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ब्रिटेन का दोमुंहापन: चीन के लिए सैन्य उपयोग वाली सामग्रियों का निर्यात बढ़ाया

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 11 Jun 2021 03:33 PM IST

सार

विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि 1989 में बीजिंग स्थित तियानानमेन चौराहे पर प्रदर्शनकारियों पर हुई सैनिक कार्रवाई के बाद से ब्रिटेन ने चीन के लिए ‘घातक’ उपकरणों के निर्यात पर रोक लगा रखी है। चीन की वायु सेना को वह एक बढ़ रहे खतरे के रूप में भी देखती है...
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चीन-ब्रिटेन
चीन-ब्रिटेन - फोटो : Agency (File Photo)

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विस्तार

ब्रिटेन सरकार ने पिछले तीन साल में चीन को 2.6 अरब डॉलर के सैनिक और असैनिक साजो-सामान के निर्यात की मंजूरी दी है। इसमें 1.6 अरब डॉलर की मंजूरी सिर्फ पिछले साल दी गई। इस तरह 2019 के मुकाबले 2020 में चीन को ब्रिटेन से निर्यात की मंजूरी में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी देखी गई। जबकि पिछले साल ब्रिटेन भी उन देशों में शामिल था, जिसने चीन के खिलाफ जोरदार मुहिम चला रखी थी। पिछले साल ब्रिटिश सरकार ने चीन को ‘ब्रिटिश हितों के लिए बढ़ता खतरा’ बताया था। साथ ही उसने कहा था कि चीन ब्रिटेन के आर्थिक हितों के लिए सबसे बड़ा 'सरकार आधारित' खतरा बन गया है।
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अमेरिकी वेबसाइट कॉन्जर्टियमन्यूज.कॉम ने ब्रिटिश विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि ब्रिटेन ने जिन चीजों के निर्यात की मंजूरी पिछले साल दी, उनमें ज्यादा दोहरे उपयोग वाली सामग्रियां हैं। यानी उनका सैनिक और असैनिक दोनों मकसदों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन 2018 से 2020 के बीच ब्रिटेन ने 53 अरब डॉलर की वैसी सामग्रियों के निर्यात की इजाजत दी हैं, जो विशुद्ध रूप से सैनिक इस्तेमाल के लिए हैं। इनमें लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी शामिल हैं। इनके अलावा सैन्य संचार उपकरण और वायु सुरक्षा प्रणाली में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी भी शामिल हैं।


विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि 1989 में बीजिंग स्थित तियानानमेन चौराहे पर प्रदर्शनकारियों पर हुई सैनिक कार्रवाई के बाद से ब्रिटेन ने चीन के लिए ‘घातक’ उपकरणों के निर्यात पर रोक लगा रखी है। चीन की वायु सेना को वह एक बढ़ रहे खतरे के रूप में भी देखती है। इसके बावजूद चीन की वायु सेना के लिए मददगार सामग्रियों और तकनीक के निर्यात को हरी झंडी दी।

इन निर्यातों से तिब्बत के प्रति ब्रिटेन के रुख पर भी सवाल उठा है। तिब्बत की आजादी के लिए मुहिम चलाने वाले संगठन सैम वाल्टन ने कॉन्जर्टियम न्यूज से कहा- ‘चीन की सरकार इन सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल तिब्बत में दमन जारी रखने में करेगी। इस तरह की चीजों का निर्यात करना मानव अधिकारों का पक्ष लेना नहीं है।’ गौरतलब है कि ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जेरमी क्विन ने बीते मार्च में कहा था कि रूस और चीन जैसे देशों ने पश्चिमी देशों की वायु क्षमताओं का अध्ययन किया है। अब वे अपनी ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं, जिनका मकसद पश्चिमी देशों का मुकाबला करना नहीं, बल्कि उनसे आगे निकलना है।

रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि इसके पहले ब्रिटेन ने ऐसी चीजों का निर्यात भी किया है, जिसका फायदा चीन की नौ सेना को मिला है। ब्रिटिश सेना के प्रमुख जनरल निक कार्टर यह कह चुके हैं कि अब समुद्र में सबसे ज्यादा बड़े इलाके पर चीन का प्रभुत्व है। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि ब्रिटेन दक्षिण चीन सागर में चीनी गतिविधियों को सबसे बड़े खतरे के रूप में देखता है। ये बात बीते मार्च में ब्रिटिश विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने साफ तौर पर कही थी। इसके बावजूद ये हैरतअंगेज है कि ब्रिटिश सरकार ने चीन के लिए सैन्य उपयोग वाली सामग्रियों के निर्यात को मंजूरी में बढ़ोतरी कर दी है।

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