{"_id":"5c9d684cbdec22142773b6df","slug":"trash-is-created-in-space-from-the-missile-test","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एंटी सैटेलाइट परीक्षण पर चीन के बाद अमेरिका ने जताई चिंता, अंतरिक्ष में पैदा होता है कचरा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
एंटी सैटेलाइट परीक्षण पर चीन के बाद अमेरिका ने जताई चिंता, अंतरिक्ष में पैदा होता है कचरा
Fri, 29 Mar 2019 06:05 AM IST
Avdhesh Kumar
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 29 Mar 2019 06:05 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत के एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण पर चीन के बाद अमेरिका ने भी चिंता जाहिर की है। अमेरिका ने अंतरिक्ष में कचरा बढ़ने को लेकर भारत को आगाह किया है। बुधवार को भारत ने परीक्षण में अपने ही सैटेलाइट को मार गिराया था।
अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक ने कहा, ‘अमेरिका इस बात का अध्ययन कर रहा है, जिसमें भारत ने कहा है कि उसने अंतरिक्ष में कचरा नहीं छोड़ा है। हमारा मानना है कि हम सभी अंतरिक्ष में रहते हैं और इसमें कचरा नहीं फैलाना चाहिए। अंतरिक्ष एक ऐसी जगह होनी चाहिए जहां हम व्यापार कर सकें, जहां लोगों को काम करने की स्वतंत्रता हो। इस तरह के परीक्षण से अंतरिक्ष में कचरा बढ़ता है, जो नागरिक और सैन्य सैटेलाइट को नुकसान पहुंचा सकता है।’
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘भारत के साथ हमारी मजबूत सामरिक साझेदारी के तौर पर हम अंतरिक्ष और विज्ञान में साझा हितों के लिए काम करते रहेंगे। हालांकि, अमेरिकी सरकार के लिए अंतरिक्ष में मलबा एक बड़ी समस्या है। हमने भारत सरकार के उस बयान पर ध्यान दिया कि परीक्षण इस तरह किया गया था जिससे अंतरिक्ष में मलबा नहीं हो।’
विज्ञापन
भारत का कहना है कि उसने जानबूझकर ‘मिशन शक्ति’ का परीक्षण कम ऊंचाई पर किया, ताकि कचरा अंतरिक्ष में न रहे और पृथ्वी पर गिर जाए। कुछ विशेषज्ञों ने भारत के इस दावे पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि मलबे को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है और वो किस ओर जाएगा, यह कहना मुश्किल है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि अमेरिकी सेना भारत के इस परीक्षण से उत्पन्न मलबे के 250 टुकड़ों की निगरानी कर रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख जिम ब्रिडेंस्टाइन ने कांग्रेस से कहा, ‘कुछ लोग एंटी सैटेलाइट परीक्षण जानबूझकर करते हैं और अंतरिक्ष में कचरा फैलाते हैं। हम इस समस्या से पहले से ही जूझ रहे हैं।’
विज्ञापन
अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक ने कहा, ‘अमेरिका इस बात का अध्ययन कर रहा है, जिसमें भारत ने कहा है कि उसने अंतरिक्ष में कचरा नहीं छोड़ा है। हमारा मानना है कि हम सभी अंतरिक्ष में रहते हैं और इसमें कचरा नहीं फैलाना चाहिए। अंतरिक्ष एक ऐसी जगह होनी चाहिए जहां हम व्यापार कर सकें, जहां लोगों को काम करने की स्वतंत्रता हो। इस तरह के परीक्षण से अंतरिक्ष में कचरा बढ़ता है, जो नागरिक और सैन्य सैटेलाइट को नुकसान पहुंचा सकता है।’
विज्ञापन
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘भारत के साथ हमारी मजबूत सामरिक साझेदारी के तौर पर हम अंतरिक्ष और विज्ञान में साझा हितों के लिए काम करते रहेंगे। हालांकि, अमेरिकी सरकार के लिए अंतरिक्ष में मलबा एक बड़ी समस्या है। हमने भारत सरकार के उस बयान पर ध्यान दिया कि परीक्षण इस तरह किया गया था जिससे अंतरिक्ष में मलबा नहीं हो।’
विज्ञापन
भारत का कहना है कि उसने जानबूझकर ‘मिशन शक्ति’ का परीक्षण कम ऊंचाई पर किया, ताकि कचरा अंतरिक्ष में न रहे और पृथ्वी पर गिर जाए। कुछ विशेषज्ञों ने भारत के इस दावे पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि मलबे को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है और वो किस ओर जाएगा, यह कहना मुश्किल है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि अमेरिकी सेना भारत के इस परीक्षण से उत्पन्न मलबे के 250 टुकड़ों की निगरानी कर रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख जिम ब्रिडेंस्टाइन ने कांग्रेस से कहा, ‘कुछ लोग एंटी सैटेलाइट परीक्षण जानबूझकर करते हैं और अंतरिक्ष में कचरा फैलाते हैं। हम इस समस्या से पहले से ही जूझ रहे हैं।’
अंतरिक्ष सुरक्षा पर भारत को तय करना है लंबा सफर: अमेरिकी विशेषज्ञ
अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिक्ष सुरक्षा सुनिश्चित के लिए भारत को अभी लंबा सफर तय करना है। कार्नेजी इंडोवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो एशले टी टेलीस ने कहा, ‘चीन के 2007 के ‘ए-सैट’ मिसाइल परीक्षण के बाद से भारत ने भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष संपदा पर मुख्य तौर पर चीन के संभावित हमलों को रोकने के लिए अपने ‘ए-सैट’ परीक्षण का इरादा किया था।
यह लक्ष्य पूरा हो गया है, लेकिन जहां तक अंतरिक्ष सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात है, भारत को अब भी लंबा सफर तय करना है।’ मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर विपिन नारंग ने कहा, ‘इस परीक्षण से क्षेत्र में शक्ति संतुलन में कोई बदलाव आने की संभावना नहीं है।’ थिंक टैंक आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के डेरिल जी किम्बाल ने कहा, ‘यह खतरनाक और अस्थिर करने वाला कदम है। वैश्विक स्तर पर इस तरह के परीक्षण पर प्रतिबंध की जरूरत है।’
यह लक्ष्य पूरा हो गया है, लेकिन जहां तक अंतरिक्ष सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात है, भारत को अब भी लंबा सफर तय करना है।’ मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर विपिन नारंग ने कहा, ‘इस परीक्षण से क्षेत्र में शक्ति संतुलन में कोई बदलाव आने की संभावना नहीं है।’ थिंक टैंक आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के डेरिल जी किम्बाल ने कहा, ‘यह खतरनाक और अस्थिर करने वाला कदम है। वैश्विक स्तर पर इस तरह के परीक्षण पर प्रतिबंध की जरूरत है।’
आशा है हर देश अंतरिक्ष में शांति कायम रखेगा : चीन
चीन की सेना ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जताई कि विश्व के सभी देश अंतरिक्ष में शांति व स्थिरता कायम रखने के लिए वास्तविक कार्य कर सकते हैं। भारत का जिक्र किए बगैर चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने संबद्ध खबरें पढ़ी हैं। हमें उम्मीद है कि सभी देश अंतरिक्ष में शांति और स्थिरता कायम रखने के लिए काम करेंगे।’ वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘आशा है कि हर देश अंतरिक्ष में शांति और स्थिरता कायम रखेगा।’