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Pakistan Army: 'सैन्य अदालत में नागरिकों का ट्रायल अवैध', पाक की सेना ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दी चुनौती
Fri, 17 Nov 2023 04:05 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 17 Nov 2023 04:05 PM IST
सार
पाकिस्तान की सेना ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सेना ने उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें देश की शीर्ष अदालत ने सैन्य अदालत में नागरिकों के ट्रायल को गैरकानूनी करार दिया था। फैसला पांच जजों की पीठ ने सुनाया था।
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पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की पीठ ने सैन्य अदालत में आम नागरिकों के ट्रायल को गैरकानूनी करार दिया था। इस फैसले को चुनौती देने के लिए सेना ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सेना ने अपील की है कि अदालत पांच जजों की पीठ के फैसले पर दोबारा विचार करे। सेना ने सुप्रीम कोर्ट में जिस फैसले को चुनौती दी है, उसमें नौ मई की हिंसा में आरोपी नागरिकों का ट्रायल मिलिट्री कोर्ट में हुआ। इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है।
पाकिस्तानी सेना की अपील पर समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने पांच सदस्यीय पीठ के आदेश को चुनौती दी है। शुक्रवार को आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने विगत 23 अक्तूबर को सैन्य अदालतों में नागरिकों के मुकदमे को "अवैध" (Null and Void) घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गिरफ्तार इमरान समर्थकों के मामलों की सुनवाई सामान्य आपराधिक अदालतों में की जाए।
9 मई के हिंसक विरोध प्रदर्शन में इमरान खान के समर्थकों की कथित भागीदारी मामले पर जियो न्यूज ने बताया, "अपनी इंट्रा-कोर्ट अपील में, रक्षा मंत्रालय ने शीर्ष अदालत से 23 अक्तूबर के फैसले को रद्द करने और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की उन धाराओं को बहाल करने का आग्रह किया, जिन्हें पीठ ने अवैध घोषित किया था।" सेना ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि सेना अधिनियम की धारा 59 (4) को बहाल किया जाए।
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याचिका में सेना ने दलील दी है कि सेना अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की कुछ धाराओं को अवैध घोषित करने से देश को नुकसान होगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि 9-10 मई की हिंसक घटनाओं के संबंध में 103 आरोपियों और अन्य लोगों को हिरासत में रखा जा सकता है, लेकिन इन पर सामान्य या विशेष कानून के तहत स्थापित देश की सामान्य आपराधिक अदालतों में मुकदमा चलाया जा सकता है।
बता दें कि बीते 9 मई को पंजाब रेंजर्स ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) चीफ और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई से आक्रोशित इमरान के सैकड़ों समर्थकों ने सैन्य और सरकारी प्रतिष्ठानों पर धावा बोल दिया था। उपद्रव के दौरान सेना के शीर्ष अधिकारी (जनरल) के घर पर आगजनी की खबरें भी सामने आई थीं।
गिरफ्तार आरोपियों पर कार्रवाई के लिए सैन्य अदालत को चुना गया। इससे असंतुष्ट शुहादा फोरम, बलूचिस्तान और पाकिस्तान में कार्यवाहक सिंध सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। दोनों ने अपील की है कि सैन्य अदालतों में नागरिकों के मुकदमों को असंवैधानिक घोषित किया जाए। शुहादा बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादी वारदात में शहीद सैनिकों और पीड़ितों को कानूनी और वित्तीय सहायता, परामर्श सेवाएं और मान्यता दिलाने के लिए काम करने वाला गैर सरकारी संगठन है।
सिंध के मुख्य सचिव ने सैन्य अदालतों में नागरिकों के मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिकाओं में शीर्ष अदालत द्वारा पारित आदेश के खिलाफ अपील दायर की। कार्यवाहक प्रांतीय सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा कि अपील लंबित रहने तक 23 अक्तूबर के संक्षिप्त आदेश को निलंबित कर दिया जाए। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अलग से अनुरोध करने के एक दिन बाद रक्षा मंत्रालय की तरफ से याचिका गुरुवार को दाखिल की गई।
इसके अलावा पूर्व पीएम इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी और अन्य लोगों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पीटीआई पारदर्शिता की कमी के आधार पर सैन्य परीक्षणों के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंची है।
बता दें कि नागरिकों के ट्रायल के लिए सैन्य अदालतों का उपयोग करने का निर्णय शहबाज शरीफ की सरकार ने लिया। इस सरकार का कार्यकाल अगस्त में पूरा हो चुका है। उन्होंने कार्यभार एक कार्यवाहक सरकार को सौंपा है, जिसकी निगरानी में अगले साल 8 फरवरी को आम चुनाव कराए जाने हैं। इस अपील के साथ यह भी दिलचस्प है कि महज दो दिन पहले, 15 नवंबर को, पाकिस्तान के तीन प्रमुख राजनीतिक दलों के कई सीनेटरों ने सैन्य अदालतों से जुड़े मुद्दे पर सीनेट में विरोध प्रदर्शन किया। सीनेटरों ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग भी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्यवाहक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खारिज करने वाला प्रस्ताव पारित कराया। सीनेटरों का आरोप है कि ऐसा जल्दबाजी में किया गया।
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पाकिस्तानी सेना की अपील पर समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने पांच सदस्यीय पीठ के आदेश को चुनौती दी है। शुक्रवार को आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने विगत 23 अक्तूबर को सैन्य अदालतों में नागरिकों के मुकदमे को "अवैध" (Null and Void) घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गिरफ्तार इमरान समर्थकों के मामलों की सुनवाई सामान्य आपराधिक अदालतों में की जाए।
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9 मई के हिंसक विरोध प्रदर्शन में इमरान खान के समर्थकों की कथित भागीदारी मामले पर जियो न्यूज ने बताया, "अपनी इंट्रा-कोर्ट अपील में, रक्षा मंत्रालय ने शीर्ष अदालत से 23 अक्तूबर के फैसले को रद्द करने और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की उन धाराओं को बहाल करने का आग्रह किया, जिन्हें पीठ ने अवैध घोषित किया था।" सेना ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि सेना अधिनियम की धारा 59 (4) को बहाल किया जाए।
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याचिका में सेना ने दलील दी है कि सेना अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की कुछ धाराओं को अवैध घोषित करने से देश को नुकसान होगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि 9-10 मई की हिंसक घटनाओं के संबंध में 103 आरोपियों और अन्य लोगों को हिरासत में रखा जा सकता है, लेकिन इन पर सामान्य या विशेष कानून के तहत स्थापित देश की सामान्य आपराधिक अदालतों में मुकदमा चलाया जा सकता है।
बता दें कि बीते 9 मई को पंजाब रेंजर्स ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) चीफ और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई से आक्रोशित इमरान के सैकड़ों समर्थकों ने सैन्य और सरकारी प्रतिष्ठानों पर धावा बोल दिया था। उपद्रव के दौरान सेना के शीर्ष अधिकारी (जनरल) के घर पर आगजनी की खबरें भी सामने आई थीं।
गिरफ्तार आरोपियों पर कार्रवाई के लिए सैन्य अदालत को चुना गया। इससे असंतुष्ट शुहादा फोरम, बलूचिस्तान और पाकिस्तान में कार्यवाहक सिंध सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। दोनों ने अपील की है कि सैन्य अदालतों में नागरिकों के मुकदमों को असंवैधानिक घोषित किया जाए। शुहादा बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादी वारदात में शहीद सैनिकों और पीड़ितों को कानूनी और वित्तीय सहायता, परामर्श सेवाएं और मान्यता दिलाने के लिए काम करने वाला गैर सरकारी संगठन है।
सिंध के मुख्य सचिव ने सैन्य अदालतों में नागरिकों के मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिकाओं में शीर्ष अदालत द्वारा पारित आदेश के खिलाफ अपील दायर की। कार्यवाहक प्रांतीय सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा कि अपील लंबित रहने तक 23 अक्तूबर के संक्षिप्त आदेश को निलंबित कर दिया जाए। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अलग से अनुरोध करने के एक दिन बाद रक्षा मंत्रालय की तरफ से याचिका गुरुवार को दाखिल की गई।
इसके अलावा पूर्व पीएम इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी और अन्य लोगों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पीटीआई पारदर्शिता की कमी के आधार पर सैन्य परीक्षणों के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंची है।
बता दें कि नागरिकों के ट्रायल के लिए सैन्य अदालतों का उपयोग करने का निर्णय शहबाज शरीफ की सरकार ने लिया। इस सरकार का कार्यकाल अगस्त में पूरा हो चुका है। उन्होंने कार्यभार एक कार्यवाहक सरकार को सौंपा है, जिसकी निगरानी में अगले साल 8 फरवरी को आम चुनाव कराए जाने हैं। इस अपील के साथ यह भी दिलचस्प है कि महज दो दिन पहले, 15 नवंबर को, पाकिस्तान के तीन प्रमुख राजनीतिक दलों के कई सीनेटरों ने सैन्य अदालतों से जुड़े मुद्दे पर सीनेट में विरोध प्रदर्शन किया। सीनेटरों ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग भी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्यवाहक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खारिज करने वाला प्रस्ताव पारित कराया। सीनेटरों का आरोप है कि ऐसा जल्दबाजी में किया गया।