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US: ट्रंप ने माना नेतन्याहू को कहे थे अपशब्द, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- लेबनान में लगातार संघर्ष से था परेशान

Thu, 04 Jun 2026 02:15 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 04 Jun 2026 02:15 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर उनकी इइस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से तीखी बातचीत हुई थी। ट्रंप ने कहा कि वे लगातार जारी हमलों से परेशान थे और संघर्ष रोकने की सलाह दी थी।

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Trump Confirms Heated Call with Netanyahu Over Lebanon Strikes, Says He Was Perturbed by Military Operations
ट्रंप-नेतन्याहू। - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि लेबनान में इस्राइली सैन्य अभियानों को लेकर उनकी बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बेहद तीखी फोन वार्ता हुई थी। ट्रंप ने माना कि बातचीत के दौरान उन्होंने नेतन्याहू के प्रति कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह गुस्से में नहीं थे, बल्कि लगातार जारी सैन्य कार्रवाई से चिंतित और परेशान थे।

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लेबनान अभियान को लेकर बढ़ा था तनाव
न्यूयॉर्क पोस्ट के पॉडकास्ट इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने लेबनान में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर नेतन्याहू के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। इस पर उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसा हुआ था। ट्रंप ने कहा कि वह लेबनान में लगातार जारी लड़ाई और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर चिंतित थे। 
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हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके और नेतन्याहू के बीच संबंध अच्छे हैं और वे एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर चुके हैं। ट्रंप ने कहा "हमने साथ में काफी अच्छा काम किया है, ‘बीबी’ मेरा चहेता है।" वहीं दूसरी ओर, इस्राइली मीडिया ने इस तरह की किसी भी बहस या तीखी बातचीत की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
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ट्रंप-नेतन्याहू के बीच क्या बातचीत हुई थी?
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई बातचीत के दौरान तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। दावा किया गया है कि इस कॉल में ट्रंप ने कड़े और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने कथित रूप से 2019 के भ्रष्टाचार मामले का जिक्र करते हुए नेतन्याहू से कहा था कि उन्होंने उन्हें जेल जाने से बचाया है। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा "तुम पागल हो। अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूं। अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। इसी वजह से लोग इस्राइल से भी नाराज हैं।"

शांति प्रयासों पर पड़ रहा था असर
रिपोर्टों के मुताबिक, लेबनान में इस्राइली हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ कुछ वार्ताओं को रोक दिया था। तेहरान का कहना था कि जब तक क्षेत्र में हिंसा जारी रहेगी, तब तक व्यापक समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ती रहेंगी। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस्राइली प्रधानमंत्री से स्पष्ट तौर पर कहा था कि अब संघर्ष को रोकने का समय आ गया है।

नेतन्याहू ने नहीं बदला रुख
हालांकि फोन वार्ता के बाद ट्रंप ने दावा किया था कि इस्राइल अपनी कुछ प्रस्तावित सैन्य गतिविधियों को सीमित करेगा और बेरूत के आसपास बड़े स्तर की कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन हालात जल्द ही फिर तनावपूर्ण हो गए। इस्राइल की ओर से संकेत दिया गया कि यदि हिजबुल्ला की तरफ से हमले जारी रहे तो सैन्य कार्रवाई भी जारी रहेगी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच फिर से हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं।

ईरान और अमेरिका के बीच भी बढ़ा तनाव
पश्चिम एशिया में संकट केवल इस्राइल और लेबनान तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान ईरान और अमेरिका के बीच भी तनाव बढ़ता दिखाई दिया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कुछ सैन्य गतिविधियां तेज कीं, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के कुछ इलाकों में जवाबी सैन्य अभियान चलाने का दावा किया। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा करना था।


इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने उन दावों को भी खारिज किया कि उन्हें इस्राइल ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उनकी अपनी स्पष्ट नीति रही है और उनका मानना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा केवल इस्राइल की सुरक्षा से नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जुड़ा हुआ है।

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