पंजशीर में तालिबान: पूर्व विदेश मंत्री रब्बानी ने कहा- देश के बाकी हिस्सों में भी फैल सकता है प्रतिरोध
- अहमद मसूद ने कहा- तालिबानी जंगली, अफगान नहीं
- मसूद ने 19 मिनट के वीडियो संदेश में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगते हुए दोहराया कि प्रतिरोध खत्म नहीं होगा
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सलाहुद्दीन रब्बानी ने तालिबान को चेतावनी दी कि अगर बातचीत के जरिए मतभेदों को नहीं सुलझाया गया तो पंजशीर सरीखा प्रतिरोध अफगानिस्तान के बाकी हिस्सों में फैल सकता है। रब्बानी अफगानिस्तान की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी जमीयत इस्लामी के प्रमुख हैं।
पूर्व विदेश मंत्री ने एक वीडियो क्लिप में कहा, यह आपकी लड़ाई नहीं है और न ही आपके एवं आपके लोगों के पक्ष में है। दो सप्ताह में राजनीति एवं सत्ता के संदर्भ में आप अपनी स्थिति को समझ सकते हैं। रब्बानी ने कहा कि अफगानिस्तान में कोई विदेशी सैनिक नहीं बचा है। इसलिए अब तालिबान के लिए युद्ध का कोई बहाना नहीं बचा है। उन्होंने आगे कहा, उसे अब सभी लोगों की बात सुनकर ही सरकार चलानी होगी। एजेंसी
बातचीत से समाधान तलाशे तालिबान
जमीयत इस्लामी के प्रमुख ने कहा कि तालिबान को बातचीत के जरिए मतभेदों का समाधान तलाशना चाहिए। साथ ही एक ऐसे सरकार का गठन करना चाहिए, जो समावेशी हो और जिसमें अफगानिस्तान के सभी लोगों का प्रतिनिधित्व हो। इस बीच, दिवंगत अहमद शाह समूह के बेटे एवं रेजिस्टेंस फ्रंट के नेता अहमद मसूद ने सोशल मीडिया पर कहा है कि लोग अपने अधिकारों के लिए विरोध या लड़ाई करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, निरंकुशता गनी सरकार की तरह तालिबान के लिए भी पतन का कारण बनेगी।
अहमद मसूद ने वीडियो जारी कर खुद को बताया सुरक्षित, कहा- पाकिस्तान ने कराया हमला
पंजशीर घाटी में मोर्चा ले रही एनआरएफ का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद ने कहा कि तालिबान के साथ मिलकर पाकिस्तान ने बमबारी की, जिसमें संगठन के प्रवक्ता फहीम दस्ती और मसूद के परिवार के कई लोग मारे गए। उन्होंने लोगों से तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन करने की अपील की। मसूद ने खुद को सुरक्षित बताया।
अहमद मसूद ने 19 मिनट के वीडियो संदेश में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगते हुए दोहराया कि प्रतिरोध खत्म नहीं होगा। मसूद ने कहा पाकिस्तान ने अफगानों पर सीधा हमला किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे चुपचाप देख रहा है। जब तक मेरे खून की आखिरी बूंद बाकी है, मैं हार नहीं मान सकता।
उन्होंने तालिबानियों को जंगली करार दिया, जिन्होंने पाकिस्तान की मदद लेकर हमला किया। मसूद ने कहा, तालिबान ने साबित कर दिया कि वे अफगान नहीं हैं, वे बाहर से आए हैं और अफगानिस्तान को बाकी दुनिया से अलग रखना चाहते हैं। हर अफगानी को उनके खिलाफ प्रतिरोध करना होगा, चाहे जैसे भी करें। प्रतिरोध अब भी जिंदा है।
तालिबानी शरिया मानते हैं न कुरान
मसूद ने कहा अफगानिसतान की उलमा परिषद ने दुश्मनी छोड़कर बातचीत का सुझाव दिया था, इसी वजह से एनआरएफ ने तालिबान को बातचीत की पेशकश की थी। इसके जवाब में उसने बड़ी संख्या में आतंकी भेजकर पंजशीर पर कब्जा किया, यह दर्शाता है कि तालिबानी न शरिया को मानते हैं न कुरान को।
मसूद ने कहा कि तालिबानियों ने बड़ी संख्या में नागरिकों को मारा, उनके कई करीबी मारे गए हैं। इन मौतों ने उन्हें कमजोर नहीं किया है, न उनकी हिम्मत टूटी है।
मसूद ने कहा कि विदेशियों (पाकिस्तानी) ने तालिबानियों को अपना गुंडा बनकर उन्हें देश पर थोपा है। अफगानिस्तान का भविष्य एक पिछड़े हुए देश के रूप में नजर आ रहा है, जहां सभ्यता, कला, एकता और समभाव नहीं होंगे। वे ऐसा देश बनाने जा रहे हैं जो राजनीतिक और आर्थिक रूप से विश्व से कटा हुआ होगा। विश्व से स्वतंत्र संपर्क या संबंध भी नहीं रख पाएगा।
तालिबान को वैधता देने के लिए विश्व जिम्मेदार
मसूद ने वैश्विक समुदाय को तालिबान को यह मौका देने का जिम्मेदार बताया, जिससे वह राजनीतिक वैधता पा रहा है। जबकि दिख रहा है कि तालिबान सुधरा नहीं है, बल्कि ज्यादा क्रूर और बर्बर हो चुका है। वह पहले से ज्यादा मजहबी कट्टरता और भेदभावों से भरा हुआ है। आज अफगान देख रहे हैं कि कौन सा देश उनके साथ खड़ा है और कौन तालिबान के।