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Trump Funding Freeze: चीफ जस्टिस बोले- ट्रंप की फंडिंग पर रोक बरकरार, 5 बिलियन USD की विदेशी सहायता पर खतरा...
Wed, 10 Sep 2025 01:57 AM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:57 AM IST
सार
अमेरिका के 17वें चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप की फंडिंग पर रोक को बरकरार रखने का फैसला लिया है। इस फैसले से करीब पांच बिलियन अमेरिकी ़डॉलर की विदेशी सहायता खतरे में है। जानिए क्या है पूरा मामला
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिका में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने ट्रंप प्रशासन के करीब पांच अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी सहायता रोकने के फैसले को अस्थायी रूप से बरकरार रखा है। जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अमेरिकी कांग्रेस से अनुमोदित अरबों डॉलर की सहायता से संबंधित मामले में ट्रंप प्रशासन की ओर से दायर आपातकालीन अपील पर यह फैसला लिया। खबरों के मुताबिक रॉबर्ट्स का यह आदेश संकेत देता है कि सुप्रीम कोर्ट निचली अदालत के फैसले को पलट सकता है।
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लगभग 50 साल पहले हुआ था अंतिम इस्तेमाल, ट्रंप ने कहा था- फंड खर्च नहीं करेंगे
दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने कहा था कि वह इस धनराशि को खर्च नहीं करेंगे। उन्होंने विवादित अधिकार का हवाला दिया था, जिसका इस्तेमाल आखिरी बार लगभग 50 साल पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने किया था। अमेरिका के कानून में इसे 'पॉकेट रिसीशन' नाम दिया गया है। इसके तहत बजट वर्ष के अंत में राष्ट्रपति कांग्रेस को खर्च न करने का अनुरोध भेजते हैं, इससे 45 दिनों की समय सीमा में कार्रवाई संभव नहीं होती और फंड खर्च नहीं हो पाता। बता दें कि यह मामला यूएस कांग्रेस द्वारा स्वीकृत अरबों डॉलर की विदेशी सहायता से जुड़ा है, जिसे खर्च करने से राष्ट्रपति ट्रंप इनकार कर रहे हैं।
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ट्रंप ने अपने पत्र में कहा- फंड खर्च नहीं करेगी सरकार
बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बीते 28 अगस्त को प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष माइक जॉनसन को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि वे 4.9 अरब डॉलर की विदेशी सहायता खर्च नहीं करेंगे। ट्रंप का कहना है कि उनके फैसले के बाद उन्हें किसी विधायी या संसदीय मंजूरी की जरूरत नहीं।
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धनराशि रोकने के फैसले को मंजूरी अमेरिकी कांग्रेस को देनी होगी
मंगलवार (अमेरिकी समय) को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स की टिप्पणी से पहले कोलंबिया में डिस्ट्रिक्ट जज आमिर अली ने पिछले सप्ताह निर्णय दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप का फैसला अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी के बिना अवैध है और कार्यपालिका को स्वीकृत धन रोकने का अधिकार नहीं है।
फंड को खर्च करने का यह मामला बेहद जटिल
इस मामले की कानूनी पेचीदगियों का एक पहलू ये भी है कि अगस्त में ही अमेरिका की एक अन्य अदालत- डीसी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने कोलंबिया के जिला जज आमिर अली के आदेश को निरस्त कर दिया था। अपीलीय कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को कहा था कि उन्हें करीब 5 अरब डॉलर के फंड को खर्च करना ही होगा। इस कोर्ट में मुकदमा खारिज नहीं होने से ट्रंप प्रशासन को पॉकेट रिसीशन नोटिस पर एक बार फिर कोलंबिया में आमिर अली की अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस पर जज अली ने स्वीकार किया कि उनका फैसला अंतिम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह मामला कार्यपालिका की शक्तियों की कानूनी और व्यावहारिक सीमाओं पर गहरे सवाल खड़ा करता है।
6.5 बिलियन डॉलर का फंड 30 सितंबर से पहले खर्च कर लेगी सरकार
इससे पहले पिछले महीने ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सहायता रोकने के दायरे में 6.5 अरब डॉलर का एक अन्य फंड भी है। सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया था कि इस राशि को इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले यानी 30 सितंबर तक खर्च कर लिया जाएगा।
फंड खर्च नहीं करने पर क्या असर पड़ेगा
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति 28 अगस्त के पत्र से पहले भी विदेशी सहायता में कटौती को अपनी प्रमुख नीति बता चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के सरकारी खातों को हो रहे घाटे पर इन कटौतियों का प्रभाव सीमित है। हालांकि, जब अमेरिका विदेशी मदद के फंड को रोकता है तो इससे देश की वैश्विक साख और विकासशील देशों में खाद्य व विकास कार्यक्रमों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अधिकारों पर साफ होगी तस्वीर
माना जा रहा है कि देश की सबसे बड़ी अदालत राष्ट्रपति और अमेरिकी कांग्रेस को मिले वित्तीय अधिकार पर जल्द ही अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स के अंतिम फैसले से दोनों के अधिकारों की परिभाषा और स्पष्ट हो होगी।