वैक्सीन से पेटेंट हटाने की मुहिम को झटका: असल मुद्दों पर नाकाम रही बाइडन और एंजेला मर्केल के बीच शिखर वार्ता
पब्लिक सिटिजेन्स ट्रेड वॉच के निदेशक लॉरी वालाश ने कहा- उन्हें उम्मीद थी कि बाइडन पेटेंट हटाने के प्रयासों में रुकावट न डालने के लिए मर्केल को राजी करेंगे। लेकिन अब लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया गया है...
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जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की यहां अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ हुई मुलाकात नाकाम रही। दोनों नेताओं ने इस नाकामी पर परदा डालने के लिए इस जुमले का इस्तेमाल किया कि ‘अच्छे दोस्तों के बीच भी मतभेद हो सकते हैं।’ लेकिन मुलाकात के बाद कई विश्लेषणों में कहा गया है कि तात्कालिक महत्व के जिन दो सबसे बड़े मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच सहमति उभरने की अपेक्षा की गई थी, उन पर बात कहीं आगे नहीं बढ़ी। इस शिखर वार्ता से इसलिए भी अधिक उम्मीद जोड़ी गई थी, क्योंकि चांसलर के तौर पर मर्केल की ये आखिरी अमेरिका यात्रा थी। गौरतलब है कि सितंबर में जर्मनी में होने वाले चुनाव के बाद मर्केल नए चांसलर को सत्ता सौंप देंगी।
कुछ अमेरिकी विश्लेषकों के मुताबिक उम्मीद जोड़ी गई थी कि इस बैठक में बाइडन जर्मन चांसलर को कोरोना वैक्सीनों पर से पेटेंट हटाने के लिए राजी कर लेंगे। इन वैक्सीनों को आसानी से दुनियाभर के लोगों को उपलब्ध कराने के मकसद से बाइडन प्रशासन पेटेंट अस्थायी रूप से हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। लेकिन उसका कई यूरोपीय देशों ने विरोध किया है। विरोध करने वालों में जर्मनी भी है। बाइडन-मर्केल शिखर वपार्ता के बाद थिंक टैंक पब्लिक सिटिजेन्स ट्रेड वॉच ने एक बयान में कहा- ‘पेटेंट हटाने पर मर्केल को राजी करने में बाइडन की विफलता से कोरोना महामारी को खत्म करने के प्रयासों को जोरदार झटका लगा है।’
पब्लिक सिटिजेन्स ट्रेड वॉच के निदेशक लॉरी वालाश ने वेबसाइट कॉमनड्रीम्स.ऑर्ग से कहा- ‘दुनियाभर में वैक्सीन की कमी के कारण लोग मर रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि बाइडन पेटेंट हटाने के प्रयासों में रुकावट न डालने के लिए मर्केल को राजी करेंगे। लेकिन अब लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया गया है। हम राष्ट्रपति बाइडन से अपील करते हैं कि इस दिशा में अब वे दोगुने स्तर पर प्रयास करें।’
खबरों के मुताबिक शिखर बैठक में बाइडन ने पेटेंट का मसला उठाया। लेकिन यह मालूम नहीं हो सका है कि उन्होंने इसके लिए मर्केल पर कितना दबाव बनाया। साझा प्रेस कांफ्रेंस में बाइडन ने इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया। जबकि मर्केल ने औपचारिक बातें कीं। उन्होंने कहा- हमें इस बात का भरोसा है कि महामारी से तभी उबरा जा सकता है जब हम अपने-अपने देशों में अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण करेँ। लेकिन पेटेंट के सवाल पर उन्होंने कोई बात नहीं कही।
इस बीच यह भी साफ है कि रूस से जर्मनी तक बन रही गैस पाइपलाइन नॉर्ड स्ट्रीम-2 के मुद्दे पर भी बाइडन और मर्केल के बीच मतभेद पहले की तरह कायम रहे। साझा प्रेस कांफ्रेंस में इस बारे में पूछे जाने पर बाइडन ने कहा- ‘नॉर्ड स्ट्रीम-2 के बारे में मेरी राय सबको मालूम है। लेकिन अच्छे दोस्त असहमत हो सकते हैं। जब मैं राष्ट्रपति बना, तब तक ये प्रोजेक्ट 90 फीसदी पूरा हो चुका था। इसलिए यह नहीं लगा कि प्रतिबंध लगाना कारगर साबित होगा।’ बाइडन ने कहा कि उनकी राय में अब जर्मनी के साथ मिल कर इस पर काम करना उचित होगा कि इस प्रोजेक्ट के कारण यूक्रेन के हित प्रभावित ना हों। मर्केल ने कहा कि इसे सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों की सरकारों ने साझा प्रयास करने का फैसला किया है।