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बांग्लादेश: खालिदा जिया की सेहत को लेकर बढ़ रही है चिंता, डॉक्टरों ने दी विदेश ले जाने की सलाह
Thu, 23 Dec 2021 04:56 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 23 Dec 2021 04:56 PM IST
सार
बेगम जिया को जनता के एक बड़े वर्ग की हमदर्दी मिल रही है। ऐसे लोगों की राय है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री की जान दांव पर लगी हो, तो वर्तमान सरकार को अधिक उदारता दिखानी चाहिए।
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बेगम खालिदा जिया
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की सेहत को लेकर बांग्लादेश में चिंता बढ़ रही है। बीएनपी का दावा है कि बांग्लादेश में उपलब्ध सुविधाएं बेगम जिया के इलाज के लिए काफी नहीं हैं। डॉक्टरों ने उन्हें विदेश ले जाने की सलाह दी है। इस बीच कई मीडिया टिप्पणियों में भी ये सवाल पूछा गया है कि क्या प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार बेगम जिया के प्रति उदारता दिखाएगी?
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बेगम जिया को आपराधिक आरोप में सजा सुनाई जा चुकी है। इसलिए बिना सरकार की इजाजत के उन्हें विदेश ले जाना संभव नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि शेख हसीना सरकार ये इजाजत देने की उदारता दिखाएगी, इसकी संभावना कम है। जाने-माने मीडिया विश्लेषक मीर आफताबुद्दीन अहमद ने यहां के अखबार ढाका ट्रिब्यून में लिखा है- ‘सत्ताधारी अवामी लीग से अपने सजायाफ्ता राजनीतिक विरोधी के प्रति उदारता दिखाने की उम्मीद करना यथार्थ पर आधारित नहीं है।’
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बेगाम जिया कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। इस समय वे एक प्राइवेट अस्पताल में हैं। चिंताजनक हालत के बावजूद उन्हें विदेश जाने की इजाजत सरकार ने नहीं दी है। लेकिन अवामी लीग के समर्थकों का कहना है कि बेगम जिया आज उसी राजनीतिक संस्कृति का खामियाजा भुगत रही हैं, जिसे अपने 31 साल के राजनीतिक करियर में उन्होंने आगे बढ़ाया। आरोप है कि जब वे प्रधानमंत्री थीं, तब बेगम जिया ने अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति निर्मम रुख अपनाए रखा। खास कर शेख हसीना के प्रति हमेशा ही उनका रुख सख्त रहा।
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इस बीच मीडिया रिपोर्टों से जाहिर है कि इस मुद्दे पर बेगम जिया को जनता के एक बड़े वर्ग की हमदर्दी मिल रही है। ऐसे लोगों की राय है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री की जान दांव पर लगी हो, तो वर्तमान सरकार को अधिक उदारता दिखानी चाहिए। पर्यवेक्षकों ने आशंका जताई है कि अगर बेगम जिया की जिंदगी खतरे में पड़ी, तो उसको लेकर देश में बड़ी उथल-पुथल मच सकती है। बीएनपी के समर्थक पहले से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जानकारों ने कहा है कि ये प्रदर्शन आगे चल कर हिंसक रूप ले सकते हैं।
मीर आफताबुद्दीन अहमद ने लिखा है- ‘सरकार से यही उम्मीद की जाएगी कि वह इस युवा देश के भविष्य को ध्यान में रख कर फैसला ले। बेशक अतीत में बेगम जिया का व्यवहार ऐसा रहा है, जिसे माफ नहीं किया जा सकता। लेकिन सरकार को बेगम जिया के लिए नहीं, बल्कि खुद अपने और देश के हित में फैसला लेना चाहिए।’
विश्लेषकों क कहना है कि बेगम जिया के शासनकाल में शेख हसीना से दुश्मन जैसा व्यवहार किया गया था। यहां तक कि शेख हसीना पर जानलेवा हमला भी हुआ था। इसीलिए शेख हसीना ने सत्ता में आने के बाद उस मामले की जांच कराई। इस मामले में बेगम जिया के बेटे को दोषी पाया गया। बेगम जिया को भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी पाया गया। इसलिए अब यह पूरी तरह सरकार पर है कि वह बेगम जिया को विदेश ले जाने की इजाजत देती है या नहीं।