टर्की: गहराते आर्थिक संकट के बीच कामयाब होगा आर्दोआन का ‘उग्र राष्ट्रवादी’ दांव?
एर्दोआन की लोकप्रियता देश में बढ़ रहे आर्थिक संकट के कारण गिरी है। इस समय वहां महंगाई दर 20 फीसदी है। टर्की की मुद्रा लीरा के भाव में लगातार गिरावट आ रही है। लीरा के भाव गिरने के कारण आयात महंगे हो गए हैं। साथ ही उन टर्कीवासियों को बड़ी दिक्कत पेश आ रही है, जिन्होंने अमेरिकी डॉलर में कर्ज ले रखे हैं...
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दस पश्चिमी राजदूतों को देश से निकालने की धमकी देने के बाद से टर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने अब नरम रुख अपना लिया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि उन दस देशों के राजदूतों को सचमुच देश से निकाले जाने की संभावना अब नहीं है। जिन देशों के राजदूतों को निकलने की धमकी एर्दोआन ने दी है, उनमें अमेरिकी राजदूत भी हैं।
दूतावासों ने अपने रुख में सुधार किया
लेकिन इस हफ्ते अपनी कैबिनेट की बैठक के बाद एर्दोआन ने मेलमिलाप का तेवर अपना लिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि उन दूतावासों ने टर्की के खिलाफ अपने रुख में सुधार किया है। एर्दोआन ने कहा- ‘हमें आशा है कि भविष्य में ये राजदूत टर्की के संप्रभु अधिकारों के बारे में बोलते समय अधिक सावधान रहेंगे।’ इसके पहले अमेरिकी दूतावास ने एक ट्विट में राजनयिक संबंधों के मामले में वियना संधि की धारा 41 के प्रति वचनबद्धता दोहराई थी। इस धारा के तहत किसी देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप की मनाही है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस ट्विट को आधार पर एर्दोआन समर्थकों ने देश में ये प्रचार अभियान छेड़ दिया है कि पश्चिमी देशों ने टर्की के सामने समर्पण कर दिया है। ये विवाद एक व्यापारी उस्मान कवाला को लेकर उठा था, जिन्हें बिना मुकदमा चलाए चार साल से जेल में रखा गया है। दस देशों के दूतावासों ने एक बयान उनकी रिहाई की मांग की थी। उसके बाद एर्दोआन ने उन राजदूतों को निकालने की धमकी दी।
जानकारों के बीच ये कयास लगाए जा रहे हैं कि एर्दोआन ने अब अपना तेवर नरम क्यों कर लिया है। जर्मनी की हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी में टर्की की राजनीति के विशेषज्ञ शैर्लोट जोपियन ने जर्मनी की वेबसाइट डीब्लू.कॉम से कहा कि एर्दोआन अपनी घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश में हैं। इन समस्याओं के कारण उनकी लोकप्रियता गिर रही है। जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक एर्दोआन की एकेपी पार्टी की लोकप्रियता गिर कर अब सिर्फ 30 फीसदी रह गई है। जबकि विपक्षी दलों- सीएचपी और आईवाईआई की साझा लोकप्रियता 40 फीसदी पर है।
महंगाई के कारण गिरी एर्दोआन की लोकप्रियता
एर्दोआन की लोकप्रियता देश में बढ़ रहे आर्थिक संकट के कारण गिरी है। इस समय वहां महंगाई दर 20 फीसदी है। टर्की की मुद्रा लीरा के भाव में लगातार गिरावट आ रही है। लीरा के भाव गिरने के कारण आयात महंगे हो गए हैं। साथ ही उन टर्कीवासियों को बड़ी दिक्कत पेश आ रही है, जिन्होंने अमेरिकी डॉलर में कर्ज ले रखे हैं। साथ ही देश में भ्रष्टाचार की शिकायत भी आम है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक बढ़े रहे आर्थिक संकट के बीच विपक्ष के खिलाफ एर्दोआन के वे तरीके अब कारगर नहीं हो रहे हैं, जिनके जरिए उन्होंने विपक्षी दलों को दो दशक से हाशिये पर रखा था। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि इन हालात के बीच एर्दोआन ने कवाला के मुद्दे पर दस दूतावासों के बयान को उछाला। उन्होंने संप्रभुता का कार्ड खेला। इसके आधार पर उन्होंने ध्रुवीकरण बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन उनकी ये तमाम दांव फेल हो गए हैं। इसलिए अब उन्होंने मेलमिलाप का रुख अपना लिया है।
लेकिन कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि एर्दोआन आगे भी पश्चिमी देशों के खिलाफ देश में माहौल गरमाने की कोशिश कर सकते हैं। गौरतलब है कि टर्की अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) का सदस्य है। लेकिन एर्दोआन के शासनकाल में अमेरिका से टर्की की दूरी बढ़ती चली गई है।