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चीन को अमेरिकी हथियार बेचने की बात पर पलटे ट्रंप: अमेरिकी राजदूत के दावे से क्यों बढ़ा विवाद? जानें पूरा मामला

Tue, 29 Sep 2026 05:08 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 29 Sep 2026 05:08 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अमेरिकी हथियार खरीदने की बात करने से इनकार किया है। यह दावा अमेरिका के चीन में राजदूत डेविड पर्ड्यू ने किया था। ट्रंप ने इसे चीन के बजाय ताइवान से जुड़ा मामला बताया। लेकिन फिर उन्होंने कहा कि चीन अमेरिकी हथियार खरीदना चाहे तो यह अच्छा विचार हो सकता है। राजदूत और ट्रंप के बयानों में इतना बड़ा अंतर क्यों है? आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

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Trump Denies Asking Xi Jinping to Buy US Weapons: What Did the US Ambassador Claim?
अमेरिका-चीन संबंधों में नया मोड़ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अमेरिकी हथियार खरीदने के बारे में बात करने के अपने ही राजदूत के दावे से इनकार किया है। अमेरिका के चीन में राजदूत डेविड पर्ड्यू ने दावा किया था कि ट्रंप ने किसी समय शी से पूछा था कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा। इसके बाद ट्रंप ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चीन अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदना चाहे तो यह अच्छा विचार हो सकता है।

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आखिर ट्रंप ने क्या कहा?

  • रिपोर्टर ने जब ट्रंप से पर्ड्यू के बयान के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले कहा कि क्या राजदूत का मतलब चीन के बजाय ताइवान से था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ऐसी बात पहले नहीं सुनी और वह पर्ड्यू से इस बारे में पूछेंगे। 
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  • इसके बाद ट्रंप ने कहा कि चीन शायद अमेरिकी उपकरण खरीदना चाहेगा, क्योंकि उनके अनुसार अमेरिका बेहतर सैन्य उपकरण बनाता है।
  • हालांकि, इसके बाद उन्होंने साफ कहा कि चीन को हथियार बेचने की बात पर उनकी शी जिनपिंग से चर्चा नहीं हुई। यानी राजदूत के दावे और ट्रंप के बयान में सीधा अंतर सामने आया।
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क्या चीन को अमेरिकी हथियार बेचने की कोई योजना है?
अमेरिकी विदेश विभाग ने भी ट्रंप प्रशासन को इस मामले से अलग करते हुए कहा कि चीन को हथियार बेचने की कोई पेशकश या योजना नहीं है। विभाग ने कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है। 

यही वजह है कि अगर ट्रंप और शी के बीच वास्तव में ऐसी पेशकश हुई होती, तो यह अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही चीन और ताइवान नीति में बड़ा बदलाव माना जाता। अमेरिका और चीन के बीच सैन्य तकनीक को लेकर पहले से ही काफी तनाव है।

फिर ताइवान का नाम क्यों आया?
पर्ड्यू का बयान असल में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री से जुड़े सवाल के जवाब में आया था। उन्होंने कहा कि ट्रंप ताइवान को हथियार बेचने के मामले में मजबूत रुख रखते हैं और दोनों देशों के बीच भविष्य में हथियारों की बिक्री पर भी बातचीत होती रहती है। ताइवान खुद को लोकतांत्रिक तरीके से चलाता है, जबकि चीन उस पर अपना दावा करता है और अमेरिका ताइवान की रक्षा क्षमता के लिए हथियार उपलब्ध कराता रहा है। चीन लंबे समय से अमेरिका से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है।


चीन के साथ ट्रंप की नीति पर क्यों उठे सवाल?
इस पूरे मामले ने चीन के साथ ट्रंप प्रशासन की नीति को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं। मई में ट्रंप और शी की मुलाकात के बाद अमेरिका ने ताइवान के लिए करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज की बिक्री रोक दी थी। ट्रंप ने उस समय ताइवान को हथियार बेचने को चीन के साथ बातचीत में एक महत्वपूर्ण सौदेबाजी का साधन बताया था। पिछले सप्ताह वाशिंगटन में ट्रंप और शी की मुलाकात के दौरान भी ताइवान का मुद्दा सामने आया। चीन के विदेश मंत्रालय ने पर्ड्यू के दावे की पुष्टि नहीं की। चीन के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन अपनी जरूरत के अनुसार अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करता रहेगा और विश्व शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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