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चलन: दुनिया में सबसे ज्यादा यूएस करता है वन्यजीव आयात, 22 साल में 2.85 अरब जानवरों को मंगवा चुके अमेरिकी लोग
Tue, 11 Feb 2025 07:00 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 11 Feb 2025 07:00 AM IST
सार
अमेरिका में आयात किए जाने वाले जानवरों में से आधे से अधिक जंगली जानवर हैं। निर्यातकों को बेचने के लिए वन्यजीवों को पकड़ना दुनिया भर के ग्रामीण समुदायों, खासकर अफ्रीका के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकता है।
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अमेरिका में जानवरों का आयात
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पिछले 22 सालों में अमेरिका में लोगों ने लगभग 30 हजार प्रजातियों के लगभग 2.85 अरब जानवरों का आयात किया है। अधिकांश वन्यजीव व्यापार वास्तव में कानूनी है और अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव आयातक है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार आयातित जानवरों में से से कुछ जंगली जानवर पालतू बन जाते हैं। जैसे सरीसृप (रेप्टाइल) मकड़ियां, क्लाउनफिश, चिम्पांजी और यहां तक कि बाघ भी इसमें शामिल हैं।
इसके अलावा हजारों की संख्या में ये जानवर चिड़ियाघरों और एक्वेरियम में पहुंच जाते हैं। कुछ जानवरों को सीधे प्रयोगशालाओं में पहुंचा दिया जाता है। जैसे चिकित्सा अनुसंधान में मैकाक बंदरों का उपयोग होता है। इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग 39,000 मैकाक बंदर आयात किए जाते हैं। इसी तरह फैशन व्यापार के लिए प्रतिवर्ष 10 से 20 लाख मगरमच्छ की खालें आयात होती हैं। आयातित प्रजातियों में पक्षियों की संख्या सबसे ज्यादा है। प्रतिवर्ष पक्षियों की 4,985 प्रजातियां आयात की जाती हैं। इनमें सबसे ज्यादा 60 लाख से अधिक मुस्कोवी बत्तखें हैं। इसके बाद 3,048 प्रजातियां सरीसृपों की हैं।
आयातित जानवरों में आधे से ज्यादा जंगली
अमेरिका में आयात किए जाने वाले जानवरों में से आधे से अधिक जंगली जानवर हैं। निर्यातकों को बेचने के लिए वन्यजीवों को पकड़ना दुनिया भर के ग्रामीण समुदायों, खासकर अफ्रीका के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकता है। हालांकि, जंगली आयातित प्रजातियां बीमारियां या परजीवी भी फैला सकती हैं। कई आयातित जानवरों को देशी प्रजातियों में बीमारियां फैलाने के कारण हानिकारक वन्यजीव के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इनके जरिए न सिर्फ बीमारियां फैलती हैं बल्कि ये पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन जाते हैं।
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वन्य जीव व्यापार के आंकड़ों की जानकारी में काफी कमी
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में वन्यजीव व्यापार के आंकड़ों में कई प्रजातियों के बारे में जानकारी की कमी हैै। इसके बावजूद इस व्यापार पर ध्यान रखना बहुत अहम है क्योंकि यह जैव विविधता, स्वास्थ्य व पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन सकता है। ई-कॉमर्स प्लेटफार्म वन्यजीव व्यापार के हॉटस्पॉट बन गए हैं और निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है।
खरीद-बिक्री की जानेवाली प्रजातियों की जंगली आबादी में निगरानी अवधि में औसतन 62 फीसदी की कमी आई है। हालांकि टिकाऊ वन्यजीव व्यापार संभव है पर यह जंगलों के कटने और बंदी प्रजनन के बीच संतुलन के लिए सावधानीपूर्वक निगरानी पर निर्भर करता है।
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इसके अलावा हजारों की संख्या में ये जानवर चिड़ियाघरों और एक्वेरियम में पहुंच जाते हैं। कुछ जानवरों को सीधे प्रयोगशालाओं में पहुंचा दिया जाता है। जैसे चिकित्सा अनुसंधान में मैकाक बंदरों का उपयोग होता है। इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग 39,000 मैकाक बंदर आयात किए जाते हैं। इसी तरह फैशन व्यापार के लिए प्रतिवर्ष 10 से 20 लाख मगरमच्छ की खालें आयात होती हैं। आयातित प्रजातियों में पक्षियों की संख्या सबसे ज्यादा है। प्रतिवर्ष पक्षियों की 4,985 प्रजातियां आयात की जाती हैं। इनमें सबसे ज्यादा 60 लाख से अधिक मुस्कोवी बत्तखें हैं। इसके बाद 3,048 प्रजातियां सरीसृपों की हैं।
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आयातित जानवरों में आधे से ज्यादा जंगली
अमेरिका में आयात किए जाने वाले जानवरों में से आधे से अधिक जंगली जानवर हैं। निर्यातकों को बेचने के लिए वन्यजीवों को पकड़ना दुनिया भर के ग्रामीण समुदायों, खासकर अफ्रीका के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकता है। हालांकि, जंगली आयातित प्रजातियां बीमारियां या परजीवी भी फैला सकती हैं। कई आयातित जानवरों को देशी प्रजातियों में बीमारियां फैलाने के कारण हानिकारक वन्यजीव के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इनके जरिए न सिर्फ बीमारियां फैलती हैं बल्कि ये पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन जाते हैं।
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वन्य जीव व्यापार के आंकड़ों की जानकारी में काफी कमी
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में वन्यजीव व्यापार के आंकड़ों में कई प्रजातियों के बारे में जानकारी की कमी हैै। इसके बावजूद इस व्यापार पर ध्यान रखना बहुत अहम है क्योंकि यह जैव विविधता, स्वास्थ्य व पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन सकता है। ई-कॉमर्स प्लेटफार्म वन्यजीव व्यापार के हॉटस्पॉट बन गए हैं और निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है।
खरीद-बिक्री की जानेवाली प्रजातियों की जंगली आबादी में निगरानी अवधि में औसतन 62 फीसदी की कमी आई है। हालांकि टिकाऊ वन्यजीव व्यापार संभव है पर यह जंगलों के कटने और बंदी प्रजनन के बीच संतुलन के लिए सावधानीपूर्वक निगरानी पर निर्भर करता है।