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US: ट्रंप प्रशासन अब करेगा AI और चैटजीपीटी का इस्तेमाल, स्वास्थ्य मामलों के खातों की ऐसे होगी जांच

Fri, 22 May 2026 02:39 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 22 May 2026 02:39 AM IST
सार

अमेरिका में स्वास्थ्य योजनाओं में धोखाधड़ी रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनके प्रशासन ने घोषणा की है कि वह सभी 50 राज्यों की ऑडिट रिपोर्ट की जांच के लिए चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स का इस्तेमाल करेगा। इसका उद्देश्य सरकारी पैसे को बचाना है। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि एआई गलतियां कर सकता है। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...

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Trump administration AI healthcare fraud USA ChatGPT Medicaid audit US health department
ट्रंप प्रशासन का एआई वाला दांव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका में स्वास्थ्य योजनाओं में होने वाले घोटालों और धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया गया है। अमेरिका के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग ने गुरुवार को ऐलान किया है कि वे इस काम के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करेंगे। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनका प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि स्वास्थ्य के नाम पर दिए जा रहे संघीय (सरकारी) पैसे का बिल्कुल सही इस्तेमाल हो और कोई भी इसमें हेराफेरी न कर सके।
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इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना और सरकार के अरबों डॉलर बचाना है। नए कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे वित्तीय संसाधनों के सहायक सचिव गुस्ताव चियारेलो ने बताया कि उनका विभाग अब अमेरिका के सभी 50 राज्यों की ऑडिट रिपोर्ट का विश्लेषण करने के लिए 'चैटजीपीटी' और अन्य आधुनिक एआई टूल्स का लगातार उपयोग करेगा। चियारेलो ने कहा कि पहले हर कोई बस अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा कर देता था और वह फाइलों में दब जाती थी, कोई उस पर ध्यान नहीं देता था। लेकिन अब एआई की मदद से इन रिपोर्टों की बहुत गहराई से जांच की जाएगी।
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एआई तकनीक से सरकार को क्या बड़ा फायदा होगा?
इस नई पहल से सरकारी कामकाज में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है। मेडिकेड जैसे बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जांच अब चुटकियों में हो सकेगी। नियम के अनुसार, जिन राज्यों, स्थानीय सरकारों, गैर-लाभकारी संस्थाओं या उच्च शिक्षा संस्थानों को साल में 10 लाख डॉलर (एक मिलियन) से ज्यादा का सरकारी फंड मिलता है, उन्हें अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट देनी होती है। अब इन्हीं रिपोर्टों को एआई के जरिए पढ़ा और समझा जाएगा। अगर कोई राज्य सही रिपोर्ट नहीं देता है या अपने फंड में चल रही गड़बड़ी को ठीक नहीं करता है, तो सरकार उसका फंड रोक सकती है।
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क्या इस नई तकनीक में गलतियां होने का भी खतरा है?
भले ही एआई टूल्स बड़े दस्तावेजों में छिपी कमियों और पैटर्न को पकड़ने में बहुत माहिर होते हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि सरकार को इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना चाहिए। आलोचकों का मानना है कि एआई मशीनें कई बार बड़ी गलतियां भी करती हैं और इसके परिणाम गलत या पक्षपाती हो सकते हैं। इस पर जवाब देते हुए चियारेलो ने साफ किया कि उनके अधिकारी एआई के जरिए केवल सार्वजनिक रिपोर्टों का मूल्यांकन कर रहे हैं, न कि कोई नई गुप्त जानकारी खोज रहे हैं। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि सरकारी पैसे का बेहतर प्रबंधन हो सके।

आलोचकों ने ट्रंप प्रशासन पर क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?
प्रशासन के इस धोखाधड़ी विरोधी अभियान की काफी कड़ी आलोचना भी हो रही है। उपभोक्ता अधिकार समूह 'पब्लिक सिटीजन' के सह-अध्यक्ष रॉब वीसमैन ने प्रशासन की मंशा पर ही सवाल उठा दिए हैं। वीसमैन ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि प्रशासन असल में धोखाधड़ी को लेकर चिंतित है। उनका साफ कहना है कि सरकार इस तकनीक का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से नहीं करेगी। आलोचकों ने यह भी ध्यान दिलाया है कि प्रशासन के ज्यादातर 'एंटी-फ्रॉड' अभियानों का निशाना मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी वाले राज्य रहे हैं, जिससे यह कार्रवाई राजनीतिक साजिश जैसी लगती है।


तमाम आरोपों और विवादों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग अपने फैसले पर पूरी तरह से टिका हुआ है। विभाग ने इस नई एआई जांच पहल के बारे में सभी 50 राज्यों के गवर्नरों और कोषाध्यक्षों को पत्र भेजकर पहले ही अलर्ट कर दिया है। गुस्ताव चियारेलो ने बताया कि वह अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों के भी संपर्क में हैं और उन्हें उम्मीद है कि बाकी एजेंसियां भी जल्द ही इस एआई तकनीक को अपनाएंगी।
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