ताइवान की राष्ट्रपति ने चीन को चेताया: साई इंग-वेन ने कहा - ताइवान पर चीन का कब्जा क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा
चीन ने अपने राष्ट्रीय दिवस पर भी ताइवान की सीमा में 38 विमान भेजे थे। पूरी दुनिया ने इसे आक्रमक कार्रवाई माना है जबकि चीन ने इसे अपना सामान्य अभ्यास बताया।
विस्तार
ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर फॉरेन अफेयर्स पर एक लेख लिखा है। ताइवानी राष्ट्रपति ने इस लेख में कहा कि चीन अगर ताइवान पर कब्ज़ा कर लेता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा। इससे पहले ताइवान के पीएम सन सेंग-चांग ने भी कहा था कि चीन की बढ़ती आक्रमकता ताइवान और क्षेत्र की शांति के लिए एक बड़ा खतरा है।
ताइवान की राष्ट्रपति ने लिखा की- 'ताइवान शांति चाहता है, लेकिन अगर हमारे लोकतंत्र और जीवन जीने के तरीको को कोई भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो हम सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार है। हम अपनी आत्मरक्षा के लिए जो भी सही लगे वह करेंगे, हम चीन के दवाब में नहीं आएंगे'। उन्होंने दुनिया के अन्य देशों को भी संबोधित करते हुए लिखा कि ताइवान पर तानाशाही शासन वाले चीन का कब्जा क्षेत्रीय शांति और दुनिया भर में लोकतांत्रिक साझेदारी के लिए भी विनाशकारी सिद्ध होगा। दुनिया को चीनी खतरे को समझना होगा।
चीन लगातार बढ़ा रहा है आक्रामकता
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अक्तूबर महीने में लगभग 150 सैन्य विमान ताइवान की वायु सीमा में भेजे हैं। इसे चीन के द्वारा अब तक का सबसे आक्रामक कदम बताया जा रहा है। बता दें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को बलपूवर्क चीन में मिलाने की धमकी दी हुई है। चीन ने अपने राष्ट्रीय दिवस पर भी ताइवान की सीमा में 38 विमान भेजे थे। पूरी दुनिया ने इसे आक्रमक कार्रवाई माना है जबकि चीन ने इसे अपना सामान्य अभ्यास बताया और कहा कि यह आत्मरक्षा के लिए जरूरी कदम है।
युद्ध के खतरे को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की और कहा कि उन्हें उम्मीद है चीन ताइवान के मामले में अमेरिका से हुए समझौते का पालन करेगा। अमेरिका ताइवान की सीमा में चीन की ओर से की जा रही उकसावे की कार्रवाई पर करीब से नजर बनाए हुए है।
ताइवान के रक्षा मंत्री ने कहा- चीन कर सकता है हमला
चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता को देखते हुए ताइवान ने चिंता जाहिर की है। चीन के रक्षा मंत्री चीऊ कुओ-चेंग ने कहा कि चीन 2025 तक पूरी क्षमता के साथ उस पर हमला कर सकता है। बुधवार को संसद में सांसदों के कठिन सवालों का जवाब देते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि पिछले 40 सालों में यह सबसे बुरी स्थिति है। जब से वह सेना में भर्ती हुए हैं, ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि चीन के पास पहले से इतने हथियार हैं, जिससे वह ताइवान को हथियारों के दम पर कब्जे में ले सकता है, लेकिन युद्ध इतना आसान नहीं होगा।
इसलिए है चीन और ताइवान में तनातनी
1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन की शियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद काई शेक ने ताइवान द्वीप पर जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्युनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है। लेकिन चीन इस द्वीप को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीन का मानना है कि राष्ट्रपति साई इंग- वेन की सरकार अलगाववादी है, हालांकि इसपर राष्ट्रपति साई इंग- वेन का कहना है कि ताइवान पहले से एक लोकतांत्रिक देश है।