UK: US की मंजूरी बाद चागोस द्वीप समूह पर समझौते के करीब पहुंचे ब्रिटेन और मॉरीशस, विस्थापितों की चिंता बरकरार
UK: ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता हस्तांतरण का समझौता अंतिम चरण में है, जिसमें अमेरिकी सैन्य अड्डे को लेकर मतभेद हैं। ब्रिटेन की विपक्षी पार्टी और कुछ अमेरिकी नेताओं ने इसका विरोध किया है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने इस पर सहमति दी है।
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ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीप समूह पर संप्रभुता हस्तांतरण का समझौता अंतिम चरण में है। यह ब्रिटेन का विवादित क्षेत्र है, जिस पर अमेरिका एक सैन्य अड्डा है। ब्रिटिश सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सरकार ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अपनी मंजूरी दे दी है और अमेरिका की ओर से आगे कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। इस समझौते पर ट्रंप प्रशासन से परामर्श किया गया था।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्र के प्रवक्ता टॉम वेल्स ने कहा, हम समझौते को आंतिम रूप देने और उस पर हस्ताक्षर करने के लिए मॉरीशस सरकार के साथ काम कर रहे हैं। हस्ताक्षर होने के बाद समीक्षा और अनुमोदन के लिए इसे संसद के दोनों सदनों में रखा जाएगा।
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ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच यह बातचीत हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीपों को मॉरीशस को सौंपने के लिए हो रही है। इस समूह का सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया अमेरिका का एक महत्वपूर्ण नौसैनिक और बमवर्षक अड्डा है।
हालांकि, इस समझौते का ब्रिटेन की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी और अमेरिका में कुछ नेताओं ने विरोध किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा' बताया था। हालांकि, फरवरी में ब्रिटिश प्रधानमंत्री की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समर्थन जताते हुए कहा था, मुझे लगता है कि यह समझौता अच्छी तरह से पूरा हो जाएगा।
चागोस द्वीप का इतिहास
1965 में जब मॉरीशस ब्रिटेन का उपनिवेश था, तब ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह को इससे अलग कर दिया और इसे ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी (बीआईओटी) नाम दिया। 1960 और 1970 के दशक में ब्रिटेन ने करीब 2,000 द्वीपवासियों को वहां से जबरन हटाया ताकि अमेरिका अपना सैन्य अड्डा बना सके।
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मॉरीशस लंबे समय से इस द्वीप पर अपना दावा करता रहा है। हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय अदालतों ने ब्रिटेन से इसे लौटाने की अपील की है। पिछले साल अक्तूबर में ब्रिटेन ने इस पर सहमति जताई थी, लेकिन मॉरीशस में सरकार बदलने और डिएगो गार्सिया अड्डे को लेकर मतभेदों के कारण इसमें देरी हुई।
इस सौदे को लेकर चागोस द्वीप के विस्थापित लोग भी चिंतित हैं। इनमें से कई ब्रिटेन में बस चुके हैं, लेकिन वे इस फैसले में शामिल नहीं किए गए। चागोस कीबर्नाडेट डुगासे और बर्ट्रिस पोम्पे नाम की दो महिलाएं इस सौदे के खिलाफ ब्रिटिश सरकार पर मुकदमा करने की तैयारी में हैं। उन्हें डर है कि मॉरीशस को द्वीपों की संप्रभुता मिलने के बाद उनके लिए अपने जन्मस्थान लौटना और मुश्किल हो जाएगा।
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