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India-Afghanistan: भारत से राजनीतिक-आर्थिक संबंधों की मजबूती चाहते हैं, तालिबान के विदेश मंत्रालय का आया बयान

Fri, 10 Jan 2025 06:24 AM IST
शिव शुक्ला एजेंसी, काबुल
एजेंसी, काबुल Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 10 Jan 2025 06:24 AM IST
सार

अफगान विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, मुत्तकी ने मानवीय मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया। भारत को यह भरोसा भी दिया कि अफगानिस्तान की ओर से उसे किसी तरह का कोई भय नहीं होना चाहिए।

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Taliban Foreign Ministry said that they want to strengthen political-economic relations with India
विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्ताकी। - फोटो : X/@MEAIndia

विस्तार

अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने भारत की तारीफ करते हुए अपना सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सहयोगी बताया है। यह भी कहा कि वह भारत की सुरक्षा चिंताओं पर पूरा ध्यान देगा। तालिबान सरकार का यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि दो दशक पहले अफगानिस्तान में जब पहली बार तालिबान सत्ता में आए थे, तो भारत संग उनके संबंध बेहद खराब रहे थे।

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अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री से बुधवार को दुबई में हुई बैठक के बाद तालिबान सरकार के विदेश मंत्रालय ने यह बयान जारी किया। बयान में कहा है, मिस्री व मुत्तकी के बीच ईरान में चाबहार बंदरगाह के माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर चर्चा हुई। तालिबान ने कहा कि संतुलित और अर्थव्यवस्था-केंद्रित विदेश नीति के मद्देनजर अफगानिस्तान अहम सहयोगी के तौर पर भारत से राजनीतिक-आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है।
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अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद भारत के साथ अब तक की सबसे शीर्ष स्तर की बातचीत में दोनों पक्षों ने व्यापार संबंधों के अलावा मानवीय सहायता व विकास परियोजनाओं में भारत की भागीदारी पर विस्तार से चर्चा की। एक दिन पहले ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि भारत अफगानिस्तान में विकास परियोजनाओं में फिर से भागीदारी पर विचार कर रहा है।  
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भारत के खिलाफ अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल रोकेगी यह दोस्ती
पाकिस्तान से तनावपूर्ण रिश्ते के बीच अफगानिस्तान की भारत से बढ़ती नजदीकी अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है, यह दोस्ती अफगानिस्तान की धरती का भारत के खिलाफ इस्तेमाल रोकने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दोस्ती आर्थिक संकटों में घिरे पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा सकती है।
 
चीन के साथ पाकिस्तान ने जो ग्वादर बंदरगाह विकसित किया है, उसके कारोबार का बड़ा हिस्सा ईरान के चाबहार बंदरगाह को मिलने की उम्मीद है। मिस्री व मुत्तकी ने चाबहार बंदरगाह से व्यापार बढ़ाने पर चर्चा की है।

अफगानिस्तान की ओर से कोई भय नहीं होना चाहिए
अफगान विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, मुत्तकी ने मानवीय मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया। भारत को यह भरोसा भी दिया कि अफगानिस्तान की ओर से उसे किसी तरह का कोई भय नहीं होना चाहिए। उन्होंने व्यापारियों, मरीजों व छात्रों को भारत से और ज्यादा वीजा मिलने की उम्मीद जताई। बैठक में वाणिज्य और परिवहन मंत्रालयों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस दौरान राजनीतिक, आर्थिक और नागरिक संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।


पाकिस्तानी मीडिया में छाई मिस्री-मुत्तकी की मुलाकात
पाकिस्तानी मीडिया ने भी भारत के संबंध में अफगान सरकार के बयान को खासी अहमियत दी है। पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया समूह डॉन ने लिखा कि एक ओर पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के संबंध बिगड़ रहे हैं, वहीं भारत और अफगानिस्तान अपने रिश्ते सुधार रहे हैं। दोनों देश चाबहार बंदरगाह के जरिये व्यापार बढ़ाने जा रहे हैं। तालिबान की सरकार को मान्यता न देने के बावजूद भारत अफगानिस्तान के काबुल में छोटा मिशन जारी रखे हुए है और वहां मानवीय आधार पर मदद भी दे रहा है।

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