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Hindi News ›   World ›   The first challenge before Macron in his second term that to get his party La République en Marsh back a majority in the parliamentary elections to be held in June

फ्रांस राष्ट्रपति चुनाव: भले ही दूसरी बार चुने गए इमैनुएल मैक्रों, लेकिन इस बार राह नहीं होगी आसान

Mon, 25 Apr 2022 03:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 25 Apr 2022 03:21 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों के मुताबिक मैक्रों की जीत तय करने में वामपंथी नेता ज्यां लुक मेलेन्शॉं के समर्थकों की बड़ी भूमिका रही है। मेलेन्शॉं को पहले दौर के मतदान में 22 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। अनुमान है कि दूसरे दौर में उनमें से ज्यादातर मतदाताओं ने मैक्रों को वोट दिया...

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The first challenge before Macron in his second term that to get his party La République en Marsh back a majority in the parliamentary elections to be held in June
इमैनुएल मैक्रों - फोटो : Agency

विस्तार

पहले के अनुमान के मुताबिक ही इमैनुएल मैक्रों एक और कार्यकाल के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। लेकिन इस बार उनके समर्थन में आठ फीसदी मतों की भारी गिरावट आई है। उधर धुर दक्षिणपंथी नेता मेरी ली पेन को 2017 के चुनाव की तुलना समर्थन में इतना ही अधिक समर्थन मिला। इस ट्रेंड के कारण रविवार रात चुनाव परिणाम का ठोस संकेत मिलते ही यहां मैक्रों के दूसरे कार्यकाल की मुश्किलों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

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मुश्किल होगा शासन करना

मैक्रों के सामने सबसे पहली चुनौती जून में होने वाले संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी ला रिपब्लिक एन मार्श को फिर बहुमत दिलाने की है। इस बार ये लक्ष्य आसान नहीं माना जा रहा है। फ्रांस में संसदीय बहुमत के आधार पर ही प्रधानमंत्री चुना जाता है। फ्रेंच संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बनने वाली सरकार के बीच अधिकार और कार्य क्षेत्र का स्पष्ट बंटवारा है। ऐसे में अगर मैक्रों की मन-माफिक सरकार नहीं बनी, तो उनके लिए शासन करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

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पर्यवेक्षकों के मुताबिक मैक्रों की जीत तय करने में वामपंथी नेता ज्यां लुक मेलेन्शॉं के समर्थकों की बड़ी भूमिका रही है। मेलेन्शॉं को पहले दौर के मतदान में 22 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। अनुमान है कि दूसरे दौर में उनमें से ज्यादातर मतदाताओं ने मैक्रों को वोट दिया। जबकि धुर दक्षिणपंथी और मैक्रों से नाराज कामकाजी वर्ग के मतदाताओं का पूरा ध्रुवीकरण ली पेन के पक्ष में हुआ।
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मेलेन्शॉं ने घोषणा की है कि वे पूरे दमखम के साथ संसदीय चुनाव में उतरेंगे। उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि वे उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए मतदान करें, ताकि मैक्रों निर्बाध रूप से अपनी दक्षिणपंथी आर्थिक नीतियों को लागू ना कर पाएं। 70 वर्षीय मेलेन्शॉं ला फ्रांस इन्सोमाइज (एफएफआई) पार्टी के नेता हैं। पहले चरण में 77 लाख लोगों ने उनके पक्ष में मतदान किया था। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर फिर उनकी पार्टी को इतने वोट मिले, तो ये पार्टी किंग मेकर बन कर उभर सकती है।

25 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मेलेन्शॉ ने कम्युनिस्ट पार्टी और पर्यावरणवादी पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ने के लिए बातचीत शुरू की है। इन तीनों दलों ने मिल कर पहले चरण के मतदान में 25 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए थे। उधर ये संभावना भी जताई गई है कि ली पेन की नेशनल रैली पार्टी का संसदीय चुनाव में प्रदर्शन मजबूत रहेगा। अगर ली पेन ने दूसरे दक्षिणपंथी गुटों के साथ गठबंधन बना लिया, तो वे भी अपने को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश करने की स्थिति में होंगी।



फ्रांस की संसद के निचले सदन में 577 सदस्य हैं। सदन के चुनाव के लिए प्रचार औपचारिक रूप से अगले 10 मई को शुरू होगा। पिछली बार मैक्रों की पार्टी को 263, कंजरवेटिव पार्टी लेस रिपब्लिकंस को 93, मध्यमार्गी मो-डेम को 52, सोशलिस्ट पार्टी को 25 और एलएफआई को 17 सीटें मिली थीं। इस बार लेस रिपब्लिकंस, मो-डेम और सोशलिस्ट पार्टी बहुत कमजोर स्थिति में है। ऐसे में आम अनुमान है कि संसदीय चुनाव में भी मैक्रों की पार्टी का मुख्य मुकाबला ली पेन और मेलेन्शॉं के दलों से ही होगा।

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