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तालिबान राज: अफगान सीमा पर तैनात किए फिदायीन, चीन सीमा के लिए बटालियन तैयार

Sun, 03 Oct 2021 06:50 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, काबुल।
एजेंसी, काबुल। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 03 Oct 2021 06:50 AM IST
सार

इस फिदायीन बटालियन के लड़ाके के अपने दुश्मन को निशाना बनाने के लिए छाती पर बम बांधकर दुश्मन के साथ मरने से गुरेज नहीं करते है। इसके अलावा बादरी-313 नाम की भी एक बटालियन है, जो तालिबान की सबसे आधुनिक व सुसज्जित बटालियन है, जिसे फिलहाल काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात किया गया है।

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Taliban deployed fidayeen on the Afghan border
तालिबान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

तालिबान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में फिदायीन तैनात किए हैं। बदक्शां प्रांत के डिप्टी गवर्नर मुल्ला निसार अहमद अहमदी ने बताया कि आत्मघाती हमलावरों की पूरी बटालियन है। खामा प्रेस की रिपार्ट के मुताबिक इन्हें ताजिकिस्तान व चीन सीमा पर तैनात किया जा रहा है। बटालियन का नाम लश्कर-ए-मंसूरी है। इन जिहादी लड़ाकों को देश की सीमाओं पर तैनात किए जाने की तैयारी की जा रही है।

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अहमदी ने बताया कि इस बटालियन के बिना अमेरिकी सेना और पूर्व सरकार को हराना संभव नहीं था। इस बटालियन के लड़ाके के अपने दुश्मन को निशाना बनाने के लिए छाती पर बम बांधकर दुश्मन के साथ मरने से गुरेज नहीं करते है। इसके अलावा बादरी-313 नाम की भी एक बटालियन है, जो तालिबान की सबसे आधुनिक व सुसज्जित बटालियन है, जिसे फिलहाल काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात किया गया है। खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बटालियन के लड़ाके भी फिदायीन होते हैं।
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तालिबान शासन से निराश है कतर
तालिबान से बातचीत में अहम भूमिका निभाने वाला कतर भी अंतरिम सरकार के रवैये से नाराज है। उसने लड़कियों की शिक्षा पर रोक को निराश करने वाला बताते हुए कहा, तालिबानी कतर आकर देखें कि इस्लामी शासन कैसे चलता है। कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अल्दुल रहमान अल थानी ने कहा कि लड़कियों पर तालिबान का फैसला पीछे ले जाने वाला है। उन्होंने यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेफ बोलेल के साथ दोहा में कहा, अफगानिस्तान में हाल ही के फैसले दुर्भाग्यपूर्ण और पीछे ले जाने वाले हैं।
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बढ़त कायम रखना चाहिए
कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद ने कहा, तालिबान को पिछले कुछ सालों में जो बढ़त मिली थी उसे कायम रखना चाहिए। शेख मोहम्मद ने नाराजगी जताई कि हायर सेकेंडरी स्कूलों में लड़कियां पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं।

तालिबान राज में ईंटें बनाकर परिवार चला रहे पूर्व पत्रकार

तालिबान के आने से पहले तक अफगानिस्तान के बदगीस प्रांत में पश्चिमी फर्ज कोह में मीडिया हाउस के लिए काम करने वाले जबीहुल्ला वफा अब अपने दस लोगों के परिवार को पालने के लिए ईंट भट्टे पर मजदूरी करते हैं। वफा उन हजारों लोगों में से एक हैं, जिन्होंने तालिबान के आगमन के बाद अपना रोजगार खोया है।

खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वफा कहते हैं- मैं 10 वर्ष से पत्रकारिता में था। तालिबान के आने के बाद मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। अब मैं परिवार का पेट भरने के लिए ईंट भट्टे पर मजदूरी कर रहा हूं। वफा ने बताया कि सैकड़ों पत्रकार हैं जो उनके ही जैसे हालात से गुजर रहे हैं। 

तालिबान पर समीक्षा करेगी यूएन कमेटी
अफगानिस्तान के यूएन में प्रतिनिधित्व को लेकर संयुक्त राष्ट्र प्रमाणन समिति की बैठक अगले माह हो सकती है। यह समिति तालिबान द्वारा नामित दूत सुहैल शाहीन को यूएन में मान्यता देने पर फैसला करेगी। म्यांमार व अफगानिस्तान को हाल ही में यूएनजीए में बोलने का मौका नहीं मिला था।

महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने कहा, समिति की रिपोर्ट पर यूएन कोई फैसला करेगा। शाहिद ने शुक्रवार को कहा, मैं समिति के संपर्क में हूं। स्वीडन समिति का अध्यक्ष है। मैंने समिति अध्यक्ष को तालिबान के पत्र से अवगत करा दिया है। आमतौर पर समिति नवंबर में बैठक करती है, दिसंबर में महासभा के सामने रिपोर्ट नहीं लाई जाती है और मुझे यकीन है कि स्वीडन प्रमाणन कार्यक्रम को बनाए रखेगा।

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