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US Taiwan China: ताइवान की राष्ट्रपति ने अमेरिकी स्पीकर मैकार्थी से की मुलाकात, चीन बौखलाया

Thu, 06 Apr 2023 05:56 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैलिफोर्निया
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैलिफोर्निया Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 06 Apr 2023 05:56 AM IST
सार

यह पहली बार है जब ताइवान के राष्ट्रपति अमेरिकी धरती पर यूएस हाउस के स्पीकर से मिले। चीन ने अमेरिका को धमकाते हुए कहा था कि ताइवान की राष्ट्रपति से मुलाकात करके वह आगे से खेल रहे हैं।

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Taiwanese President meets US Speaker McCarthy
taiwan president - फोटो : Twitter

विस्तार

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन ने कैलिफोर्निया में बुधवार को अमेरिकी सदन के स्पीकर केविन मैकार्थी से मुलाकात की है। हालांकि चीन ने ताइवान को धमकी दी थी कि अगर राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन अमेरिका की स्पीकर से मिलतीं है तो उसके लिए सही नहीं होगा। यह पहली बार है जब ताइवान के राष्ट्रपति अमेरिकी धरती पर यूएस हाउस के स्पीकर से मिले।

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बैठक के बाद, मैकार्थी ने ट्वीट किया कि अमेरिका और ताइवान के लोगों के बीच दोस्ती कभी भी मजबूत नहीं रही है। राष्ट्रपति त्साई का स्वागत करना मेरे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ताइवान एक सफल लोकतंत्र, संपन्न अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य और विज्ञान में वैश्विक लीडर है। संवाद के माध्यम से हमारा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रपति त्साई ने कहा कि गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद स्पीकर मैकार्थी। आपके पास आना और कैलिफॉर्निया की धूप का आनंद लेना खुशी की बात है क्योंकि हम ताइवान और अमेरिका के बीच के बंधन को मजबूत करने के लिए काम करते हैं। 
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ताइवान के राष्ट्रपति बोलीं- लोकतंत्र खतरे में है
ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने बुधवार को कहा कि लोकतंत्र खतरे में है। कैलिफोर्निया की सिमी वैली में रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यूएस हाउस के स्पीकर केविन मैकार्थी के साथ खड़ी त्साई ने कहा कि यह कोई रहस्य नहीं है कि आज हमने जो शांति बनाए रखी है और जिस लोकतंत्र को बनाने के लिए हमने कड़ी मेहनत की है। 
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करीबी रक्षा संबंध रखते हैं जापान और ताइवान
इन द्वीपों को जापान द्वारा सेंकाकस के रूप में जाना जाता है, जबकि चीन ने उन्हें दियाओयू नाम दिया है। ताइवान भी इन द्वीपों पर दावा करता है। हालांकि, उसने किसी भी संघर्ष से बचने के लिए जापान के साथ समझौता किया है, क्योंकि जापान, ताइपे के साथ करीबी रक्षा संबंध रखता है। चीनी रक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित हॉटलाइन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों की नौसेनाओं और वायु सेनाओं ने अपने दावों पर जोर देने के लिए द्वीपों पर आक्रामक गश्त की थी। 

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