Pakistan: ईरान से ऊर्जा आयात करने की पाकिस्तान की मंशा पर आतंकवाद की तगड़ी मार
पाकिस्तान की सीमा से लगे एक ईरानी शहर में आतंकवादी गुट सरावान के साथ बीते 21 मई को ईरान के बॉर्डर गार्ड्स की मुठभेड़ हुई थी। उनमें पांच ईरानी बॉर्डर गार्ड्स मारे गए थे। इसके ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की सीमा से लगे एक गांव में मुलाकात हुई थी...
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ईरान से पाकिस्तान की लगी सीमा पर हाल में हुए एक आतंकवादी हमले से ईरान से ऊर्जा आयात करने की शहबाज शरीफ सरकार की मंशा पर तगड़ी चोट पहुंची है। विदेशी मुद्रा की किल्लत से उबरने की कोशिश में शरीफ सरकार ने ईरान से किफायती दर पर ऊर्जा आयात की योजना बनाई है। विश्लेषकों के मुताबिक आतंकवादी हमले ने इस रास्ते में नई रुकावटें खड़ी कर दी हैं।
पाकिस्तान की सीमा से लगे एक ईरानी शहर में आतंकवादी गुट सरावान के साथ बीते 21 मई को ईरान के बॉर्डर गार्ड्स की मुठभेड़ हुई थी। उनमें पांच ईरानी बॉर्डर गार्ड्स मारे गए थे। इसके ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की सीमा से लगे एक गांव में मुलाकात हुई थी। वहां वे 100 मेगावाट बिजली की ट्रांसमिशन लाइन के उद्घाटन के लिए गए थे। इस ट्रांसमिशन लाइन से पाकिस्तान के बंदरगाह ग्वादार को ईरान में बनी बिजली पहुंचाई जानी है। ग्वादार परियोजना का निर्माण चीन की महत्त्वाकांक्षी योजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत हुआ है।
ईरान के विदेश मंत्री ने आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए इसे ‘ईरान और पाकिस्तान के बीच सहयोग और दोस्ताना संबंधों को नुकसान पहुंचान की कोशिश’ बताया था। हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी गुट जैश-उल-अदल ने ली। इस गुट ने कहा कि शिया बहुल ईरान में सुन्नी मुसलमानों के साथ बदसलूकी का बदला लेने के लिए उसने यह हमला किया।
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक मिडल ईस्ट इंस्टीट्यूट में ईरान प्रोग्राम के निदेशक एलेक्स वतान्का ने कहा है- ‘यह हमला ईरान और पाकिस्तान के बीच संभावित ऊर्जा करार के लिए बड़ा झटका है। असुरक्षा के माहौल में कोई आर्थिक सहयोग नहीं हो सकता।’
जानकारों के मुताबिक ईरान सीमा पर हुआ हमला पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है। पाकिस्तान इस समय आर्थिक मुसीबत में है। इस बीच ईरान से संभावित ऊर्जा करार उसकी बहुत बड़ी उम्मीद हैं। पोलैंड में वॉरसा स्थित वॉर स्टडीज एकेडमी में ईरान विशेषज्ञ प्रेजेमिस्लाव लिसिन्स्की ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘बिना इस तरह की घटनाएं रोके पाकिस्तान और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग संभव नहीं है।’
पाकिस्तान सरकार के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर इसी वेबसाइट से कहा कि पाकिस्तान सरकार इसलिए ईरान से ऊर्जा का आयात करना चाहती है, क्योंकि उस स्थिति में वह अपनी मुद्रा में भुगतान कर पाएगी। जबकि ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध इस मामले में एक बड़ी रुकावट हैं। पाकिस्तान बड़े पैमाने पर ईरान से ऊर्जा का आयात तभी कर पाएगा, जब वह अमेरिका को इस मामले में रियायत देने के लिए राजी कर ले।
पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार इस सिलसिले में अमेरिका को अपना अनुरोध भेज चुकी है। लेकिन लेसिन्स्की ने कहा- ‘चूंकि अमेरिका की परमाणु करार के लिए ईरान से बातचीत ठहर चुकी है, इसलिए पाकिस्तान को ऐसी रियायत मिलना बहुत मुश्किल है।’ इसी बीच आतंकवादी हमले ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।