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खुद की अध्ययन रिपोर्ट में खुलासा: अनजाने में ही ट्विटर की हो गई है दक्षिणपंथियों से दोस्ती

Sat, 23 Oct 2021 05:22 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 23 Oct 2021 05:22 PM IST
सार

ट्विटर ने कहा है कि वह इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका कि आखिर ऐसा क्यों होता है। लेकिन इससे उसने यह सबक जरूर लिया है कि उसके एल्गोरिथम में बदलाव करने की जरूरत है। ट्विटर के अधिकारियों ने कहा है कि इस अध्ययन से एक समस्या सामने आई है। अभी इस बारे में और अध्ययन करने की जरूरत है...

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Twitter admitted that it circulates tweets from right-wing politicians and media houses with speed and coverage
ट्विटर के संस्थापक जैक डोर्सी। - फोटो : Social Media

विस्तार

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने अब यह मंजूर किया है कि वह दक्षिणपंथी राजनेताओं और मीडिया घरानों के ट्वीट को ज्यादा तेजी और व्यापकता के साथ प्रसारित करता है। जानकारों का कहना है कि इससे सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका पर जारी विवाद और गंभीर रूप ले सकता है। ट्विटर ने ये बात खुद अपनी एक अध्ययन रिपोर्ट में मानी है।

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खास मीडिया घरानों को महत्व

ट्विटर ने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और जापान में निर्वाचित पदाधिकारियों के ट्विट्स का अध्ययन किया। ये सातों विकसित देश हैं। इस अध्ययन में इस बात पर भी गौर किया गया कि क्या ट्विटर पर कुछ खास मीडिया घरानों की खबरें ज्यादा महत्त्व पाती हैं। अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज, अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स और वेबसाइट बजफीड की खबरों को इस अध्ययन में शामिल किया गया।

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ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययन के दौरान ट्विटर के होम टाइमलाइन पर गौर किया गया। किसी व्यक्ति के होम टाइमलाइन पर कौन से ट्विट दिखेंगे, यह ट्विटर का एल्गोरिथम तय करता है। ट्विट किस क्रम से दिखेंगे, यह भी ट्विटर के एल्गोरिथम से तय होता है। अध्ययन का निष्कर्ष रहा कि सात में से छह देशों में दक्षिणपंथी राजनेताओं के ट्विट को वामपंथी नेताओं के ट्विट्स की तुलना में ट्विटर के एल्गोरिद्म ने ज्यादा अहमियत दी। अपवाद सिर्फ जर्मनी रहा। मीडिया के बारे में भी ऐसा नतीजा निकला।

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दक्षिणपंथी विचारों वाले ट्वीट्स को अहमियत

ट्विटर के इस अध्ययन की रिपोर्ट 27 पेज के एक दस्तावेज में कहा गया है कि दक्षिणपंथी विचारों वाले ट्वीट्स को संख्यात्मक रूप से ज्यादा अहमियत मिलने की बात साबित हुई है। ये बात सामने आई कि ब्रिटेन में लेबर पार्टी और कंजरवेटिव पार्टी के नेताओं के ट्वीट्स के प्रसार दायरे बीच भारी फर्क रहा। ऐसा ही फर्क कनाडा में लिबरल और कंजरवेटिव पार्टी के नेताओं के ट्वीट्स के बीच दिखा।


ट्विटर ने कहा है कि वह इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका कि आखिर ऐसा क्यों होता है। लेकिन इससे उसने यह सबक जरूर लिया है कि उसके एल्गोरिथम में बदलाव करने की जरूरत है। ट्विटर के अधिकारियों ने कहा है कि इस अध्ययन से एक समस्या सामने आई है। अभी इस बारे में और अध्ययन करने की जरूरत है।

ट्विटर के सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग विभाग के निदेशक रूमन चौधरी और उसकी शोधकर्ता लुका बेली ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि अगर एल्गोरिथम किसी खास पक्ष को ज्यादा अहमियत देते हैं, तो यह एक समस्या है। अब इस समस्या की जड़ तक पहुंचने की जरूरत है, ताकि जरूरी सुधार किए जा सकेँ।

संसदीय दबाव को टालने की कोशिश

ट्विटर ने कहा है कि वह अपनी अध्ययन रिपोर्ट को बाहरी विशेषज्ञों को भी उपलब्ध कराएगा। विश्लेषकों का कहना है कि ट्विटर ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट जारी कर सोशल मीडिया साइटों पर अमेरिका में बढ़ रहे संसदीय दबाव को टालने की कोशिश की है। लेकिन उसकी इस कोशिश से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दबाव और बढ़ेगा। इन दोनों को फेसबुक कंपनी की व्हिसलब्लोअर फ्रांसिस हॉगेन ने हाल में कठघरे में खड़ा किया है। हॉगेन ने अमेरिकी संसद की एक समिति के सामने गवाही दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि फेसबुक कंपनी के इन दोनों माध्यमों पर धुर दक्षिणपंथी और नफरत फैलाने वाली सामग्रियों को ज्यादा अहमियत मिलती है।

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