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प्रतिबंधों का कितना होगा असर: अब अमेरिका और ईयू का मकसद है रूसी अर्थव्यवस्था का गला दबा देना

Tue, 22 Feb 2022 05:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 22 Feb 2022 05:43 PM IST
सार

व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मीडियाकर्मियों से कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का पैकेज पहले से तैयार कर रखा था। उसमें प्रमुख रूसी बैंकों के लेन-देन को रोक लगाने की बात सोच-विचार कर शामिल की गई। बाइडन प्रशासन का मकसद रूसी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है...

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Ukraine crisis: sanctions imposed on Russia could long-term impact on the Russian banking system
व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

यूक्रेन के दो अलगाववादी गणराज्यों को मान्यता देने के फैसले के विरोध में रूस पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों का रूसी बैंकिंग सिस्टम पर लंबे समय में बहुत खराब असर पड़ सकता है। इन अमेरिकी पाबंदियों का मुख्य मकसद रूसी बैंकिंग सिस्टम का गला दबाना है। इसके अलावा नए प्रतिबंधों का असर अनेक रूसी कंपनियों और व्यक्तियों पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ेगा। अमेरिका की योजना के मुताबिक इन कंपनियों और व्यक्तियों की विदेश में मौजूद संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में डॉलर का इस्तेमाल करने से उन्हें रोक दिया जाएगा।

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पहले से तैयार था प्रतिबंध पैकेज

व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मीडियाकर्मियों से कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का पैकेज पहले से तैयार कर रखा था। उसमें प्रमुख रूसी बैंकों के लेन-देन को रोक लगाने की बात सोच-विचार कर शामिल की गई। बाइडन प्रशासन का मकसद रूसी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है। इसीलिए उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्कों और डॉलर में होने वाले अंतरराष्ट्रीय लेन-देन से बाहर करने की योजना बनाई गई।

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रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने यूक्रेन के अलगावादी गणराज्यों को मान्यता देने की घोषणा सोमवार रात की। एक समाचार एजेंसी के मुताबिक उसके पहले ही प्रतिबंधों का जो खाका तैयार किया गया था, उसमें रूस के बड़े बैंकों- स्बेरबैंक, गैजप्रोम बैंक और वीटीबी को खास निशाना बनाने की बात शामिल की गई। इसके अलावा क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) से करीबी संबंध रखने वाले व्यक्तियों और रूसी व्यापारियों को इसमें शामिल करने का फैसला किया गया।
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बताया जाता है कि अमेरिकी तर्ज पर ही यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने भी अपने प्रतिबंधों की योजना बनाई है। जर्मन टीवी चैनल एआरडी के मुताबिक ईयू के प्रतिबंधों का मकसद रूस को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों से पूरी तरह अलग कर देना है। इसमें रूसी अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह ठप कर देने का उद्देश्य भी शामिल किया गया है।

दोनबास इलाके में आते हैं दोनेत्स्क और लुहांस्क

रूस ने यूक्रेन के दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को अलग देश के रूप में मान्यता दी है। ये दोनों गणराज्य दोनबास इलाके में आते हैं। बताया जाता है कि व्यावहारिक रूप से वे 2014 में ही यक्रेन से अलग हो गए थे, जब यूक्रेन में सत्ता पलट हुआ था। तब से ही इन दोनों गणराज्यों को रूस की मदद मिल रही थी। लेकिन अब तक रूस ने उन्हें औपचारिक मान्यता नहीं दी थी।

पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस ने इन दोनों क्षेत्रों को यूक्रेन से औपचारिक रूप से अलग करने के लिए ही पिछले नवंबर से दोनबास सीमा से पास सैनिकों की तैनाती शुरू की। बताया जाता है कि अभी वहां रूस के लगभग डेढ़ लाख सैनिक तैनात हैं। इसे देखते हुए ही अमेरिका और यूरोपियन यूनियन रूस को लगातार चेतावनी दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि अगर रूस ने इस इलाके में अपनी सेना भेजी, तो उसे अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था से अलग कर दिया जाएगा।



बताया जाता है कि सोमवार रात दोनों अलगाववादी गणराज्यों को मान्यता देने के बाद रूस ने अपनी सेना भी उस क्षेत्र में भेज दी है। इससे उस पर प्रतिबंध लगाने की स्थिति ने एक ठोस रूप ग्रहण कर लिया है।

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