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UK: ब्रिटेन में चल रहीं 85 शरिया अदालतें, धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने जताई चिंता, कहा- देश में एक कानून होना चाहिए

Mon, 23 Dec 2024 12:44 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 23 Dec 2024 12:44 PM IST
सार

आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में लगभग 100,000 इस्लामी विवाह हुए हैं और इन शादियों को नागरिक अधिकारियों के पास पंजीकृत नहीं कराया गया है। 

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UK becomes western capital of islamic rulings with operating 85 sharia courts concerns secular society
यूके में शरिया अदालतों की संख्या बढ़ रही - फोटो : नेशनल सेक्युलर सोसाइटी

विस्तार

ब्रिटेन में इस वक्त 85 शरिया अदालतें चल रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ब्रिटेन, पश्चिम की इस्लामिक राजधानी बनकर उभर रहा है। इन शरिया अदालतों का ब्रिटेन में रहने वाले मुस्लिम समुदाय पर खासा प्रभाव है। ये शरिया अदालतें शादी, तलाक और पारिवारिक मामलों पर अपने फैसले देती हैं। नेशनल सेक्युलर सोसाइटी ने न्याय व्यवस्था के समानांतर एक और धार्मिक न्याय व्यवस्था के खड़ा होने पर चिंता जताई है। 
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1982 में ब्रिटेन में हुई थी शरिया अदालतों की शुरुआत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन में पहली बार साल 1982 में शरिया अदालत की शुरुआत हुई थी और आज इनकी संख्या बढ़कर 85 हो गई है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में निकाह मुताह या 'आनंद के लिए शादी' का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। निकाह मुताह के अंतर्गत तीन दिन से लेकर एक साल तक के लिए अस्थायी शादी चलती है। इसे घोर महिला विरोधी प्रथा माना जाता है। 
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ब्रिटेन में एक लाख शादियां गैर पंजीकृत
शरिया अदालतों में इस्लामिक स्कॉलर्स का पैनल होता है, जिनमें अधिकतर पुरुष होते हैं। ये एक अनौपचारिक निकाय है, जो धार्मिक मामलों और निकाह, तलाक और खुला के मामलों में अपने फैसले देते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन में एक लाख शादियां नागरिक अधिकारियों के पास पंजीकृत नहीं हैं। माना जाता है कि ये शादिया शरिया अदालतों में हुई हैं। 
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नेशनल सेक्युलर सोसाइटी नामक एक संगठन ने ब्रिटेन में सामान्य न्याय व्यवस्था के साथ ही एक गैर औपचारिक न्याय व्यवस्था के काम करने पर चिंता जाहिर की और कहा है कि इसका भविष्य में गंभीर असर पड़ेगा। सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी स्टीफन इवांस ने चेतावनी देते हुए कहा है कि शरिया अदालतें सभी के लिए एक कानून के सिद्धांत को कमजोर करती हैं और महिलाओं, बच्चों के अधिकारों पर विपरीत असर डालती हैं। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में हाल के वर्षों में तेजी से मुस्लिम जनसंख्या बढ़ी है। 
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