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कारोबार की चिंता: अमेरिका के लिए अब महंगी पड़ सकती है कि प्रतिबंध लगाने की नीति

Wed, 15 Dec 2021 05:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 15 Dec 2021 05:14 PM IST
सार

अपने कानून के तहत अमेरिका उन उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा सकता है, जिनमें अमेरिकी उपकरण या अमेरिकी बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल हुआ हो। मई 2020 में लगाए गए प्रतिबंधों का चीनी कंपनी हुवावे पर बहुत खराब असर हुआ। इस प्रतिबंध की वजह से 7 नैनोमीटर या उससे कम माप के उच्च तकनीक वाले चिप्स कंपनी की पहुंच से बाहर हो गए...

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Taiwanese companies fear that their business may also be affected by US sanctions
चिप - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

ताइवान की चिप निर्माता कंपनियों ने अब अपने यहां ही सेमीकंडक्टर उपकरण बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए उन्होंने पिछले तीन दिसंबर को एक करार पर दस्तखत किए। इस खबर का विश्लेषण करते हुए एक अमेरिकी रिसर्च फर्म ने कहा है कि ताइवान की कंपनियों का ये कदम अमेरिका से रिश्ता तोड़ने की दिशा में जा सकता है। इन कंपनियों को चीन को ध्यान में रख कर लगाए गए कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों से नुकसान हो रहा है। ये प्रतिबंध पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगाए थे, जिन्हें राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी जारी रखा है।

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हुवावे को रोकने के लिए लगाए प्रतिबंध

अपने कानून के तहत अमेरिका उन उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा सकता है, जिनमें अमेरिकी उपकरण या अमेरिकी बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल हुआ हो। मई 2020 में लगाए गए प्रतिबंधों का चीनी कंपनी हुवावे पर बहुत खराब असर हुआ। इस प्रतिबंध की वजह से 7 नैनोमीटर या उससे कम माप के उच्च तकनीक वाले चिप्स कंपनी की पहुंच से बाहर हो गए। उससे हुवावे के लिए 5जी फोन बनाना मुश्किल हो गया। नतीजतन, कंपनी का 5जी का बड़ा बाजार उसके हाथ से निकल गया।

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ताइवानी कंपनियों को अंदेशा रहा है कि अमेरिकी प्रतिबंध से उनका कारोबार भी प्रभावित हो सकता है। ताइवान ने अपने को चिप के अग्रणी उत्पादक बनाए रखने की योजना पर अमल कर रहा है। इसके लिए उसने तीन अतिरिक्त साइंस पार्क बनाने की योजना बनाई है। ताइवान मशीन टूल एंड एसेसरी बिल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हाबोर सु ने अखबार ताइपे टाइम्स से कहा- ‘हमारे पास विश्व की अग्रणी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री है। लेकिन हमारे 90 फीसदी सेमीकंडक्टरों में आयातित उपकरणों का इस्तेमाल होता है।’
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वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक नए करार पर ताइवान के चार व्यापार समूहों और तीन स्वयंसेवी संगठनों ने दस्तखत किए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान की कंपनियों का बहुत बड़ा बाजार चीन है। वे अपने उत्पाद चीन को निर्यात करती हैं। उन्हें अंदेशा रहा है कि चीन से कारोबार के कारण अमेरिका उन्हें अपने यहां निर्मित उपकरणों की सप्लाई रोक सकता है।

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक तीन का सेमीकंडक्टर का बाजार 300 बिलियन डॉलर का है। यह सेमीकंडक्टर का सबसे बड़ा बाजार है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय चाहता है कि चीन की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी एसएमआईसी को अमेरिकी उपकरण ना मिलें। जबकि ताइवान की कंपनियां चीन के विशाल बाजार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैँ।

ताइवानी कंपनियां बनाए रखना चाहती हैं दबदबा

चिप बाजार के जानकार डैन हचिसन ने पिछले हफ्ते लिखा था कि ताइवान पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता को खत्म करना चाहता है। नए करार से वह ऐसा करने में सक्षम हो जाएगा। एशिया टाइम्स ने बताया है कि चीन सरकार ने अपने यहां सेमीकंडक्टर के उत्पादन पर खास जोर दिया हुआ है।



इस काम का ज्यादातर ठेका ताइवानी कंपनियों के पास ही है। ताइवान की चिप निर्माता कंपनियां चीन में अपनी अग्रणी भूमिका बनाए रखना चाहती हैं। इसमें अमेरिकी प्रतिबंधों से रुकावट आने का अंदेशा उन्हें था। तो अब उन्होंने एहतियाती कदम उठा लिया है। इससे संकेत मिला है कि प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी नीति अब उसके लिए हानिकारक साबित हो रही है।

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