फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   traffic jam in earth low orbit 14 thousand satellite debris pieces in millions danger for space activities

Earth: स्पेस में यातायात जाम! पृथ्वी की कक्षा में 14 हजार सैटेलाइट, अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए बनीं खतरा

Tue, 03 Dec 2024 10:09 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वॉशिंगटन Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 03 Dec 2024 10:09 AM IST
सार

रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में 14 हजार से ज्यादा विभिन्न उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा कर रहे हैं, जिनमें से करीब 3500 निष्क्रिय हैं। साथ ही पिछले प्रक्षेपणों और उपग्रहों के टकराव से पैदा हुए मलबे से हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।

विज्ञापन
traffic jam in earth low orbit 14 thousand satellite debris pieces in millions danger for space activities
पृथ्वी की निचली कक्षा में हजारों सैटेलाइट मौजूद - फोटो : यूरोपियन स्पेस एजेंसी

विस्तार

दुनियाभर के देशों में यातायात जाम एक बड़ी समस्या बन गया है, लेकिन अब अंतरिक्ष भी इस समस्या से अछूता नहीं रह गया है। दरअसल पृथ्वी की निचली कक्षा में हजारों की संख्या में विभिन्न देशों के उपग्रह चक्कर लगा रहे हैं, साथ ही करोड़ों की संख्या में उपग्रहों का मलबा लगातार घूम रहा है, जिससे अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए खतरा पैदा हो गया है। अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने हालात पर चिंता जाहिर की है और इस समस्या के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील की है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों की बढ़ती संख्या पर ध्यान न दिया गया तो यह अहम क्षेत्र अनुपयोगी हो सकता है। 
विज्ञापन


हजारों उपग्रहों और उपग्रहों के मलबे से अंतरिक्ष में यातायात जाम के हालात
रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में 14 हजार से ज्यादा विभिन्न उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा कर रहे हैं, जिनमें से करीब 3500 निष्क्रिय हैं। साथ ही पिछले प्रक्षेपणों और उपग्रहों के टकराव से पैदा हुए मलबे से हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों के मलबे के 12 करोड़ टुकड़े पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। अक्तूबर के अंत में संयुक्त राष्ट्र के अंतरिक्ष यातायात समन्वय पैनल ने एलईओ (लो अर्थ ऑर्बिट-पृथ्वी की निचली कक्षा) के का व्यापक डेटाबेस तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया है। 
विज्ञापन


उपग्रहों के संचालक देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की जरूरत
पैनल की सह-अध्यक्ष और बाहरी अंतरिक्ष मामलों की निदेशक आरती होला मैनी का कहना है कि अंतरिक्ष यातायात समन्वय पर तुरंत कार्रवाई करने की जरूरत है और इसमें समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। उपग्रहों के बीच टकराव से बचने के लिए ऑपरेटर देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की जरूरत है। गौरतलब है कि वैश्विक संचार, नेविगेशन सिस्टम और वैज्ञानिक रिसर्च के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा की सुरक्षा करना बेहद जरूरी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उपग्रहों के टकराव को रोकने के लिए एक केंद्रीकृत प्रणाली स्थापित करने की जरूरत बताई गई है। हालांकि इसमें चुनौती ये है कि कुछ देश को डेटा साझा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कई देश सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते डेटा साझा करने से हिचकिचा रहे हैं। पृथ्वी की परिक्रमा कर रहीं कई सैटेलाइट नागरिक के साथ ही सैन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लॉन्च की गई हैं और इस वजह से ही सैटेलाइट्स का डेटा साझा करने के लिए कई देश तैयार नहीं हैं। 


निजी कमर्शियल सैटेलाइट के लॉन्च ने बिगाड़े हालात
हाल के समय में कई उपग्रहों के टकराने से जोखिम बढ़ा है। अगस्त में एक चीनी रॉकेट में विस्फोट हो गया था, जिससे उसका मलबा पृथ्वी की कक्षा में बिखर गया। इसी तरह जून में भी रूस के एक निष्क्रिय सैटेलाइट में विस्फोट होने से उसका मलबा अंतरिक्ष में फैल गया और इसके चलते अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष यात्रियों की जान पर बन आई थी। अब जैसे जैसे वाणिज्यिक स्तर पर सैटेलाइट्स लॉन्च की जा रही हैं, उसने हालात को और बिगाड़ दिया है। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक हजारों उपग्रह लॉन्च कर रही है, जिससे अंतरिक्ष में टकराव की आशंका बढ़ी है। अनुमान के अनुसार, आने वाले वर्षों में कई हजार उपग्रह लॉन्च हो सकते हैं, जिससे उपग्रहों की टक्कर के चलते अरबों डॉलर के नुकसान की आशंका है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed