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Bangladesh: ब्लॉगर की हत्या के मामले में मौत की सजा पाए आतंकी कोर्ट से फरार, पुलिसकर्मियों पर केमिकल फेंका

Sun, 20 Nov 2022 07:48 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 20 Nov 2022 07:48 PM IST
सार

गृहमंत्री असदुज्जमां खान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि दोषियों को पकड़ने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया है और यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है कि घटना कैसे हुई। 

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two death row convicts in Bangladeshi American blogger murder case flee dramatically from court premises
Avijit Roy - फोटो : Rafida Ahmed Bonya

विस्तार

बांग्लादेशी-अमेरिकी धर्म निरपेक्ष ब्लॉगर व लेखक अविजीत रॉय और उनके प्रकाशक की साल 2015 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले के दो दोषी आतंकवादी रविवार को अज्ञात बाइकर्स की मदद से भीड़भाड़ वाली अदालत के परिसर से फरार होने में कामयाब हो गए। इसके लिए उन्होंने पुलिस पर कुछ केमिकल छिड़का और धुएं के बीच फिर भगदड़ मचाई। 

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इस घटना के कुछ घंटों के बाद गृहमंत्री असदुज्जमां खान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि दोषियों को पकड़ने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया है और यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है कि घटना कैसे हुई। 
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पुलिस के एक प्रवक्ता ने घटनास्थल पर पत्रकारों को बताया, हमने उन्हें और उनके सहयोगियों को फिर से पकड़ने के लिए बड़े पैमान पर सर्च अभियान शुरू किया है। उन्होंने बताया कि मोइनुल हसन शमीम उर्फ समीर और अबू सिद्दीक सोहेल दोनों प्रतिबंधित आतंकवादी समूह अंसारुल्ला बांग्ला टीम (एबीटी) के सदस्य थे। उन्हें एक अलग मामले में अभियोग की सुनवाई के लिए अदालत लाया गया था। उन्हें जेल में कक्ष में ले जाया रहा था। लेकिन कुछ अज्ञात बाइक सवार लोगों ने उन्हें भगा दिया। 
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पुलिस ने कहा, एबीटी के दोनों गुर्गो को पिछले साल बांग्लादेश में जन्मे अमेरिकी धर्म निरपेक्ष ब्लॉगर अविजित रॉय (42 वर्षीय) और उनके प्रकाशक फैसल अरेफिन दीपन की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। 

चश्मदीदों ने कहा कि केमिकल स्प्र ने दो पुलिसकर्मियों को कुछ देर के लिए अंधा कर दिया। उन्होंने बताया कि हाई-प्रोफाइल हत्या के मामलों में दोषियों के साथ किसी सामान्य कैदी की तरह व्यवहार किया जा रहा था। अदालत के एक अधिकारी ने कहा, कैदियों को सिर्फ हथकड़ी लगाई गई थी। उनके पैरों में बेड़ी नहीं थी। खतरनाक अपराधियों या उग्रवादियों के लिए यह सामान्य सुरक्षात्मक उपाय था। 

टीवी चैनलों पर प्रसारित सीसीटीवी फुटेज में दो बाइक सवार हेलमेट पहले दोनों आतंकियों को ढाका मेट्रोपॉलिटन जज कोर्ट परिसर के सामने एक संकरी सड़क से ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। जबकि एक सादे कपड़े में व्यक्ति उनका पीछा कर रहा है। 

धार्मिक कट्टरवाद के मुखर आलोचक रहे अविजित रॉय की 26, 2015 को उस वक्त एबीटी के आतंकियों  ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी, जब वे ढाका विश्वविद्यालय में आयोजित एक पुस्तक मेले से वापस आ रहे थे। हमले में उनकी पत्नी रफीदा अहमद भी घायल हो गई थीं। आतंकी समूह ने उसी साल नवंबर में ढाका के शाहबाग इलाके में उनके प्रकाशक दीपक की भी उनके कार्यालय में हत्या कर दी थी। 

ढाका की आंतक रोधी विशेष अदालत ने रॉय की हत्या के मामले में पांच आतंकवादियों को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं, दीपन की हत्या के सिलसिले में आठ लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी। 


बांग्लादेश में साल 2015 में चार नास्तिक ब्लॉगर्स की हत्या कर दी गई थी। तब अधिकारियों ने इन हमलों के लिए घरेलू आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया था। जबकि इस्लामिक स्टेट ने उस समय तीन हमलों की जिम्मेदारी ली थी। 2016 में एक कैफे पर आतंकियों ने हमला किया था, इसमें 17 विदेशियों समेत 22 लोग मारे गए थे। इस मामले में अदालत ने सात दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। 

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