श्रीलंका धमाकों में मृतकों की संख्या हुई 290, जेडीएस के दो कार्यकर्ताओं की मौत, पांच लापता
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ईस्टर के मौके पर हुए आठ बम धमाकों ने श्रीलंका को दहला दिया। पूरी दुनिया इन हमलों की कड़ी निंदा कर रही है। धमाके में करीब 290 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हैं। मरने वालों में छह भारतीय नागरिक भी हैं। फिलहाल किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि शक के आधार पर 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने ‘एएफपी’ को बताया कि इन 24 लोगों को कोलंबो और उसके आसपास दो स्थानों से गिरफ्तार किया गया है।
दो जेडीएस कार्यकर्ताओं की मौत, पांच लापता
विदेश मंत्रालय ने दो जनता दल सेक्युलर के कार्यकर्ताओं की मौत की पुष्टि कर दी है। जिनके नाम केजी हनुमानथरयप्पा और एम रंगरप्पा हैं। दोनों की राजधानी कोलंबो में हुए धमाके में मौत हुई है। कार्यकर्ताओं की मौत पर कुमारस्वामी ने कहा, 'जेडीएस कार्यकर्ताओं की मौत से मुझे गहरा सदमा पहुंचा है। उन्हें मैं निजी तौर पर जानता था। दुख की इस घड़ी में हम उनके परिवार के साथ खड़े हैं।
तौहिद जमात संगठन पर शक
इन हमलों के पीछे तौहिद जमात संगठन का नाम सामने आ रहा है। यह एक इस्लामिक संगठन है जिसका एक धड़ा भारत के तमिलनाडु में सक्रिय है। इसका नाम आतंकी घटनाओं से जुड़ता रहा है। इन हमलों से पहले श्रीलंका के मुख्य पुलिस अधिकारी ने चेतावनी थी कि देशभर के चर्चों को निशाना बनाया जा सकता है।
पुलिस मुखिया पूजुथ जयसुंद्रा ने 11 अप्रैल को श्रीलंका के वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी थी। अपने भेजे हुए अलर्ट में उन्होंने लिखा था, 'विदेशी खुफिया विभाग से जानकारी मिली है कि नेशनल तौहिद जमात (एनजीटी) नाम का संगठन आत्मघाती हमले करने की तैयारी कर रहा है।' रविवार को हुए हमले ठीक उसी तरह के हैं जिन्हें इस्लामिक संगठन अंजाम देता है।
श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में श्रीलंका तौहिद जमात (एसएलटीजे) की मौजूदगी है जो महिलाओं के लिए शरिया कानून और मस्जिदों के निर्माण पर जोर देता है और सांप्रदायिक संदेशों को प्रसारित करता है। इन हमलों को जिस तरह से अंजाम दिया गया है कि वह 2016 में बांग्लादेश के ढाका में होली आर्टिसन बेकरी में हुए धमाके के समान है। इसे वहां के स्थानीय लड़कों ने अंजाम दिया था लेकिन उन्हें इस्लामिक स्टेट ने प्रशिक्षण दिया है।
हमलों को अंजाम देने के लिए ईस्टर के मौके को चुना गया जिससे कि यह साफ है कि उनका निशाना ईसाई धर्म के लोग ही थे। तौहिद का हाथ इन हमलों के पीछे है या नहीं यह अभी साफ नहीं है। जांच के बाद ही कुछ साफ हो पाएगा लेकिन यह संकेत है कि जिहादी आतंकवाद श्रीलंका में अपने पैर पसार रहा है।
एसएलटीजे की गतिविधियों का बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने विरोध किया था जिसकी वजह से बौद्ध और मुस्लिमों के बीच तनाव बढ़ गया था। शुरुआती आकलन से यह पता चला है कि हमलों को श्रीलंका के स्थानीय मुस्लिमों ने अंजाम दिया है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे बिना बाहरी शक्ति के समर्थन के अंजाम देना मुश्किल है।
क्या है तौहिद जमात संगठन
तौहिद जमात एक इस्लामिक चरमपंथी संगठन है। यह वहाबी प्रचार-प्रसार के लिए जाना जाता है। इसकी मौजूदगी श्रीलंका के पूर्वी प्रांत की तरफ ज्यादा मिलती है। यह यहां पर कट्टरपंथी संदेशों के प्रसार के लिए महिलाओं को बुर्का पहनने और मस्जिदों के निर्माण के साथ शरिया कानून को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। इस संगठन ने पिछले साल बौद्ध मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया था। माना जा रहा है कि इन हमलों में सीरिया से लौटे आईएस आतंकी जुड़े हो सकते हैं।
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