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Sri Lanka: टीएनए ने स्वनिर्णय अधिकार के साथ संघीय प्रणाली की मांग की तेज; 13A को लेकर विक्रमसिंघे का है यह रुख
Tue, 15 Aug 2023 04:07 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 15 Aug 2023 04:07 PM IST
सार
श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिल समुदाय 13वें संशोधन को लागू करने की मांग कर रहा है जिसमें उसे सत्ता का हस्तांतरण करने का प्रावधान है। 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद 13 वां संशोधन (13 ए) लाया गया था। इसने उत्तरी और पूर्वी प्रांतों के अस्थायी विलय के साथ नौ प्रांतों को स्थानांतरित इकाइयों के रूप में बनाया था।
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श्रीलंका का झंडा
- फोटो : Social Media
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विस्तार
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे देश के अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के साथ सुलह के प्रयासों के तहत 13वें संशोधन को लागू करने को लेकर काफी प्रयास कर रहे हैं। इस बीच, मुख्य तमिल राजनीतिक दल तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) ने आत्मनिर्णय अधिकारों के साथ एक संघीय प्रणाली की अपनी मांग फिर से तेज कर दी है। हालांकि टीएनए नेता आर सम्पंथन ने सोमवार को राष्ट्रपति को संबोधित एक पत्र में संघीय समाधान के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई।
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इस पत्र में यह भी कहा गया है कि अपने क्षेत्र में आत्मनिर्णय के अधिकार के साथ संघीय ढांचे के अनुरूप राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करने के लिए उत्तर और पूर्व में तमिल आबादी ने उन्हें वोट किया है। गौरतलब है कि ये तब सामने आया है जब बीते सप्ताह राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने संसद में एक विशेष संबोधन में सभी राजनीतिक दलों से पुलिस शक्तियों को छोड़कर 13ए के कार्यान्वयन में सहयोग करने का आग्रह किया था।
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श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिल समुदाय 13वें संशोधन को लागू करने की मांग कर रहा है जिसमें उसे सत्ता का हस्तांतरण करने का प्रावधान है। 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद 13 वां संशोधन (13 ए) लाया गया था। इसने उत्तरी और पूर्वी प्रांतों के अस्थायी विलय के साथ नौ प्रांतों को स्थानांतरित इकाइयों के रूप में बनाया।
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टीएनए ने विक्रमसिंघे से संविधान में प्रांतों को दी गई सभी शक्तियों को शीघ्रता से लागू करने और लंबे समय से विलंबित प्रांतीय परिषद चुनाव कराने का आग्रह किया। बता दें कि चुनाव सुधारों के कदम के बाद 2018 से नौ प्रांतों के चुनाव रुके हुए हैं। अब मौजूदा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चुनाव कराने के लिए संसदीय संशोधन की आवश्यकता है।
श्रीलंकाई तमिलों की चिंताओं पर दिया ध्यान
पिछले महीने राष्ट्रपति ने तमिल पार्टियों को आश्वासन दिया था कि विवादास्पद 13वां संशोधन प्रांतीय परिषदों में, पुलिस शक्तियों के बिना, पूरी तरह से लागू किया जाएगा। विक्रमसिंघे ने तमिलों के सामने आने वाली चिंताओं पर भी ध्यान दिया और उत्तरी क्षेत्र में हवाई और समुद्री कनेक्टिविटी में सुधार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तरी श्रीलंका में कांकेसंथुराई (केकेएस) हार्बर, वावुनिया और पलाली हवाई अड्डों को बढ़ाने और उत्तरी प्रांत और दक्षिणी भारत के बीच एक नौका सेवा स्थापित करने की योजना बना रही है।
वहीं, दूसरी ओर विक्रमसिंघे के कार्यों की कट्टरपंथी सिंहली बहुसंख्यक समूहों और प्रभावशाली बौद्ध पादरी सदस्यों ने आलोचना की है। कई प्रमुख लोगों ने राष्ट्रपति को चुनौती देते हुए कई बयान जारी किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनका दृष्टिकोण उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में एक अलग तमिल राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। बता दें कि 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से तमिल अपनी स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं।