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नेपाल: खुले में शौच के अंत से लाभ ही लाभ

Thu, 31 Oct 2019 07:07 AM IST
संजीव कुमार झा यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 31 Oct 2019 07:07 AM IST
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There are lots of Benefit from the end of open defecation in Nepal
नेपाल में खुले में शौच का अंत - फोटो : यूएन हिंदी समाचार

नेपाल के तराई क्षेत्र में बसे माझी गांव में 104 लोग रहते हैं। गरीबी से घिरे इस गांव में सुनयना भी रहती हैं। इस गांव में मिट्टी की एक गंदी सड़क के किनारे मिट्टी, घास और पुआल से बनी झोपड़ियां एक कतार में खड़ी हैं। ये सड़क चावल के उन खेतों से गुज़रती है जिनसे सुनयना और उसके पड़ोसियों का जीवन-यापन होता है।

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इस अल्प विकसित क्षेत्र में अभी तक साफ-सफाई की बहुत कमी थी। स्थानीय मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, राजू प्रजाद साह का कहना है, "पहले लोगों के पास शौचालय नहीं था, उन्हें लगता ही नहीं था कि शौच करने के लिए उचित स्थान का होना भी जरूरी है।"
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उन्होंने बताया कि किस तरह इस गांव में खुले में शौच करने की पुरानी और आम परंपरा रही है। सड़क के उस पार जिस तालाब में ग्रामीण लोग मछली और पानी के दूसरे जानवर पालते हैं, वो भी अक्सर दूषित रहता था।
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राजू प्रजाद साह के मुताबिक कुछ समय पहले तक माझी में खुले में शौच करने के कारण दस्त और अन्य संक्रामक रोगों का फैलना आम बात थी। विशेष रूप से कमज़ोर युवा, बूढ़े, अकेलेपन, विकलांगता या मानसिक बीमारी के कारण रोग-प्रतिरोधक क्षमता में कमी से पीड़ित लोग इसका शिकार ज्यादा बनते थे।

उनमें भी सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता था। जल आपूर्ति मंत्रालय के अनुसार हाल के दशकों में हर साल सात से दस हजार नेपाली बच्चों की मौत दस्त और अन्य संबंधित बीमारियों से हुई है। कुछ महीने पहले नेपाल में राष्ट्रव्यापी प्रयास शुरू किए गए ताकि लोगों को खुले में शौच के लिए ना जाने और शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा सके। 

नेपाल सरकार के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान से माझी गांव में बड़े बदलाव लाने में सफलता मिली है। स्थानीय नेता नथुनी प्रसाद कुशवाहा कहते हैं कि शुरुआत में अधिकांश लोग इस योजना के खिलाफ थे और मानते थे कि यह हमारी संस्कृति के विरुद्ध है, इसलिए हम अपने घरों के बाहर ही शौच करेंगे।

नथुनी प्रसाद कुशवाहा  का कहना है कि खुले में शौच और बीमारी के बीच संबंध के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सामुदायिक समूह अब घर-घर जा रहे है।

साथ ही, शौचालयों के उपयोग और हाथ धोने जैसी अच्छी आदतों के स्वास्थ्य लाभों को लेकर भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीणों को स्वच्छता के लाभ और उनके जीवन पर इसके प्रभाव के बारे में शिक्षा दी गई, धीरे-धीरे बात उनकी समझ में आने लगी।

मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में राजू प्रसाद साह पर नगर पालिका में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि खुले में शौच की समाप्ति के लिए तीन महीने के गहन प्रयासों के बाद माझी के हर घर ने अपना शौचालय बनाने का फैसला किया।

उनका कहना था, अब ये सभी लोग शौचालय का उपयोग कर रहे हैं, और ज़ाहिर है कि तब से अब में अंतर ये है कि अब बीमारियों में कमी आएगी और उनका जीवन स्तर सुधरेगा। 

सुनयना के घर के पीछे एक शौचालय है। उनका कहना है, मैंने क़र्ज़ लेकर ख़ुद इसे बनाया था। मैंने अभी तक कर्ज़ पूरी तरह नहीं चुकाया है, लेकिन चावल की पैदावार से एक साल के भीतर इसका भुगतान कर दूंगी।

घोषणा

30 सितंबर 2019 को नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश के सभी 77 ज़िलों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया। इस प्रगति से उत्साहित सरकार ने दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तनों के लिए एक नए राष्ट्रीय अभियान की घोषणा की है।

वर्ष 2011 से संयुक्त राष्ट्र की जल आपूर्ति और स्वच्छता सहयोग परिषद (WSSCC), नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर देश में साफ-सफाई और स्वच्छता का दृष्टिकोण बदलने का काम कर रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान नेपाल में स्वच्छता प्रयासों में विशेष रूप से दक्षिणी तराई के मैदानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ इस क्षेत्र की कठिन सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, WSSCC द्वारा समर्थित और यूएन-हैबिटैट, गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी भागीदारों द्वारा कार्यान्वित इस कार्यक्रम ने केवल आठ वर्षों में आठ तराई ज़िलों में स्वच्छता मानकों को 13 प्रतिशत से बढ़ाकर 98 प्रतिशत तक लाने में मदद की है। 

WSSCC की सू कोट्स ने बताया, नेपाल में हम जो प्रगति देख रहे हैं, वह बहुत उत्साहजनक है और इससे साबित होता है कि देश की सरकारों, विकास भागीदारों, ग़ैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने से क्या-कुछ हासिल होना संभव है। 

हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है। सू कोट्स के अनुसार, ये दिन इस तरह की उपलब्धियों का जश्न मनाने और यह सुनिश्चित करने का एक अवसर है कि इस तरह के लाभ कायम रहें और हम स्वच्छता की सीढ़ी पर आगे बढ़ने के लिए देशों को सहयोग देते रहें। ये सभी टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बहुत आवश्यक है।
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