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आतंकियों से याराना: तालिबान से और गहरी ‘दोस्ती’ करने में जुटा है पाकिस्तान

Sat, 27 Nov 2021 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 27 Nov 2021 06:32 PM IST
सार

टीटीपी ने अब दो शर्तों छोड़ दी हैं। उसने संघीय शासित कबीलाई इलाकों (फाटा) के खैबर पख्तूनवा प्रांत में विलय को खत्म करने की मांग की थी। लेकिन अब उसने ये मांग छोड़ दी है। वहीं अब किसी तीसरे देश में अपना दफ्तर खोलने की इजाजत देने की मांग से भी टीटीपी पीछे हट गया है...

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there is signs of progress in talks with Imran government and Tehreek-e-Taliban Pakistan
तालिबान (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) के साथ बातचीत में प्रगति के संकेत हैं। टीटीपी तालिबान की पाकिस्तानी शाखा है, जिसके साथ पाकिस्तान सरकार के साथ लड़ाई चल रही थी। लेकिन अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जे के बाद अफगान तालिबान ने टीटीपी और पाकिस्तान सरकार के बीच रिश्तों में सुधार के लिए मध्यस्थता की। इसी हफ्ते खबर आई थी कि पाकिस्तान सरकार ने ‘सद्भाव दिखाने के लिए’ टीटीपी के 100 दहशतगर्दों को रिहा कर दिया है। तभी पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर आई थी कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है।

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दो शर्तों से पीछे हटा टीटीपी

बातचीत के दौरान संबंध बेहतर बनाने के लिए टीटीपी ने चार शर्तें रखी थीं। अब ताजा खबर यह है कि उसमें से दो शर्तों उसने छोड़ दी हैं। उसने संघीय शासित कबीलाई इलाकों (फाटा) के खैबर पख्तूनवा प्रांत में विलय को खत्म करने की मांग की थी। लेकिन अब उसने ये मांग छोड़ दी है। उसकी एक और मांग यह थी कि टीटीपी को किसी तीसरे देश में अपना दफ्तर खोलने की इजाजत दी जाए। अब इस मांग से भी टीटीपी पीछे हट गया है।

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पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून को पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि इन दो मांगों पर पाकिस्तान सरकार ने सख्त रुख अपनाया। उसने इन्हें मानने से साफ इनकार कर दिया। इस बातचीत से जुड़े इस अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान सरकार के रुख को देखते हुए टीटीपी ने इन दो मांगों पर जोर ना डालने का फैसला किया है।
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खबर पख्तूनवा प्रांत में अभी स्थानीय चुनाव कराए जा रहे हैं। टीटीपी ने वहां चुनाव प्रक्रिया तुरंत रोकने की मांग की थी। उसका कहना था कि जब फाटा का दर्जा तय नहीं होता, उस क्षेत्र में चुनाव नहीं होने चाहिए। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने कहा कि फाटा का खैबर पख्तूनवा में विलय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ। इस पर देश के अरबों रुपये खर्च हुए हैं। इसलिए इस कदम को पलटने का अब कोई सवाल नहीं है। अधिकारी के मुताबिक टीटीपी ने सरकार की ये दलील मंजूर कर ली है।

इमरान सरकार ने रखी थी ये शर्त

एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक इमरान खान सरकार ने टीटीपी से कहा है कि अगर पाकिस्तान की प्रभुसत्ता स्वीकार कर ले और हथियार डालने पर राजी हो जाए, तो टीटीपी से जुड़े सभी दहशतगर्दों को माफी दे दी जाएगी। इनमें वे दहशतगर्द भी शामिल हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान में पनाह ले रखी है। ये बातचीत शुरू होने के पहले बीते नौ नवंबर को पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच एक महीने के युद्धविराम पर समझौता हो गया था।

इस बातचीत के लिए पहल अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने की। बताया जाता है कि इसमें प्रमुख भूमिका तालिबान शासन से जुड़े हक्कानी गुट की रही है। बताया जाता है कि अब तक दोनों पक्षों में तीन दौर की वार्ता हुई है। उनमें एक दौर काबुल में हुआ, जबकि बाकी दो दौर की बातचीत अफगानिस्तान के खोश्त में हुई।



इस बीच पाकिस्तान ने अमेरिका और तालिबान के बीच फिर से बातचीत शुरू होने का स्वागत किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस बारे में पाकिस्तान का रुख साफ है। वह चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान के साथ बातचीत में शामिल हो।

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