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दोबारा मापी जाएगी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई, नेपाल और चीन ने दी सहमति
Wed, 16 Oct 2019 05:39 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 16 Oct 2019 05:39 AM IST
सार
- ऊंचाई मापने के लिए नेपाल और चीन ने संयुक्त रूप से सहमति जताई
- 1855 में भारत ने माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई घोषित की थी
- भूकंप के बाद एवरेस्ट की ऊंचाई करीब तीन सेंटीमीटर तक कम हो गई है
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माउंट एवरेस्ट
विस्तार
माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई के कम होने को लेकर इसे दोबारा मापने की बात उठी है। इस पर नेपाल और चीन ने संयुक्त रूप से सहमति जताई है। एक रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में अप्रैल, 2015 में आए जोरदार भूकंप के बाद दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी की ऊंचाई करीब तीन सेंटीमीटर तक कम हो गई है।
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वर्तमान समय में माउंट एवरेस्ट की आधिकारिक रूप से मान्य ऊंचाई 8,848 मीटर है। भारत ने भी 2017 में नेपाल को माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई फिर मापने में मदद का प्रस्ताव दिया था। माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई फिर मापने का फैसला चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी नेपाली समकक्ष बिद्या देवी भंडारी व प्रधानमंत्री ओपी शर्मा ओली के बीच वार्ता के बाद लिया गया।
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दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, ‘वे माउंट सागरमाथा या माउंट झुमुलंगमा की ऊंचाई की संयुक्त रूप से घोषणा करेंगे और वैज्ञानिक अनुसंधान करेंगे।’ मालूम हो कि 1855 में सर जॉर्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में भारत ने माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई घोषित की थी।
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