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लॉकडाउन में नहीं मिला इलाज तो अपने ही बेटे की ले ली जान, कहा- दुनिया में संतुलन बनाने के लिए देना होगा बलिदान

Sun, 14 Feb 2021 03:25 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 14 Feb 2021 03:25 PM IST
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UK news : Mother killed disabled son after suffering breakdown during lockdown covid-19
महिला वकील ओल्गा - फोटो : Social Media

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने करोड़ों लोगों की जिंदगियों को बेपटरी कर दिया। इस बीच ब्रिटेन से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। इंग्लैंड में एक 40 वर्षीय महिला वकील मानसिक परेशानियों से जूझ रही थीं। कोरोना प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में ठीक से इलाज नहीं मिल पाने की वजह से महिला वकील ओल्गा की हालत इतनी खराब हो गई कि उसने अपने ही बेटे की जान ले ली।

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ओल्गा के पति डीन फ्रीमैन उस वक्त स्पेन में थे, जब उनके बेटे 10 वर्षीय डिल्लन फ्रीमैन की मौत हुई। हालांकि, ओल्गा के हालातों को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 
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वेस्ट लंदन में रहने वाली महिला वकील ओल्गा का बेटा एक स्पेशल चाइल्ड था और उसे 24 घंटे देखभाल की जरूरत पड़ती थी। इस बच्चे की मौत से कुछ समय पहले का ओल्गा का एक ऑडियो भी वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में वे कहते हुए सुनी जा सकती हैं कि ये मेरा काम है। मुझे दुनिया में बैलेंस बनाने के लिए अपने बेटे का बलिदान देना ही होगा। डिल्लन को मारने के बाद ओल्गा ने अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया था।
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इस ऑडियो को सीक्रेट तरीके से ओल्गा के दोस्त ने रिकॉर्ड किया था। इस मामले में मनोचिकित्सक डॉ. मार्टिन लॉक का कहना था कि ओल्गा डिप्रेशन और बैचेनी से जूझ रही थी। उनकी कंडीशन कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते और ज्यादा खराब हो चुकी थी। इसके अलावा, डिल्लन का स्कूल भी बंद हो चुका था, जिसने उनके तनाव काफी बढ़ गया था।



उसकी रिपोर्ट्स के अनुसार, ओल्गा के हालत इतनी बिगड़ गई थी कि वह चीजें भूलने लगी थी, बेवजह अपने आप पर दबाव महसूस करती थी और कुछ भी ठीक से सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी। ओल्गा ने डॉक्टर्स से मदद लेने की भी कोशिश की थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते ठीक से इलाज नहीं मिल सका, जिससे उनकी मानसिक हालत और खराब हो गई।

डीन ने अपने बेटे के बारे में बात करते हुए कहा था कि मेरा बेटा स्वीट था। मैं उसे बहुत मिस कर रहा हूं, जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। इस मामले में जज का कहना था कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ओल्गा को मदद नहीं मिल पाई और लॉकडाउन उनके लिए बेहद भयानक साबित हुआ।

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