कश्मीर मुद्दा: पाकिस्तान को एक और झटका, तालिबान समेत इन देशों ने नहीं दिया भाव
- पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने पाक को लताड़ा
- अमेरिका, यूएन का साथ न मिलने पर चीन पहुंचा पाकिस्तान
- यूएन ने पाक को दिलाई शिमला समझौते की याद
- चीन को साधने बीजिंग पहुंचे पाक विदेश मंत्री
- पाकिस्तान ने भारत से तोड़ा सांस्कृतिक नाता
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इससे संकट से निपटने में कोई मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि अफगानिस्तान के मुद्दे का इससे कोई लेना देना नहीं है। इसके अलावा अफगानिस्तान अन्य देशों की प्रतिस्पर्धा के बीच फंसना नहीं चाहता।’
पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने पाक को लताड़ा
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने भी पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि वह क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल न करे। करजई ने कहा, ‘अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया को कश्मीर में अपने उद्देश्य से जोड़ना, यह बताता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान को महज एक रणनीतिक उपकरण के तौर पर देखता है।मैं पाकिस्तान सरकार से कहना चाहता हूं कि वह क्षेत्र में हिंसा को अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना बंद करे। हम उम्मीद करते हैं कि जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार का फैसला राज्य और भारत के लोगों की बेहतरी वाला साबित होगा।’
अमेरिका, यूएन का साथ न मिलने पर चीन पहुंचा पाकिस्तान
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के बाद से पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। इधर, संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते पाकिस्तान को शिमला समझौते की याद दिलाई।
उधर, अमेरिका ने कहा कि कश्मीर पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। साथ ही उसने दोनों देशों से शांति व संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से झटका मिलने के बाद पाकिस्तान विश्व समुदाय में अलग पड़ता जा रहा है।
अमेरिका और यूएन का साथ न मिलने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शुक्रवार को आननफानन में चीन पहुंच गए। इस बीच, चीन ने दोनों देशों से संवाद और बातचीत के रास्ते विवादों को सुलझाने की सलाह दी है। कश्मीर मुद्दे को अफगानिस्तान से जोड़ने की चाल भी पाकिस्तान के काम नहीं आई। तालिबान ने कश्मीर मसले की तुलना अफगानिस्तान से करने पर पाकिस्तान की आलोचना की है।
यूएन ने पाक को दिलाई शिमला समझौते की याद
जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान में बढ़ती तलखी के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने दोनों देशों से इस मुद्दे पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। साथ ही गुटारेस ने पाकिस्तान को नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच 1972 में हुई शिमला समझौते की याद दिलाई, जिसमें कश्मीर में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया गया है।
इस समझौते में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर की अंतिम स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार शांतिपूर्ण तरीकों से निर्णय लिया जाएगा। गुटारेस ने शिमला समझौते को याद करते हुए कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से उचित भूमिका निभाने के लिए आग्रह किया था।
कश्मीर पर हमारी नीति कोई बदलाव नहीं: अमेरिका
यूएन से पाकिस्तान को मिले झटके बाद अमेरिका ने इस्लामाबाद को नसीहत दी है। उसने कहा कि कश्मीर पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और उसने भारत और पाकिस्तान से शांति व संयम बरतने का आह्वान किया।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस से संवाददाताओं ने यह पूछा कि क्या अमेरिका की कश्मीर पर नीति में कोई बदलाव आया है? इसके जवाब में ओर्टागस ने कहा, ‘अमेरिका की नीति यह रही है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है और दोनों देशों को ही इस मुद्दे पर बातचीत की गति और गुंजाइश को लेकर फैसला करना है।
अगर नीति में कोई बदलाव हुआ तो निश्चित तौर पर मैं इसकी घोषणा करूंगी, लेकिन ऐसा नहीं है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता का समर्थन करता है। हमने सभी पक्षों से शांति व संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका कश्मीर में स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
चीन को साधने बीजिंग पहुंचे पाक विदेश मंत्री
यूएन और अमेरिका का साथ न मिलने पर पाकिस्तान चीन की शरण में पहुंच गया है। चीन का समर्थन हासिल करने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी शुक्रवार को बीजिंग पहुंचे।
चीन रवाना होने से पहले कुरैशी ने कहा कि कश्मीर पर असांविधानिक निर्णय लेकर भारत क्षेत्रीय शांति को बर्बाद करने कोशिश कर रहा है। इस मुद्दे पर पाकिस्तान चीनी नेतृत्व को विश्वास में लेगा। वहीं, चीन ने भारत और पाकिस्तान से बातचीत के रास्ते विवादों को सुलझाने की सलाह दी है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम दोनों देशों से अपील करते हैं कि आपसी सहमति और बातचीत से विवादों का निपटारा करें और संयुक्त रूप से क्षेत्रीय शांति व स्थिरता कायम करें।’ बता दें कि चीन ने भी जम्मू-कश्मीर से अलग कर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के भारत के फैसले पर अपना विरोध दर्ज कराया था।
पाकिस्तान ने भारत से तोड़ा सांस्कृतिक नाता
भारतीय फिल्मों पर बैन लगाने के बाद अब पाकिस्तान ने भारत के साथ हर तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बंद करने का फैसला किया है, जिसमें दोनों देशों के मनोरंजन उद्योग के बीच हर तरह के संयुक्त उपक्रम भी शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को ‘भारत को ना कहें’ के राष्ट्रीय नारे का आगाज किया।
सूचना एवं प्रसारण पर प्रधानमंत्री इमरान खान की विशेष सहायक फिरदौस आशिक अवान ने कहा, ‘हर तरह की भारतीय सामग्री को रोक दिया गया है और पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी को भारतीय डीटीएच उपकरणों की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ निगरानी बरतने का निर्देश दिया गया है। पाकिस्तान में हर तरह की भारतीय सामग्री वाले नाटक और फिल्मों पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा।’