अब आगे क्या करेंगे?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन की तारीफ करते हुए उन्हें जीनियस बताया है। ट्रंप ने ऐसा करके न केवल जो बाइडन को चिढ़ाया है, बल्कि अमेरिका में बाइडन विरोध को हवा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कुछ दिन पहले ही कहा कि राष्ट्रपति पुतिन का दिमाग पढ़ना मुश्किल है। हाल के दिनों में पुतिन से तीन बार की बातचीत और तमाम चेतावनियां देने के बाद भी बाइडन रूस को आगे बढ़ने से नहीं रोक सके। दूसरी तरफ ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत तमाम यूरोपीय देश प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर हैं। रूस से टकराव बढ़ने पर गैस के विकल्प के लिए उन्हें अमेरिका की तरफ देखना पड़ेगा। इसके अलावा तेल के दाम भी काफी बढ़ जाने के संकेत हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर को पार करने का संकेत हैं। इस तरह से न केवल यूरोप बल्कि दुनिया के विकासशील देशों को मंहगाई और बड़ी आर्थिक मार झेलनी पड़ सकती है। वित्तीय मामले के जानकारों का कहना है कि इसका असर अमेरिका की भी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
क्या होगा तीसरा विश्वयुद्ध?
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को इसकी कोई संभावना नहीं नजर आती। पूर्व राजनयिक एसके शर्मा का कहना है कि रूस ने अपनी मसल पॉवर दिखाई है। राष्ट्रपति पुतिन ने संदेश दिया है कि रूस की चिंताओं को नहीं समझा गया तो वह कोई भी कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे। एक राजनयिक का कहना है कि तीसरे विश्वयुद्ध का अर्थ रूस भी समझता है। अमेरिका और यूरोपीय देशों को पता है कि तीसरे विश्वयुद्ध के छिड़ने का अर्थ क्या है? लेकिन विश्व बिरादरी दो धड़ों में बंटने की तरफ बढ़ रही है। रूस के यूक्रेन पर कदम को लेकर चीन, सीरिया, बेलारूस जैसे तमाम देशों ने बहुत ठंडी प्रतिक्रिया दी है।