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Sri Lanka: ईयू और यूएनएचआरसी के दबाव में झुका श्रीलंका, आतंकवाद रोधी कानून में करेगा संशोधन
Fri, 28 Jan 2022 05:24 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, कोलंबो
पीटीआई, कोलंबो
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 28 Jan 2022 05:24 PM IST
सार
नजरबंदी की अवधि को 18 महीने से घटाकर 12 महीने किया जाना है। संशोधन यह सुनिश्चित करने के लिए है कि बंदी को यातना या किसी भी अपमानजनक तरीके से सुरक्षित रखा जाए।
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श्रीलंका
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
श्रीलंका अपने विवादास्पद आतंकवाद-रोधी कानून में संशोधन करेगा, जो पुलिस को बिना किसी मुकदमे के संदिग्धों को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की तरफ से श्रीलंका पर लगातार दबाव पड़ रहा था कि यह कानून मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है।
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सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया
सरकार ने गुरुवार को गजट नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि आतंकवाद निरोधक कानून (पीटीए) में संशोधन किया जाएगा। 1979 में लागू किया गया पीटीए अधिकारियों को वारंट रहित गिरफ्तारी और तलाशी लेने की अनुमति देता है, यदि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने का संदेह है। यह कदम जिनेवा में यूएनएचआरसी के मार्च सत्र से पहले उठाया गया है जहां श्रीलंका के अधिकारों और प्रगति की जवाबदेही की समीक्षा की गई है।
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अधिकारियों ने कहा कि विधेयक कई संशोधनों का प्रस्ताव करता है और यह सुनिश्चित करता है कि संदिग्धों को उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने और राहत पाने की अनुमति दी जाए। यह हिरासत में व्यक्ति को कानूनी पहुंच की अनुमति देने का प्रस्ताव करता है और रिश्तेदारों को बंदी के साथ संवाद करने की भी अनुमति देता है।
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उन्होंने कहा कि नजरबंदी की अवधि को 18 महीने से घटाकर 12 महीने किया जाना है। संशोधन यह सुनिश्चित करने के लिए है कि बंदी को यातना या किसी भी अपमानजनक तरीके से सुरक्षित रखा जाए, मजिस्ट्रेट के लिए संदिग्ध को हिरासत में लेने के स्थान का दौरा करना भी अनिवार्य बनाता है। इसमें किसी संदिग्ध व्यक्ति को न्यायिक चिकित्सा अधिकारी के समक्ष पेश करने की अनुमति देने के प्रावधान भी शामिल हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे व्यक्ति को यातना का शिकार नहीं बनाया गया है।