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क्या अब 100 फीसदी टीकाकरण हो जाएगा अमेरिका में, वैचारिक कारणों से लोग कर रहे हैं वैक्सीन का विरोध

Tue, 24 Aug 2021 04:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 24 Aug 2021 04:47 PM IST
सार

बीते शनिवार को जब एक जनसभा में ट्रंप ने लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने की सलाह दी, तो उनके समर्थकों की भीड़ ने ही उनकी हूटिंग शुरू कर दी। उसके बाद ट्रंप को यह कहना पड़ा कि कोरोना वैक्सीन आप लगवाएं या नहीं, यह आप की आजादी है...

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There is also a big problem in US with people who are opposing the vaccine for ideological reasons
कोरोना वैक्सीन - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

फाइजर कंपनी की कोरोना वैक्सीन को पूर्ण मंजूरी मिलने से क्या अमेरिका में टीकाकरण की रफ्तार तेज हो जाएगी? कुछ पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से पूर्ण मंजूरी मिलने का असर यह होगा कि ऐसे लोग जो वैक्सीन के प्रभाव को लेकर चिंतित थे, वे टीका लगवाने के लिए प्रेरित होंगे। लेकिन जानकारों के मुताबिक अमेरिका में बड़ी समस्या ऐसे लोगों की भी है, जो वैचारिक कारणों से वैक्सीन का विरोध कर रहे हैं।

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अमेरिका में धुर दक्षिणपंथी आंदोलन के फैलने के साथ ही वैक्सीन और वैज्ञानिक सोच से जुड़ी तमाम बातों का विरोध बढ़ा है। इसे बढ़ाने में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी भूमिका रही। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि बीते शनिवार को जब एक जनसभा में ट्रंप ने लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने की सलाह दी, तो उनके समर्थकों की भीड़ ने ही उनकी हूटिंग शुरू कर दी। उसके बाद ट्रंप को यह कहना पड़ा कि कोरोना वैक्सीन आप लगवाएं या नहीं, यह आप की आजादी है।
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फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने पिछले साल फाइजर के वैक्सीन को इमरजेंसी यूज (आपातकालीन इस्तेमाल) की इजाजत दी थी। सोमवार को उसे पूर्ण मंजूरी दी गई। उसके बाद अमेरिकी शेयर बाजार में उछाल देखा गया। इसे इस उम्मीद का संकेत माना गया कि टीकाकरण की गति तेज होने से महामारी काबू में आएगी। उससे अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को निजी कंपनियों से कहा कि वे अपने कर्मचारियों के लिए टीका लगवाना अनिवार्य कर दें। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने यह कदम उठाया, तो उसे लाखों नए लोग टीका लगवाएंगे।

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अमेजन, यूनाइटेड एयरलाइंस, टायसन फूड्स, वॉलमार्ट, और वॉल्ट डिज्नी जैसी कंपनियां ऐसा कदम पहले ही उठा चुकी हैँ। लेकिन कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए टीका लगवाना अब तक अनिवार्य नहीं किया है। इन्वेस्टमेंट परामर्श कंपनी वेल्थ एलायंस के प्रबंध निदेशक एरिक डिटॉन ने सोमवार को टीवी चैनल एनबीसी से कहा- ‘मुझे लगता है कि पूर्ण मंजूरी मिलने के बाद अब अधिक कंपनियां, राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन टीकाकरण को अनिवार्य बनाएंगी। टीकाकरण की दर बढ़ने पर कोविड का प्रभाव घटेगा। उसका तुरंत असर अर्थव्यवस्था की मजबूती के रूप में दिखेगा।’

इस टीवी चैनल से बातचीत में लॉ फर्म कॉजेन ओ कॉनर के श्रम एवं रोजगार विभाग के उपाध्यक्ष माइकल श्मिड्ट ने भी उम्मीद जताई कि अब वैक्सीन को लेकर शक जताने वाले लोग अधिक अलग-थलग पड़ जाएंगे। कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि पूर्ण मंजूरी के बाद अब कंपनियां और संगठनों के लिए यह प्रावधान करना भी संभव हो जाएगा कि उनके यहां उन्हीं ग्राहकों को प्रवेश दिया जाएगा, जिन्होंने टीका लगवा लिया है। इससे यात्रा और अवकाश उद्योग में भी तेजी आ सकती है।

लेकिन जो लोग राजनीतिक आधार पर टीकाकरण के खिलाफ हैं, उन पर इसका क्या असर होगा, ये कहना मुश्किल है। वैक्सीन विरोधी आंदोलन अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपों में भी लगातार मजबूत बना हुआ है। बीते हफ्ते ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में लॉकडाउन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इसलिए अमेरिका में अभी भी ये बात भरोसे से कहने को तैयारी नहीं है कि अब वहां 100 फीसदी टीकाकरण का रास्ता खुल गया है।

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