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Sri Lanka: 13वें संशोधन को लागू करने की योजना बना रहे विक्रमसिंघे, सिंहली समुदाय की पार्टियों में नाराजगी

Wed, 02 Aug 2023 06:01 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 02 Aug 2023 06:01 PM IST
सार

Sri Lanka: श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे देश के अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के साथ सुलह के प्रयासों के तहत 13वें संशोधन को पूरी तरह से लागू करने की अपनी कोशिश पर आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं।

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Sri Lankan President Wickremesinghe to press ahead with 13th Amendment for reconciliation with minority Tamils
रानिल विक्रमसिंघे (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे देश के अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के साथ सुलह के प्रयासों के तहत 13वें संशोधन को पूरी तरह से लागू करने की अपनी कोशिश पर आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं। राष्ट्रपति के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

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श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिल समुदाय 13वें संशोधन को लागू करने की मांग कर रहा है जिसमें उसे सत्ता का हस्तांतरण करने का प्रावधान है। 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद 13 वां संशोधन (13 ए) लाया गया था। इसने उत्तरी और पूर्वी प्रांतों के अस्थायी विलय के साथ 9 प्रांतों को स्थानांतरित इकाइयों के रूप में बनाया।

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राष्ट्रपति के अधिकारियों ने बताया कि विक्रमसिंघे अगले सप्ताह संसद में अपना भाषण देंगे, जब नियमित सत्र चल रहा होगा। एक अधिकारी ने कहा, 'राष्ट्रपति प्रांतीय परिषदों को दी जा सकने वाली सभी शक्तियों के साथ इसे लागू करने की अपनी योजना की रूपरेखा तैयार करेंगे।' पिछले महीने सर्वदलीय बैठक के दौरान विक्रमसिंघे ने कहा था कि पुलिस शक्तियों को छोड़कर सभी शक्तियां परिषदों को दी जा सकती हैं।

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पिछले महीने सर्वदलीय बैठक के दौरान विक्रमसिंघे ने कहा था कि पुलिस शक्तियों को छोड़कर सभी शक्तियां परिषदों को दी जा सकती हैं। वह 13ए के पूर्ण कार्यान्वयन पर विभिन्न राजनीतिक दलों से प्राप्त सभी प्रस्तावों को संसद को भी सौंपेंगे। हालांकि, मुख्य तमिल पार्टी तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) वार्ता में रुके हुए प्रांतीय परिषद चुनाव कराने पर अड़ी हुई थी। टीएनए ने श्रीलंका सरकार के पिछले बयानों का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि पूर्ण शक्तियां दी जाएंगी।
 

चुनाव सुधारों को लागू करने के कदम के बाद 2018 से नौ प्रांतों के लिए चुनाव रुके हुए हैं। मौजूदा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चुनाव कराने के लिए अब इसे संसदीय संशोधन की आवश्यकता है। विक्रमसिंघे ने अपनी हालिया दो दिवसीय भारत यात्रा के तुरंत बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी व्यापक बातचीत में 13ए का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। मोदी ने 13ए को पूरी तरह से लागू होते देखने की भारत की इच्छा दोहराई थी।
 

सिंहली बहुमत वाली पार्टियों ने विक्रमसिंघे से परिषद के रुके हुए चुनाव कराने का आग्रह किया है। कुछ सिंहली पार्टियों ने अपनी आशंका ओं को फिर से जताया है कि परिषदों को पूर्ण शक्तियां द्वीप राष्ट्र से उत्तर और पूर्व को अलग करने का मार्ग प्रशस्त करेंगी। 
 

सर्वदलीय बैठक में राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा था कि संसद के माध्यम से क्रॉस-पार्टी आम सहमति की आवश्यकता है और उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पार्टियों से एक साथ आने का आग्रह किया था। अधिकारियों ने कहा कि विक्रमसिंघे का संसदीय भाषण अगले सप्ताह मंगलवार से किसी भी दिन हो सकता है। विक्रमसिंघे ऐसे समय में हस्तांतरण के मुद्दे को आगे लाने के लिए बहुसंख्यक सिंहली समुदाय की पार्टियों के निशाने पर आ गए हैं, जब देश अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

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