स्वेज नहर: जानिए क्या है इसका इतिहास और कब-कब यहां फंसे थे जहाज
स्वेज नहर में 23 मार्च से लगा जाम आखिरकार सोमवार को खुल गया। नहर में फंसे 'एवरगिवन' नाम के जहाज को छह दिन बाद निकाल लिया गया। जहाज के फंसने की वजह से नहर में यातायात बंद हो गया था और हर घंटे करीब 3 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इस नहर के बंद होने से वैश्विक व्यापार को बड़ा झटका लगने की आशंका थी। ‘लेथ एजेंसीज’ ने बताया कि फंसे हुए जहाज को निकालने के लिए 10 ‘टगबोट’ की मदद ली गई। कंपनी ने बताया कि सोमवार शाम पोत को पानी की सतह पर लाने में कामयाबी मिल गई। टगबोट ने जहाज को ग्रेट बिटर झील की तरफ खींचा, जहां इसका निरीक्षण किया जाएगा।
एशिया और यूरोप के बीच माल लेकर जाने वाला, पनामा के ध्वज वाला ‘द एवरगिवन’ जहाज स्वेज शहर के पास मंगलवार को नहर में फंस गया था, जिससे यातायात बाधित हो गया। यह जलमार्ग वैश्विक परिवहन के लिए बेहद अहम है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 19,000 पोत इस नहर से होकर गुजरे थे। इस नहर से दुनिया का करीब 10 प्रतिशत व्यापार होता है। यह जलमार्ग तेल के परिवहन के लिए अहम है।
इसलिए महत्वपूर्ण है स्वेज नहर
स्वेज नहर दुनिया के सबसे व्यस्ततम समुद्री मार्गों में से एक है। पूरी दुनिया में होने वाले समुद्री कारोबार का 12 फीसदी आवागमन इसी नहर से होता है। नहर बनने के बाद एशिया और यूरोप के बीच की दूरी 6000 किलोमीटर कम हो गई है। सफर में भी सात दिनों की कमी आई है। रोजाना यहां से लगभग 50 जहाज गुजरते हैं जिन पर 10 बिलियन डॉलर यानी करीब 73 हजार करोड़ रुपये तक का सामान लदा होता है।
ऐसे रुक गया था यातायात
'एवरगिवन' जहाज चीन से माल लादने के बाद नीदरलैंड के पोर्ट रॉटरडैम जा रहा था। यहां से गुजरने के दौरान तेज और धूलभरी हवा की वजह से जहाज नहर में ही फंस गया। 400 मीटर लंबे इस जहाज में 2 लाख टन से भी ज्यादा का माल लदा था। इस जहाज को 2018 में बनाया गया था, जिसे एवरग्रीन मरीन नामक कंपनी संचालित करती है। जहाज के चालक दल में 25 भारतीय भी शामिल थे। इस जहाज के फंसने से नहर में यातायात पूरी तरह बंद हो गया था और रोजाना करोड़ों का नुकसान हो रहा था। नहर के दोनों छोर पर करीब 150 जहाज फंस गए थे।
नहर का इतिहास
1854 में फ्रांस के राजनयिक डि लेसेप्स ने स्वेज नहर को बनाने की योजना पर काम करना शुरू किया था। साल 1858 में एक कंपनी की स्थापना की गई जिसका नाम यूनिवर्सल स्वेज शिप कैनाल कंपनी था। इस कंपनी को 99 साल के लिए नहर के निर्माण और संचालन का काम सौंपा गया। ये नहर 1869 में बनकर तैयार हुई और इसे अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खोल दिया गया।
1956 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया। स्वेज नहर कंपनी में ज्यादातर शेयर ब्रिटिश और फ्रांस सरकार के थे। नासिर के इस कदम से दोनों देशों में हड़कंप मच गया। ब्रिटेन, फ्रांस और इजराइल ने मिस्र पर हमला कर दिया। हालांकि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की वजह से ब्रिटेन और फ्रांस को अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी। इसके बाद से नहर पर मिस्र का अधिकार है।
इससे पहले भी बंद रही है स्वेज नहर
- 26 जुलाई 1956 को पहली बार इस नहर को बंद किया गया था। नहर के राष्ट्रीयकरण की घोषणा के बाद उपजे विवाद के कारण ये फैसला लिया गया था।
- जून 1967 में इजराइल का मिस्र, सीरिया और जॉर्डन से युद्ध छिड़ गया था। छह दिन चले इस युद्ध के दौरान 15 जहाज स्वेज नहर के रास्ते में फंस गए थे। इनमें से एक जहाज डूब गया था और बाकी 14 अगले आठ साल तक कैद होकर रह गए। इसके कारण इस नहर से व्यापार आठ साल तक बंद रहा था।
- साल 2004, 2006 और 2017 में जहाजों के फंसने के कारण यातायात कुछ दिनों के लिए बाधित हुआ था।