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UK: अपने ही बच्चे की हत्या करने वाले भारतीय मूल के जोड़े पर फिर से लगे गंभीर आरोप, अदालत में होगी पेशी
Wed, 04 Oct 2023 12:06 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Wed, 04 Oct 2023 12:06 AM IST
सार
दोनों के लिए भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को जुलाई 2019 में लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यूरोपीय कन्वेंशन के अनुच्छेद 3 के तहत मानवाधिकार के आधार पर खारिज कर दिया था।
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London Indian-origin couple
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
लंदन से भारतीय मूल का जोड़ा जो चार साल पहले गुजरात में अपने 11 साल से गोद लिए गए बच्चे और बहनोई की हत्या के आरोप में भारत प्रत्यर्पित होने से बच गया था। वह अब इस महीने यूके की एक अदालत में अन्य आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं।
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बच्चे की आरोपी मां 58 वर्षीय आरती धीर और पिता 35 वर्षीय कवल रायजादा पर अब ब्रिटेन की राष्ट्रीय अपराध एजेंसी (एनसीए) ने ऑस्ट्रेलिया को कोकीन निर्यात करने के एक मामले और मनी लॉन्ड्रिंग के 12 मामलों का आरोप लगाया है। उनका मुकदमा 30 अक्टूबर को लंदन के साउथवार्क क्राउन कोर्ट में शुरू होने वाला है।
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एनसीए के एक प्रवक्ता ने कहा कि आरती धीर और कवलजीत सिंह रायजादा दोनों पर ऑस्ट्रेलिया को कोकीन निर्यात करने के एक मामले और मनी लॉन्ड्रिंग के 12 मामलों का आरोप लगाया गया है। प्रवक्ता ने कहा कि जब तक मामला चल रहा है, हम कोई टिप्पणी नहीं देंगे, लेकिन मुकदमा 30 अक्टूबर को साउथवार्क क्राउन कोर्ट में शुरू होने वाला है।
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इसलिए कोर्ट ने किया रिहा
बता दें कि दोनों के लिए भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को जुलाई 2019 में लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मानवाधिकार पर यूरोपीय कन्वेंशन के अनुच्छेद 3 के तहत मानवाधिकार के आधार पर खारिज कर दिया था।
न्यायाधीश एम्मा अर्बुथनॉट ने धीर और रायजादा को यह कहते हुए रिहा कर दिया कि यदि उन्हें प्रत्यर्पित किया गया, तो उन्हें भारत में आजीवन कारावास का सामना करना पड़ेगा। इधर, भारत सरकार ने आश्वासन दिया था कि उनके मामले में मृत्युदंड लागू नहीं होगा और कुछ अतिरिक्त आश्वासन भी दिए गए थे, जो अदालत द्वारा निर्धारित समय सीमा के बाद आए थे।
भारत सरकार की अपील की थी खारिज
दरअसल, फरवरी 2020 में लंदन के हाई कोर्ट में भारत की अपील भी खारिज हो गई। लॉर्ड जस्टिस जेम्स डिंगमैन्स और जस्टिस रॉबिन स्पेंसर ने फैसला सुनाया कि मानवाधिकार संबंधी चिंताओं से संबंधित अपेक्षित आश्वासन प्रदान करने में भारत सरकार की ओर से देरी से अपील की गई थी इसलिए खारिज कर दिया। दोनों पर आरोप फरवरी 2017 में भारत में उनके गोद लिए पुत्र गोपाल सेजानी और उनके बहनोई हरसुखभाई करदानी की हत्या से संबंधित हैं।
गुजरात पुलिस की जांच में दावा किया गया कि आरोपियों ने गोपाल को गोद लेने की साजिश रची थी और फिर जीवन बीमा भुगतान को विभाजित करने के लिए भारत में उसके अपहरण और हत्या की साजिश रचने से पहले उसका लगभग 1.3 करोड़ रुपये का बीमा कराया था।
लंदन में उच्च न्यायालय ने मजिस्ट्रेट अदालत के निष्कर्ष को दोहराया था कि दंपति को ब्रिटेन के भीतर ही अभियोजन का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि धीर और रायजादा द्वारा किए गए कथित अपराध इस क्षेत्राधिकार में किए गए थे।