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सर्द साइबेरिया में गर्मी की आशंका 600 गुना बढ़ी, ब्रिटेन, रूस सहित इन देशों के वैज्ञानिकों ने किया संयुक्त अध्ययन

Sat, 18 Jul 2020 05:25 AM IST
अवधेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क, न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, मॉस्को Published by: अवधेश कुमार Updated Sat, 18 Jul 2020 05:25 AM IST
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Summer heat rises at least 600 times in wintry Siberia
जलवायु परिवर्तन - फोटो : pixabay
रूस के यूरेशियाई क्षेत्र में साइबेरिया की धरती दुनिया की सबसे सर्द इलाकों में से एक है। लेकिन इस साल वहां रिकॉर्ड गर्मी पड़ी है जो जलवायु परिवर्तन के खतरनाक असर को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित कर रही है। एक ताजा शोध में पाया गया है कि ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण साइबेरिया में गर्मी की आशंका कम से कम 600 गुना बढ़ गई है। शोधकर्ताओं की टीम ने जनवरी से जून 2020 तक साइबेरिया के मौसम का डाटा एकत्र करके पाया कि इस दौरान एक दिन ऐसा भी था जब क्षेत्र का तापमान रिकॉर्ड 38 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। 
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साइबेरिया में आम तौर पर साल का अधिकतम तापमान 10 से 17 डिग्री के बीच ही पहुंच पाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जलवायु परिवर्तन के कारण साइबेरिया के तापमान में जिस तरह का बदलाव आया है, ऐसा 80,000 सालों में एक बार होता है। इस शोध के प्रमुख लेखक और ब्रिटेन के मौसम वैज्ञानिक एंड्रयू सियावरेला का कहना है कि ऐसा इनसानी हस्तक्षेप के बिना नहीं हुआ होता है। इस शोध के लिए ब्रिटेन, रूस, नीदरलैंड, जर्मनी और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने 70 अलग-अलग मॉडलों का इस्तेमाल करके यह पता लगाने की कोशिश की कि यह बदलाव कहीं कोयला, तेल और गैस जलाने के चलते तो नहीं हो रहे।
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जीवाश्म ईंधन का जलना बड़ा कारण

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एन्वायरनमेंटल चेंज इंस्टीट्यूट के निदेशक फ्रीडेरीके ऑटो ने कहा, शोधकर्ताओं ने व्यापक अध्ययन किया है। उन्होंने कहा, इस साल 2020 में साइबेरिया जैसे हाल और कहीं भी नहीं देखे गए। उन्होंने जून में रूसी शहर वेरखोयस्क में भी तापमान में वृद्धि देखी। इसका कारण जीवाश्म ईंधन को जलाने से वातावरण में गैसों का फंसना है। जंगलों की आग व कीट प्रकोप से भी हालात बिगड़े।
 

अब तक का सबसे विश्वसनीय शोध

वैज्ञानिक जगत में इस शोध को बेहद विश्वसनीय बताया जा रहा है। फ्रांसीसी वैज्ञानिक वैलेरी मेसन डेलमोटे ने बताया, इस तरह के शोध लोगों और दुनिया के नेताओं को एक मौका देते हैं कि वे बिंदुओं को जोड़ें व मौसम में बदलाव की घटनाओं को जलवायु परिवर्तन के साथ समझें। पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञानी डेविड टिटले ने कहा, यह शोध दिखाता है कि भविष्य के मौसम की सुगबुगाहट बताता है।
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