फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Taiwan White Terror period and 228 Massacre History Explained in Hindi

Taiwan: क्या है 228 नरसंहार की कहानी? जानें आखिर क्यों मार्शल लॉ से 38 साल ‘व्हाइट टेरर’ में रहा ताइवान

Sat, 06 Aug 2022 10:38 AM IST
Jaidev Singh जयदेव सिंह
Updated Sat, 06 Aug 2022 10:38 AM IST
सार

अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी के दौरे के बाद चीन-ताइवान में तनाव जारी है। ताइवान ने कहा है कि चीन हमारी धरती पर हमले के लिए साजिश रच रहा है। इस बीच ताइवान के सबसे बुरे दौर की चर्चा शुरू हो गई है, जिसे व्हाइट टेरर के नाम से जाना जाता है? व्हाइट टेरर क्या है? ताइवान में क्या हालात हैं? आइये जानते हैं...

विज्ञापन
Taiwan White Terror period and 228 Massacre History Explained in Hindi
228 नरसंहार की कहानी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

28 फरवरी ताइवान के इतिहास में बहुत अहम तारीख है। मौजूदा दौर में इस दिन ताइवान में राष्ट्रीय अवकाश होता है। इस दिन ताइवान में राष्ट्रीय शोक रहता है। ये वही तारीख है जिसे 228 नरसंहार के रूप में जाना जाता है। वो घटना जिसके बाद ताइवान ने अपने सबसे बुरे दौर को देखा। जिसे व्हाइट टेरर के नाम से जाना जाता है। आखिर क्यों हुआ था 228 नरसंहार? व्हाइट टेरर क्या है? मौजूदा दौर में ताइवान में क्या हालात हैं? चीन के साथ टकराव की क्या कहानी है? आइये जानते हैं...
विज्ञापन


आखिर क्यों हुआ था 228 नरसंहार? 
कहानी 1895 से शुरू होती है। ये वो दौर था जब ताइवान जापान का उपनिवेश हुआ करता था। 1945 तक इस पर जापान का कब्जा बना रहा। लेकिन, दूसरे विश्वयुद्ध में जापान को मिली हार के बाद जापान ने इस उपनिवेश को छोड़ दिया और चीन की कुओमिनतांग सरकार का ताइवान पर शासन हो गया। नई सरकार के अधिकारी भी आम लोगों की निजी संपत्तियों को जब्त कर रहे थे। सत्ता का दुरुपयोग शुरू हो गया था। ताइवान के लिए कोई व्यवस्थित आर्थिक नीति नहीं थी। यहां तक कि ताइवान के स्थानीय लोगों को नए शासन में भी राजनीतिक भागीदारी से बाहर रखा जा रहा था। कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए गए। 
विज्ञापन


इन प्रतिबंधों में से एक सिगरेट के व्यापार पर लगा प्रतिबंध भी था। 228 नरसंहार की के पीछे ये प्रतिबंध ही था। कहानी ताइपे की एक छोटी सी दुकान से शुरू हुई। जहां अधिकारियों ने एक महिला को बिना अनुमति के सिगरेट बेचने का आरोप लगाकर पकड़ लिया। अधिकारियों ने महिला की पिटाई कर दी। दुकान पर शुरू हुई लड़ाई से लगी चिंगारी एक भीषण आग में बदल गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन




दुकान में शुरू हुई बहस और महिला की पिटाई से तनाव इतना बढ़ा कि एक अधिकारी ने अपनी बंदूक निकालकर भीड़ पर गोली चला दी। इससे एक शख्स घायल हो गया, जिसकी अगले दिन मौत हो गई। उस दिन 28 फरवरी 1947 की तारीख थी। इस घटना के बाद ही ताइवान में व्हाइट टेरर का दौर शुरू हो गया।  

हत्या के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने ‘टोबैको मोनोपॉली ब्यूरो’ के मुख्यालय तक मार्च किया। प्रदर्शकारियों की मांग थी कि हत्या करने वाले एजेंट्स को सजा मिले। लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारियों की भीड़ गवर्नर जरनल चेन यी के कार्यालय की तरफ बढ़ी तो गार्ड्स ने इन पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। इसके बाद हिंसा का ऐसा चक्र शुरू हुआ कि हजारों ताइवान के लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। 

Taiwan White Terror period and 228 Massacre History Explained in Hindi
228 नरसंहार के बाद चीन के उस वक्त के रक्षा मंत्री चॉन्ग शी बाई ताइवान के दौरे पर पहुंचे थे - फोटो : अमर उजाला
व्हाइट टेरर क्या है?
28 फरवरी 1947 को हुई मौत ने लोगों के विद्रोह की आग को चिंगारी दे दी। घटना के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन और हड़ताल होने लगी। लोग ताइपे के झोंगशान पार्क में जमा हुए। भीड़ ने ताइपे रेडियो स्टेशन पर कब्जा कर लिया। रेडियो स्टेशन से 28 फरवरी की घटना की जानकारी प्रसारित कर दी। 

वहीं, सरकार ने बलपूर्वक इस विद्रोह को दबाने की कोशिश की। इसके बाद ही अलगे 38 साल तक ताइवान में मॉर्शल लॉ लगा रहा। यही वो दौर है जिसे व्हॉट टेरर पीरियड के नाम से जाना जाता है। इस दौर में सभी तरह के सार्वजनिक समारोह पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जो भी इस नियम का उल्लंघन करता उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाता था।  

228 नरसंहार के दौरान हुई मौतों और लापता हुए लोगों का कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है। सरकार ने कभी भी इससे जुड़ा कोई आंकड़ा जारी नहीं किया। अलग-अलग अनुमानों में 10,000 से लेकर 30,000 लोगों की मौत का अनुमान लगाया जाता है। इस दौरान अनगिनत लोग ऐसे थे जो लापता हो गए जिनका वर्षों तक कोई पता नहीं चला। कहा जाता है कि 1949 से 1992 के दौरान कम से कम 12 हजार लोगों को विरोध करने पर मार दिया गया। 
 

Taiwan White Terror period and 228 Massacre History Explained in Hindi
व्हाइट टेरर के दौर में हजारों लोग जेलों में डाल दिए गए थे - फोटो : सोशल मीडिया
कैसे खत्म हुआ ताइवान में लगा मार्शल लॉ?
1949 में लगा मार्शल लॉ 1987 तक जारी रहा। 15 जुलाई 1987 को अमेरिका, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं के बाहरी दबाव और मार्शल लॉ का विरोध करे स्थानीय लोगों के दबाव में सरकार ने मार्शल लॉ हटा दिया। मार्शल लॉ के दौरान सरकार के खिलाफ लिखना और बोलना भी अपराध था। मार्शल लॉ हटने के पांच साल बाद 1992 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में संशोधन करके इसे अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया। इसके बाद ताइवान के लोगों को असल मायने में अपने विचार रखने और बोलने की आजादी मिली।
 

Taiwan White Terror period and 228 Massacre History Explained in Hindi
डीपीपी की नेता साई इंग वेन ताइवान की राष्ट्रपति हैं। विपक्षी पार्टी केएमटी के नेता एरिक ची लूलुआंग हैं - फोटो : सोशल मीडिया
अभी क्या हैं ताइवान के हालात?
मौजूदा दौर में ताइवान को एशिया के सबसे स्वतंत्र लोकतांत्रिक देशों में से एक के रूप में पहचाना जाता है। ताइवान के लोगों को अपने राष्ट्रपति का चुनाव करने, वास्तविक लोकतंत्र का अभ्यास करने का अधिकार है। ताइवान का मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ समाचारों की रिपोर्ट कर सकता है। जिस पार्क से विद्रोह की शुरुआत हुई थी उसे अब 228 मेमोरियल पार्क बना दिया गया। वहीं, ताइपे रेडियो स्टेशन को अब ताइपे 228 मेमोरियल म्यूजियम के रूप में जाना जाता है।  
 

Taiwan White Terror period and 228 Massacre History Explained in Hindi
माओ(दाएं) से हारने के बाद चीनी शासक चेंग काई शेक ताइवान चले गए। - फोटो : Social Media
चीन के साथ टकराव की क्या कहानी है?
1945 में जब जापान का शासन ताइवान से हटा तो ताइवान चीन का हिस्सा बन गया। उस वक्त चीन में चाईनीज नेशनलिस्ट पार्टी (Kuomintang, KMT) का शासन था।  1949 में चीनी गृहयुद्ध के दौरान KMT को कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) से हार का सामना करना पड़ा। 1 अक्टूबर 1949 को CPC ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की। चीन पर कम्युनिस्ट पार्टी का राज हो गया। KMT के नेता ताइवान आ गए। यहीं से सरकार चलाने लगे। 1949 से 1987 तक, KMT ने मार्शल लॉ के तहत ही ताइवान पर शासन किया। इस दौरान KMT को अंतराष्ट्रीय स्तर राजनयिक असफलताएं मिलीं। इसकी वजह से ROC को संयुक्त राष्ट्र की सीट खोनी पड़ी। अमेरिका द्वारा 1970 के दशक में CPC के नेतृत्व वाले पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) को राजनयिक मान्यता देना भी इसमें शामिल था। वहीं चीन की कम्युनिस्ट सरकार लगातार ताइवान को अपना हिस्सा बताती रही। KMT इस वक्त ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी है। वहीं, देश में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी का शासन है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed