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यूक्रेन संकटः यूरोपीय संघ ने दी चेतावनी, लेकिन चीन ने नहीं बदला अपना रुख 

Sun, 03 Apr 2022 02:46 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sun, 03 Apr 2022 02:46 PM IST
सार

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस वीडियो वार्ता के दौरान कहा कि यूक्रेन संकट का हल ढूंढने में चीन और ईयू सहयोग कर सकते हैं। ईयू इसमें प्राथमिक भूमिका निभा सकता है। इसके लिए उसे यूरोप का सुरक्षा ढांचा खड़ा करने के प्रश्न पर अमेरिका और नाटो से संवाद बनाना चाहिए। 

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Ukraine crisis: EU warns, but China not changed its stand
रूस-यूक्रेन युद्ध - फोटो : Social media

विस्तार

चीन और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच शुक्रवार को हुई बहु-प्रतीक्षित शिखर वार्ता पर यूक्रेन युद्ध का मुद्दा छाया रहा। इस सवाल पर दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन पाई। ईयू के नेताओं ने इस बात पर एतराज जताया कि चीन इस विवाद में रूस का साथ दे रहा है। जबकि चीन की तरफ से कहा गया कि ईयू को अमेरिकी रुख से प्रभावित होने के बजाय चीन से रिश्तों के मामले में स्वतंत्र नीति अपनानी चाहिए।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस वीडियो वार्ता के दौरान कहा कि यूक्रेन संकट का हल ढूंढने में चीन और ईयू सहयोग कर सकते हैं। ईयू इसमें प्राथमिक भूमिका निभा सकता है। इसके लिए उसे यूरोप का सुरक्षा ढांचा खड़ा करने के प्रश्न पर अमेरिका और नाटो से संवाद बनाना चाहिए। पर्यवेक्षकों के मुताबिक शी की इस बात का मतलब यह है कि ईयू को कूटनीतिक मामलों में स्वतंत्र रुख अपनाना चाहिए। उसे चीन पर यह दबाव नहीं डालना चाहिए कि वह रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों में शामिल हो। चीनी टीकाकारों ने कहा कि ईयू को अपनी सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर होना चाहिए और उसे सुनिश्चित करना चाहिए कि अमेरिका उसका‘अपहरण’ना कर ले।
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शी के साथ यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन की सीधी बातचीत हुई। यूरोपीय नेताओं ने इस पर निराशा जताई कि यूक्रेन पर हमला रोकने के लिए चीन ने रूस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने इन खबरों पर भी चिंता जताई कि पश्चिमी प्रतिबंधों को नाकाम करने की रूस की कोशिश में चीन उसकी मदद कर रहा है।
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लेकिन इस शी ने चीन का यह रुख दोहराया कि यूक्रेन संकट का कारण उस क्षेत्र में पैदा हुई सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। यह संकट वर्षों से गहरा रहा था। उन्होंने कहा- इसका बुनियादी समाधान यह है कि“सभी देशों की सुरक्षा संबंधी वैध चिंताओं”का ख्याल किया जाए। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसका अर्थ यह है कि चीन रूस के इस रुख से सहमत है कि नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) का विस्तार कर उसमें यूक्रेन और जॉर्जिया को भी शामिल करने की अमेरिका की जिद के कारण वर्तमान संकट खड़ा हुआ है।  

चीन की रेनमिन यूनिवर्सिटी में स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स के निदेशक वांग यिवेई ने चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में चीन के रुख को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा- जिस ढंग से क्षेत्रीय टकराव बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए पश्चिम को समझना चाहिए कि प्रतिबंध सही उपाय नहीं है। प्रतिबंधों के कारण यूरोप में भी आर्थिक ठहराव, महंगाई और कर्ज संकट बढ़ सकता है।


लेकिन यूरोपियन यूनियन के सूत्रों ने कहा है कि ईयू ने इस वार्ता के जरिए चीन को चेतावनी दी। उससे कहा गया कि यूक्रेन संकट में रूस का समर्थन करने की वजह से उसके अमेरिक और ईयू से संबंध बिगड़ सकते हैं, जबकि ये दोनों उसके सबसे बड़े दो व्यापार सहभागी हैँ। उन्होंने इस ओर भी ध्यान खींचा कि अमेरिका और यूरोप से चीन का जितना कारोबार होता है, वह रूस के साथ होने वाले उसके कारोबार से बहुत अधिक है। 

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