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अफ्रीकी देशों पर चीन की धौंस: ताइवान के राष्ट्रपति को टालना पड़ा दौरा, तीन देशों पर अनुमति न देने का दबाव?
Wed, 22 Apr 2026 11:57 AM IST
Shivam Garg
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Shivam Garg
Updated Wed, 22 Apr 2026 11:57 AM IST
सार
चीन के दबाव के चलते ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का एस्वातिनी का दौरा स्थगित हो गया है। सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर ने चीनी दबाव के कारण उड़ान की अनुमति वापस ले ली।
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चीन-ताइवान फ्लैग
- फोटो : Freepik
विस्तार
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का इस सप्ताह प्रस्तावित अफ्रीका दौरा अचानक स्थगित कर दिया गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने दावा किया है कि चीन के दबाव के चलते तीन देशों ने उनके विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति वापस ले ली।
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इस्वातिनी यात्रा पर था कार्यक्रम
राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को 22 अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच इस्वातिनी की यात्रा करनी थी। यह देश अफ्रीका में ताइवान का अंतिम कूटनीतिक सहयोगी माना जाता है। राष्ट्रपति के सचिव पैन मेंग-एन ने बताया कि सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर ने बिना किसी पूर्व सूचना के फ्लाइट परमिट रद्द कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया 'यह फैसला चीन के अधिकारियों के भारी दबाव और आर्थिक प्रभाव के कारण लिया गया है।'
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चीन पर गंभीर आरोप
उन्होंने आगे कहा कि चीन का कथित दबाव अन्य देशों के आंतरिक मामलों में खुला हस्तक्षेप है, यह क्षेत्रीय यथास्थिति को बाधित करता है और ताइवानी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि वह इन कार्रवाइयों के लिए उच्च प्रशंसा व्यक्त करना चाहता है। मंत्रालय ने कहा कि संबंधित देशों का एक-चीन सिद्धांत का पालन अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से अनुपालन है, जो ताइवान पर बीजिंग के दावों के संदर्भ में है। मॉरीशस, सेशेल्स और मेडागास्कर सरकारों ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
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लगातार घटते ताइवान के कूटनीतिक संबंध
पिछले कुछ वर्षों में बीजिंग ने ताइवान के राजनयिक सहयोगियों की संख्या कम करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके लिए वह अक्सर कम विकसित देशों में बुनियादी ढांचा और अन्य परियोजनाओं में निवेश करता है। वर्तमान में ताइवान के केवल 12 देशों के साथ ही औपचारिक संबंध बचे हैं, जिनमें अधिकतर लैटिन अमेरिका, कैरिबियन और प्रशांत क्षेत्र के छोटे देश शामिल हैं।
हाल ही में जनवरी 2024 में नाउरू ने ताइवान के बजाय चीन को मान्यता दी। इससे पहले 2023 में होंडुरास और 2021 में निकारागुआ भी ऐसा ही कदम उठा चुके हैं। इससे पहले 2023 में ताइवान की पूर्व राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने इस्वातिनी का दौरा किया था और वहां के राजा मस्वाति III से मुलाकात की थी।
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