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ईयू संसद ने दिया करारा झटका, मानवाधिकार पुरस्कार समारोह की मेहमान सूची से हटाया आंग सान सू की का नाम
Fri, 11 Sep 2020 03:05 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 11 Sep 2020 03:05 AM IST
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आंग सान सू की
- फोटो : एएनआई
म्यामांर की नेता आंग सान सू की को यूरोपियन संघ की संसद ने बृहस्पतिवार को करारा झटका दे दिया। संसद ने अपने मानवाधिकार पुरस्कार समारोह की मेहमान सूची से सू की की का नाम हटा दिया है।
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हालांकि पहले सू की को समारोह में आमंत्रण भेजा गया था। लेकिन ईयू सांसदों ने बृहस्पतिवार को बताया कि सू की को मेहमान सूची से हटाकर हमने उनके देश में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ चल रहे नरसंहार के खिलाफ प्रदर्शन का विरोध जताया है।
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म्यामांर की पूर्व राजनीतिक बंदी रह चुकीं सू की अब स्टेट काउंसलर पद पर हैं। उन्हें मिलिट्री जुंटा के शासनकाल के दौरान 1990 में ईयू ने अपना मानवाधिकार मुद्दों के लिए मिलने वाला सखारोव पुरस्कार दिया था। सू की को इस पुरस्कार के अन्य विजेताओं की तरह इस साल भी समारोह में आमंत्रित किया गया था। बृहस्पविार को ईयू के सांसदों ने सूकी का नाम मेहमानों की सू ची से हटाने की घोषणा कर दी।
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हालांकि ईयू संसद ने सू की को दिया गया मानवाधिकार पुरस्कार और 50 हजार यूरो की इनामी राशि वापस मांगने से इनकार किया है।
2010 में नजरबंदी से रिहा होने वाली सू की 2015 में सत्ता में आई थी, जब म्यामांर में करीब आधी सदी लंबे सैन्य जुंटा के शासन का अंत हुआ था। उन्हें रोहिंग्याओं के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को रोकने में विफल होने के कारण अंतरराष्ट्रीय आरोपी माना गया था और उन पर द हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र अदालत में मुकदमा भी चला था।
इस मुकदमे में सू की ने नरसंहार को गलत बताया था और अपने देश के खिलाफ लगे आरोपों का बचाव किया था।
नोबेल पुरस्कार वापस लेने की भी मांग
सू की से नोबेल शांति पुरस्कार वापस लाने की भी मांग उठने लगी है। सू की की तरफ से रोहिंग्याओं पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में दिए गए बयान के बाद उन्हें 1991 में दिया गया नोबेल पुरस्कार भी वापस लेने की मांग की गई है।