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War: नाटो की अस्पष्टता व मदद में देरी से खिसक रही यूक्रेन की जमीन, युद्ध रोकने के पक्ष में नहीं पुतिन
Sat, 05 Jul 2025 07:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, मास्को/वाशिंगटन
अमर उजाला नेटवर्क, मास्को/वाशिंगटन
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sat, 05 Jul 2025 07:42 AM IST
सार
अमेरिकी मदद के बावजूद पश्चिम की रणनीतिक अस्पष्टता व नाटो से मदद मिलने में देरी के चलते आक्रामक रूसी अभियान के सामने यूक्रेन की जमीन धीरे-धीरे खिसक रही है। विश्लेषकों का मानना है कि जमीन पर मिल रही रूसी बढ़त को देखते हुए पुतिन अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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ट्रंप, पुतिन और जेलेंस्की (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तौर पर देखी जा रही व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच की ताजा बातचीत भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अमेरिकी मदद के बावजूद पश्चिम की रणनीतिक अस्पष्टता व नाटो से मदद मिलने में देरी के चलते आक्रामक रूसी अभियान के सामने यूक्रेन की जमीन धीरे-धीरे खिसक रही है।
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विश्लेषकों का मानना है कि जमीन पर मिल रही रूसी बढ़त को देखते हुए पुतिन अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सामरिक मामलों के विश्लेषक लुका डेविस के अनुसार नाटो द्वारा भेजे गए हथियार अक्सर देरी से पहुंचते हैं और कई बार वे जमीनी जरूरतों से मेल नहीं खाते। दूसरी ओर रूस के पास लंबी दूरी की मिसाइलें, घातक ड्रोन और पर्याप्त मानव संसाधन की निरंतर आपूर्ति है। नाटो की रणनीति अभी भी प्रतिक्रियात्मक है, जबकि रूस पूर्व योजना और गहराई तक आक्रामक अभियान चला रहा है।
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पश्चिमी समर्थन में है रणनीतिक अस्पष्टता
ऑक्सफोर्ड विवि की रक्षा विश्लेषक डॉ. कैथरीन माइकल्स कहती हैं कि पश्चिमी समर्थन में रणनीतिक अस्पष्टता बड़ी समस्या है। जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका जैसे प्रमुख देशों की घरेलू राजनीति यूक्रेन के समर्थन को बाधित कर रही है। हाल ही में यूक्रेन ने रूस के अंदर स्थित कई प्रमुख हवाई ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं, जिनसे रूस के सैन्य ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसका उल्लेख करते हुए पुतिन ने ट्रंप से कहा कि अब रूस युद्ध को निर्णायक स्थिति की ओर ले जाएगा।
पुतिन युद्ध रोकने के पक्ष में नहीं
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक और इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) वाशिंगटन की रिपोर्ट कहती है कि रूसी राष्ट्रपति फिलहाल युद्ध को रोके जाने के पक्ष में नहीं दिखते। रूसी सेना ने डोनेट्स्क, लुहांस्क और जापोरिझिया समेत कई इलाकों में सैन्य बढ़त बना रखी है। युद्धविराम का मतलब मौजूदा रणनीतिक लाभ को छोड़ना होगा, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
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सैन्य दबाव से परिणाम पाने की कोशिश
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि पुतिन अब कूटनीति के बजाय सैन्य दबाव से परिणाम चाहते हैं। रूस के राजनीतिक विश्लेषक फ्योदोर लुक्यानोव के अनुसार सीजफायर की पश्चिमी कोशिशें तब तक व्यर्थ रहेंगी जब तक यूक्रेन को किसी भी रूप में नाटो सदस्यता या सुरक्षा गारंटी देने की बात होगी।
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