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तुर्की का दोहरा रवैया: कश्मीर पर भारत को भाषण, पर तालिबान का मानवाधिकार उल्लंघन नजरअंदाज, मदद को तैयार
Fri, 24 Sep 2021 05:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 24 Sep 2021 05:06 PM IST
सार
बताया गया है कि इस्लामिक कट्टरपंथी देशों की मदद की इसी पहल के तहत तुर्की ने अब तालिबान की मदद करने का फैसला किया है। अर्दोआन ने न्यूयॉर्क में यूएन महासभा की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में इस ओर संकेत दिए।
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तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन तालिबान की मदद के लिए तैयार हैं।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान का साथ देते हुए कश्मीर राग अलापने वाले तुर्की ने अफगानिस्तान में मानवाधिकार के उल्लंघनों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन के हालिया बयानों से यह बात काफी स्पष्ट है। दरअसल, तुर्की ने अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार स्थापित करने में दिलचस्पी दिखाई है और कहा है कि वह इस कट्टरपंथी संगठन की हर तरह से मदद करना चाहता है।
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इस्लामिक देशों के हितैषी की छवि बना रहा तुर्की
बता दें कि एक समय धर्मनिरपेक्ष देश के तौर पर पहचान बनाने वाला तुर्की राष्ट्रपति अर्दोआन के शासन में इस्लामिक देशों के सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है। इसी के चलते बीते सालों में तुर्की के पाकिस्तान जैसे देशों से करीबी रिश्ते स्थापित हुए हैं। यूएन में भी तुर्की लगातार भारत विरोधी रुख अपनाते हुए कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाता रहा है।
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यूएन महासभा के बाद पत्रकारों से बातचीत में तालिबान पर चर्चा
बताया गया है कि इस्लामिक कट्टरपंथी देशों की मदद की इसी पहल के तहत तुर्की ने अब तालिबान की मदद करने का फैसला किया है। अर्दोआन ने न्यूयॉर्क में यूएन महासभा की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, "तालिबान के मौजूदा रवैये को देखते हुए साफ है कि अफगानिस्तान में सरकार के लिए समावेशी नेतृत्व नहीं तैयार हुआ। फिलहाल हमें बदलाव के सिर्फ कुछ संकेत मिले हैं। हो सकता है नेतृत्व में कुछ समावेशी वातावरण पैदा हो। हमें अभी तक यह नहीं दिखा। लेकिन अगर ऐसे कदम उठाए जाते हैं, तो हम साथ काम करने पर चर्चा कर सकते हैं।"
अफगानिस्तान में तालिबान के विदेश मंत्री से मिले तुर्की के राजदूत
अर्दोआन का यह बयान अफगानिस्तान में तुर्की के राजदूत सिहाद अर्गिनाए और तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की मुलाकात के बाद आया। इसमें अर्गनाए ने कहा कि तुर्की लगातार अफगान लोगों का समर्थन और अपने ऐतिहासिक संबंध स्थापित करना जारी रखेगा। बता दें कि पाकिस्तान पहले ही अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता दिलाने के लिए पैरवी कर चुका है।
यूएन पर कश्मीर मुद्दा उठाते रहे हैं अर्दोआन, भारत दे चुका है चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने इस साल अपने संबोधन में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। पिछले साल भी उन्होंने सामान्य चर्चा के लिए अपने रिकॉर्डेड वीडियो बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया था। इसके अलावा पिछले साल पाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी उन्होंने कश्मीर राग छेड़ा था। भारत ने उस वक्त इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया था और कहा था कि तुर्की को अन्य राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और अपनी नीतियों पर गहराई से विचार करना चाहिए।