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श्रीलंका में महंगाई की मार: बेहाल जनता सड़कों पर उतरी, सरकार को अब भारत से आस, वित्त मंत्री राजपक्षे ने की पीएम मोदी से मुलाकात
Wed, 16 Mar 2022 09:09 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 16 Mar 2022 09:09 PM IST
सार
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2021 तक श्रीलंका पर 35 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज था जिसमें चीन की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी थी। रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी देश के हालात बिगाड़ दिए हैं।
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Basil Rajapaksa called on PM Modi
- फोटो : ANI
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विस्तार
श्रीलंका में महंगाई की मार से बेहाल जनता अब बगावत पर उतर आई है। चीन के कर्ज के जाल में बुरी तरह उलझे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था धराशायी होने लगी है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका भारी कर्ज और बढ़ती कीमतों की दोहरी मार का सामना कर रहा है। इससे खाद्यान्न और ईंधन की किल्लत हो गई है। इससे नागरिकों का धैर्य जवाब दे गया है और वे सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
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राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
मंगलवार को यूनाइटेड पीपुल्स फोर्स के विपक्षी दल के समर्थकों के नेतृत्व में कोलंबो में राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए। विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए घोषणा की कि यह सरकार को हटाने के लिए एक अभियान की शुरुआत है। आप दो साल से पीड़ित हैं। क्या आप और अधिक पीड़ित हो सकते हैं? प्रेमदासा ने मौजूदा सरकार को बुराई बताया और देश के कई आर्थिक संकटों के लिए इसे जिम्मेदार ठहराया।
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समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका अपने इतिहास के सबसे खराब वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। वहीं, एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 14 साल के उच्च स्तर पर पहुंचने से श्रीलंकाई सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण गेहूं की कीमतों में भी भारी बढोतरी हो रही है।
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श्रीलंका के पर्यटन पर रूस-यूक्रेन युद्ध की मार
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2021 तक श्रीलंका पर 35 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज था जिसमें चीन की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी थी। श्रीलंका के पर्यटन पर भी रूस-यूक्रेन युद्ध की मार पड़ी है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका में जनवरी 2022 में कुल 82,327 पर्यटक आए जिसमें से लगभग 26 फीसदी इन देशों से थे। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को चीन से उम्मीद थी लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगी है। मजबूर श्रीलंका की नजरें अब भारत पर हैं। श्रीलंका अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों से निवेश की आस लगाए बैठा है।
श्रीलंका के वित्त मंत्री ने की पीएम मोदी से मुलाकात
वहीं, भारत दौरे पर पहुंचे श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। श्रीलंका के उच्चायोग के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे को भरोसा दिया कि भारत हमेशा एक मित्र पड़ोसी के रूप में श्रीलंका के साथ खड़ा रहेगा। बासिल राजपक्षे ने मोदी को मुश्किल वक्त में श्रीलंका को दी गई मदद के लिए धन्यवाद दिया।