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Trump: ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी; कहा- संघर्षविराम बढ़ाने की संभावनाएं कम, समझौता नहीं हुआ तो बरसेंगे बम

Mon, 20 Apr 2026 11:03 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 20 Apr 2026 11:03 PM IST
सार

Donald Trump On Iran Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ जारी दो सप्ताह का संघर्षविराम बुधवार शाम को समाप्त हो जाएगा और इसे आगे बढ़ाने की संभावना न के बराबर है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि समय रहते कोई डील नहीं हुई, तो ईरान पर बमों की बारिश होगी।

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Trump Issues Open Warning to Iran Says Prospects for Extending Ceasefire unlikely No Agreement Bombs Rain Down
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दुनिया भर की नजरें इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम की समय सीमा को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। इससे युद्ध की आशंका फिर से गहरा गई है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर कमजोर समझौता नहीं करेंगे। इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच ट्रंप की 'गले लगाने वाली कूटनीति' कहीं नजर नहीं आ रही है, बल्कि उसकी जगह अब बमों की बरसात वाली चेतावनी ने ले ली है। राष्ट्रपति के इस तेवर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि बुधवार की शाम वाशिंगटन के समय के अनुसार यह शांति की आखिरी समय सीमा हो सकती है।
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क्या बुधवार के बाद थम जाएगा शांति का रास्ता?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक साक्षात्कार के दौरान घोषणा की कि ईरान के साथ चल रहा दो सप्ताह का संघर्षविराम बुधवार शाम को समाप्त हो जाएगा। उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस बात की अत्यधिक संभावना नहीं है कि वह इस समय सीमा को आगे बढ़ाएंगे। ट्रंप ने ब्लूमबर्ग को दिए फोन इंटरव्यू में बताया कि यह संघर्षविराम सात अप्रैल की शाम को शुरू हुआ था और इसकी मियाद अब खत्म होने वाली है। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वह ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं और बिना किसी ठोस नतीजे के इस अस्थायी शांति को जारी रखने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं।
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ट्रंप ने समझौते की जल्दबाजी को लेकर क्या कहा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत के दौरान साफ किया कि वह किसी भी खराब समझौते के लिए जल्दबाजी नहीं दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि मुझ पर किसी समझौते के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। हमारे पास दुनिया भर का समय है। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को ईरान की शर्तों पर झुकने की कोई जरूरत नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या समझौता न होने पर क्या युद्ध फिर से शुरू हो जाएगा, तो उन्होंने स्पष्ट उत्तर दिया कि अगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है, तो वह निश्चित रूप से संघर्ष के फिर से शुरू होने की उम्मीद कर रहे हैं। उनके इस रुख ने शांति वार्ता की मेज पर बैठे राजनयिकों के लिए चुनौती और बढ़ा दी है।
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ये भी पढ़ें- 'जंग के लिए इस्राइल ने नहीं उकसाया': तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान से बातचीत को लेकर बड़े संकेत भी दिए

ढेर सारे बम फटेंगे वाली चेतावनी का क्या मतलब?
एक तरफ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के अगले दौर की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर है। पीबीएस न्यूज के मुताबिक, एक फोन कॉल के दौरान ट्रंप ने बेहद खतरनाक चेतावनी देते हुए कहा, "अगर मंगलवार या बुधवार तक समझौता नहीं हुआ और संघर्षविराम खत्म हुआ, तो फिर ढेर सारे बम फटने शुरू हो जाएंगे।" उनका यह बयान ईरान के लिए एक सीधा अल्टीमेटम माना जा रहा है। ट्रंप यह संकेत दे रहे हैं कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो अमेरिका सैन्य शक्ति का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को अलर्ट मोड पर ला दिया है।


संघर्षविराम विस्तार पर ट्रंप का रुख क्या?
पिछले कुछ समय से संघर्षविराम को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। पिछले हफ्ते पत्रकारों के साथ एक सवाल-जवाब सत्र के दौरान, उनसे पांच बार यह पूछा गया था कि क्या वह संघर्षविराम को आगे बढ़ाएंगे। उस समय उन्होंने तीन अलग-अलग तरह के जवाब दिए थे, जिससे उनकी मंशा को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि, अब उन्होंने "अत्यधिक संभावना नहीं" कहकर अपनी स्थिति को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है। यह अस्थिरता दर्शाती है कि ट्रंप ईरान से अपनी मनमुताबिक शर्तें मनवाने के लिए कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह के दबाव का इस्तेमाल कर रहे हैं।

तनाव का फलस्तीन और इस्राइल पर क्या असर?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता यह तनाव केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व के समीकरणों में इस्राइल और फलस्तीन के मुद्दे भी इससे गहराई से जुड़े हुए हैं। अगर ट्रंप के कहे अनुसार बमबारी शुरू होती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ेगा। ट्रंप की यह हार्डलाइन रणनीति यरूशलम से लेकर तेहरान तक हलचल पैदा कर रही है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह सख्त संदेश यह भी बताता है कि वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु या क्षेत्रीय मुद्दों पर ढील देने के मूड में नहीं हैं। अब सबकी निगाहें बुधवार शाम पर टिकी हैं कि क्या बातचीत से कोई रास्ता निकलेगा या फिर हथियार अपनी भाषा बोलेंगे।


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